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सारांशः अगर आपने 5 साल से Nifty 50 में पैसा लगा रखा है, तो आपको अपना रिटर्न शायद कम लग रहा होगा. पर इंडेक्स की कंपनियों ने अपना काम पूरा किया. तो कमाई गई कहां? इसका जवाब एक ऐसे आंकड़े में छिपा है, जिसे ज़्यादातर निवेशक शुरुआत से पहले कभी देखते ही नहीं और यही आंकड़ा तय करता है कि आपकी SIP आज क्या ख़रीद रही है.
अगर आपने 5 साल पहले Nifty 50 में पैसा लगाया था, तो आपको हर साल 5.7% का रिटर्न मिला है. यह कमज़ोर रिटर्न है. पर इंडेक्स की कंपनियों ने आपको निराश नहीं किया. उनका मुनाफ़ा हर साल 12.5% बढ़ा. आपको चोट उस प्राइस से लगी, जो आपने अक्तूबर 2021 में उस मुनाफ़े के लिए चुकाया था. और वो प्राइस अब काफ़ी नीचे आ चुका है.
8 अक्तूबर 2026 को Nifty गिरकर 22,180 पर आ गया, जो एक साल में उसका सबसे निचला स्तर है. 19 अक्तूबर को आप इसे इसकी कंपनियों की एक साल की कमाई की तुलना में क़रीब 19 गुना पर ख़रीद सकते थे. जबकि पिछले पांच साल में आमतौर पर यह आंकड़ा क़रीब 22 रहा है.
कमाई तो बढ़ी, पर चुकाए गए प्राइस ने उसका ज़्यादातर फ़ायदा छीन लिया
Nifty जैसे इंडेक्स से आपका रिटर्न तीन चीज़ों से आता है. पहली, कंपनियों का मुनाफ़ा कितनी तेज़ी से बढ़ता है. दूसरी, निवेशक उस मुनाफ़े के लिए कितना पैसा देने को तैयार हैं. इसे प्राइस-टू-अर्निंग रेशियो, यानी P/E कहते हैं: हर एक रुपये के सालाना मुनाफ़े के लिए आप कितने रुपये चुकाते हैं. और तीसरी, डिविडेंड, यानी वो पैसा जो कंपनियां अपने शेयरहोल्डरों को बांटती हैं.
19 अक्तूबर 2021 से 19 अक्तूबर 2026 के बीच इन तीनों का हिसाब ऐसा रहा. मुनाफ़ा हर साल 12.5% बढ़ा, यानी कुल मिलाकर 80%. पर P/E क़रीब 28 से घटकर क़रीब 19 पर आ गया. यानी अक्तूबर 2021 में आप हर ₹1 के मुनाफ़े के लिए ₹28 चुका रहे थे. अब क़रीब ₹19 चुकाते हैं.
P/E की इस गिरावट ने मुनाफ़े की 12.5 पॉइंट की बढ़त में से 8 पॉइंट ख़त्म कर दिए. ख़ुद Nifty हर साल सिर्फ़ 4.4% बढ़ा. डिविडेंड ने इसमें 1.2 पॉइंट और जोड़े. इन्हें वापस जोड़ें, तो रिटर्न बनता है हर साल 5.7%.

अक्तूबर 2021 में शुरुआत महंगी थी
ये पांच साल उस दिन के ठीक अगले दिन से शुरू होते हैं, जब Nifty उस वक़्त तक के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुआ था. प्राइस भी ऊंचे थे और P/E भी.
जब आप मुनाफ़े का 28 गुना चुकाते हैं, तो कंपनियों को आपके लिए दो काम करने पड़ते हैं. उन्हें बढ़ना भी होता है और ऐसे प्राइस को भी संभालना होता है, जिसके और ऊपर जाने की गुंजाइश बहुत कम बची हो. जब P/E गिरा, तो मुनाफ़े की ज़्यादातर बढ़त इंडेक्स को सस्ता करने में चली गई, आपकी जेब में नहीं आई.
SIP वाले निवेशकों ने भी यह महसूस किया. इन 5 सालों में हर महीने ₹10,000, यानी कुल ₹6 लाख, आज क़रीब ₹6.8 लाख के हैं. यानी हर साल सिर्फ़ 4.9% का रिटर्न.
सस्ती शुरुआत मदद करती है, पर यह कोई वादा नहीं
मुनाफ़े के 19 गुना पर शुरुआत करने से, आगे के रिटर्न पर पड़ने वाला एक बड़ा बोझ हट जाता है. अगर P/E बस यहीं टिका रहे, तो आपका रिटर्न मोटे तौर पर मुनाफ़े की ग्रोथ और डिविडेंड के बराबर रहेगा.
पर यह सिर्फ़ बताता है कि आप कहां से शुरू कर रहे हैं, यह नहीं कि कहां पहुंचेंगे. मुनाफ़ा धीमी रफ़्तार से भी बढ़ सकता है. और P/E और नीचे भी जा सकता है, जैसा इस साल ज़्यादातर वक़्त हुआ है, जब यह जनवरी के क़रीब 22 से गिरा. यह किस तरफ़ जाएगा, यह कोई नहीं जानता, हम भी नहीं.
पिछले पांच साल यह नहीं दिखाते कि इंडेक्स में कोई ख़राबी है. कंपनियों ने अच्छा काम किया. कमज़ोर रिटर्न की वजह शुरुआती ज़्यादा प्राइस था.
आपकी SIP अब सस्ते में ख़रीद रही है
अक्तूबर 2021 में शुरू हुई SIP के लिए मुनाफ़े को दोहरा काम करना पड़ा. आज के प्राइस पर ऐसा नहीं है. अब हर किश्त उन्हीं कंपनियों को, हर रुपये के मुनाफ़े पर क़रीब 30% कम प्राइस पर ख़रीद रही है.
यह अपनी SIP जारी रखने की वजह है, उसे रोकने की नहीं. बस यह उम्मीद मत कीजिए कि अगले 5 साल भी पिछले 5 जैसे ही होंगे, न अच्छे मायने में, न बुरे मायने में.
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ये लेख पहली बार अक्तूबर 26, 2026 को पब्लिश हुआ.







