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सारांशः अप्रैल 2026 में पैसिव फ़ंड AUM ₹15.19 लाख करोड़ हो गया. 9.65 करोड़ SIP खाते हैं. लेकिन ज़्यादातर निवेशक इंडेक्स फ़ंड चुनते वक़्त सिर्फ़ एक्सपेंस रेशियो देखते हैं. यह एक बड़ी ग़लती है. ट्रैकिंग एरर और ट्रैकिंग डिफ़रेंस भी उतने ही ज़रूरी हैं.
सुबह उठे, मोबाइल खोला, किसी ने WhatsApp पर एक इंडेक्स फ़ंड का स्क्रीनशॉट भेजा. "यार इसका एक्सपेंस रेशियो 0.09% है, ले लो."
और आपने ले लिया.
यही तो ज़्यादातर लोग करते हैं. सबसे सस्ता देखा, SIP लगाई, भूल गए.
लेकिन एक सवाल: क्या आपने कभी देखा कि वो फ़ंड जिस इंडेक्स को ट्रैक करने का वादा करता है, वो असल में उससे कितना पीछे चल रहा है?
अप्रैल 2026 के डेटा के मुताबिक़, पैसिव फ़ंड में ₹15.19 लाख करोड़ लगे हैं. ₹31,115 करोड़ हर महीने SIP से आ रहे हैं. और ज़्यादातर लोगों ने सिर्फ़ एक्सपेंस रेशियो देखकर फ़ंड चुना.
Bandhan Nifty 50 का एक्सपेंस रेशियो 0.11% है. Navi का 0.09%. सस्ते लगते हैं. लेकिन इनका ट्रैकिंग डिफ़रेंस -0.65% और -0.11% है. यानी एक ही इंडेक्स, लेकिन एक फ़ंड हर साल इंडेक्स से 0.54% ज़्यादा पीछे.
20 साल में ₹50 लाख के निवेश पर यह फ़ासला लाखों रुपये का होता है.
आम ग़लती: सिर्फ़ एक्सपेंस रेशियो देखना
एक्सपेंस रेशियो समझना आसान है. साफ़ दिखता है. 0.10% वाला फ़ंड 0.25% वाले से सस्ता लगता है. इसलिए ज़्यादातर निवेशक यही एक नंबर देखकर फ़ंड चुन लेते हैं.
यह ग़लती है. एक्सपेंस रेशियो कम होना ज़रूरी है, लेकिन यह पूरी कहानी नहीं है. इंडेक्स फ़ंड को असल में शेयर ख़रीदने, रखने और बदलने होते हैं. पैसा आने-जाने पर काम करना होता है. कैश, डिविडेंड, कंपनी के कॉर्पोरेट फ़ैसले और इंडेक्स में बदलाव, सब संभालना होता है.
इन सबसे फ़ंड और इंडेक्स के बीच एक फ़ासला बन सकता है. यही ट्रैकिंग एरर और ट्रैकिंग डिफ़रेंस से नापा जाता है.
ट्रैकिंग एरर क्या है?
ट्रैकिंग एरर बताता है कि फ़ंड अपने इंडेक्स को लगातार कितने तरीक़े से फ़ॉलो करता है.
आसान भाषा में: फ़ंड का रिटर्न और इंडेक्स का रिटर्न हर दिन कितना अलग रहा, उसका औसत.
इसे एक उदाहरण से समझिए. मान लीजिए निफ़्टी 50 ने सोमवार को 1% रिटर्न दिया. आपके फ़ंड ने 0.98% दिया. फ़ासला 0.02%. मंगलवार को इंडेक्स -0.5% रहा, फ़ंड -0.48% रहा. फ़ासला 0.02%. यह फ़ासला हर दिन थोड़ा-बहुत होता रहता है. इसी रोज़ाना के फ़ासले का सालाना औसत ट्रैकिंग एरर है.
ट्रैकिंग एरर कम हो तो फ़ंड इंडेक्स के क़रीब चल रहा है. ज़्यादा हो तो फ़ंड इंडेक्स से भटक रहा है.
लेकिन ध्यान रखें: ट्रैकिंग एरर सिर्फ़ यह बताता है कि फ़ंड लगातार कितना चला. यह नहीं बताता कि फ़ंड इंडेक्स से कितना पीछे रहा. इसके लिए ट्रैकिंग डिफ़रेंस देखना होगा.
ट्रैकिंग डिफ़रेंस क्या है?
ट्रैकिंग डिफ़रेंस बताता है कि एक तय समय में फ़ंड का असल रिटर्न और इंडेक्स का रिटर्न कितना अलग रहा.
यह आमतौर पर माइनस में होता है क्योंकि फ़ंड में ख़र्च होते हैं और इंडेक्स में नहीं.
जैसे: इंडेक्स ने 12% दिया और फ़ंड ने 11.6% दिया तो ट्रैकिंग डिफ़रेंस -0.4% है. यही वो असल फ़ासला है जो निवेशक महसूस करता है.
अब यह फ़ासला छोटा लग सकता है. लेकिन इसे लंबे समय में देखिए:
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निवेश
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20 साल बाद (12% इंडेक्स रिटर्न पर) |
|---|---|
| इंडेक्स (12% रिटर्न) | ₹96.46 लाख |
| फ़ंड A (-0.11% ट्रैकिंग डिफ़रेंस, 11.89%) | ₹94.28 लाख |
| फ़ंड B (-0.65% ट्रैकिंग डिफ़रेंस, 11.35%) | ₹86.87 लाख |
मासिक SIP ₹10,000, अनुमानित कैलकुलेशन
फ़ंड A और फ़ंड B दोनों निफ़्टी 50 ट्रैक करते हैं. दोनों का ट्रैकिंग एरर 0.02% है. लेकिन 20 साल में फ़र्क़ ₹7.41 लाख का है. यही ट्रैकिंग डिफ़रेंस का असली मतलब है.
तीनों नंबरों का फ़र्क़:
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नंबर
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क्या बताता है | क्यों ज़रूरी है |
|---|---|---|
| एक्सपेंस रेशियो | फ़ंड की सालाना लागत | दिखने वाला ख़र्च |
| ट्रैकिंग एरर | फ़ंड इंडेक्स से कितना भटकता है | काम की सफ़ाई |
| ट्रैकिंग डिफ़रेंस | असल रिटर्न का फ़ासला | निवेशक का असल अनुभव |
सबसे अच्छा इंडेक्स फ़ंड वो नहीं जो सबसे सस्ता हो. वो है जिसमें कम एक्सपेंस रेशियो, कम ट्रैकिंग एरर और कम माइनस ट्रैकिंग डिफ़रेंस तीनों हों.
SEBI ने इसे ज़रूरी बनाया है
SEBI ने 23 मई 2022 को पैसिव फ़ंड से जुड़ा एक नियम जारी किया. इसके तहत:
इक्विटी ETF और इंडेक्स फ़ंड का ट्रैकिंग एरर पिछले एक साल के आधार पर 2% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए. ट्रैकिंग एरर हर दिन AMC और AMFI की वेबसाइट पर दिखाना होगा. ट्रैकिंग डिफ़रेंस हर महीने 1 साल, 3 साल, 5 साल, 10 साल और शुरुआत से बताना होगा.
AMFI की वेबसाइट पर अलग से यह डेटा मिलता है.
यह नियम एक साफ़ संकेत है: पैसिव फ़ंड को सिर्फ़ लागत से नहीं, ट्रैकिंग की क्वालिटी से भी परखना होगा.
पैसिव फ़ंड अब बहुत बड़े हो गए हैं
तीन साल पहले पैसिव फ़ंड का AUM ₹7.18 लाख करोड़ था. अप्रैल 2026 में ₹15.19 लाख करोड़. यानी तीन साल में 111.4% की बढ़त.
अप्रैल 2026 पैसिव फ़ंड का हाल:
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कैटेगरी
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AUM | 1 साल की बढ़त | 3 साल की बढ़त |
|---|---|---|---|
| अन्य ETF | ₹9,64,929 करोड़ | 18.70% | 92.20% |
| इंडेक्स फ़ंड | ₹3,31,057 करोड़ | 13.30% | 93.50% |
| गोल्ड ETF | ₹1,78,110 करोड़ | 190.00% | 676.10% |
| विदेशी फ़ंड ऑफ़ फ़ंड | ₹45,445 करोड़ | 83.00% | 100.70% |
| कुल पैसिव | ₹15,19,542 करोड़ | 27.50% | 111.40% |
सोर्स: AMFI मासिक नोट, अप्रैल 2026
अप्रैल 2026 में पैसिव फ़ंड में ₹20,082 करोड़ का नेट निवेश आया. यह अब बाज़ार का एक छोटा कोना नहीं है. और जब कोई कैटेगरी इतनी बड़ी हो जाती है तो छोटी-छोटी कमज़ोरियां बहुत बड़े निवेशक समूह को नुकसान पहुंचाती हैं.
SIP निवेशकों के लिए यह और भी ज़रूरी है
अप्रैल 2026 में 9.65 करोड़ एक्टिव SIP खाते थे. SIP की कुल संपत्ति ₹16.85 लाख करोड़ यानी म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री AUM का 20.6%.
एक महीने में रिटर्न का छोटा फ़ासला नुकसानदेह नहीं लगता. लेकिन 10, 15 या 20 साल में यही फ़ासला बार-बार जुड़ता रहे तो आख़िरी कॉर्पस पर बड़ा असर पड़ता है.
पैसिव SIP "बिना सोचे निवेश" नहीं है. यह "कम सोचकर निवेश" है. फ़ंड मैनेजर की शेयर चुनने की काबिलियत नहीं देखनी, लेकिन एक ऐसा फ़ंड ज़रूर चुनना है जो इंडेक्स को सही तरीक़े से ट्रैक करे.
डेटा क्या कहता है?
मई 2026 में जारी पैसिव फ़ंड रिपोर्ट में 461 पैसिव फ़ंड को ट्रैक किया गया. इनमें 305 इंडेक्स फ़ंड और 256 ETF थे. निफ़्टी 50 इंडेक्स फ़ंड की तुलना इस टेबल में देखिए
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फ़ंड
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AUM | डायरेक्ट TER | ट्रैकिंग एरर | ट्रैकिंग डिफ़रेंस |
|---|---|---|---|---|
| UTI Nifty 50 | ₹27,848 करोड़ | 0.23% | 0.02% | -0.19% |
| HDFC Nifty 50 | ₹23,339 करोड़ | 0.29% | 0.02% | -0.23% |
| SBI Nifty 50 | ₹13,367 करोड़ | 0.21% | 0.02% | -0.27% |
| Navi Nifty 50 | ₹3,919 करोड़ | 0.09% | 0.02% | -0.11% |
| Nippon Nifty 50 | ₹3,663 करोड़ | 0.10% | 0.03% | -0.11% |
| Bandhan Nifty 50 | ₹2,652 करोड़ | 0.11% | 0.02% | -0.65% |
सोर्स: पैसिव रेडी रेकनर इंडेक्स फ़ंड, मई 2026
यह टेबल एक ज़रूरी बात साफ़ करती है. कई फ़ंड का ट्रैकिंग एरर लगभग एक जैसा है. लेकिन ट्रैकिंग डिफ़रेंस एक जैसा नहीं है. कम ट्रैकिंग एरर होने के बावजूद रिटर्न का फ़ासला ज़्यादा हो सकता है.
एक जैसा ट्रैकिंग एरर, बहुत अलग नतीजे
निफ़्टी लार्ज एंड मिडकैप 250 कैटेगरी में यह और साफ़ दिखता है.
ICICI Prudential, HDFC और Edelweiss के फ़ंड का डायरेक्ट ट्रैकिंग एरर क़रीब 0.04% था. लेकिन ट्रैकिंग डिफ़रेंस क्रमशः -0.31%, -0.33% और -1.04% था.
यानी एक जैसा ट्रैकिंग एरर होने के बावजूद निवेशक का असल अनुभव बहुत अलग रहा. इसीलिए सिर्फ़ ट्रैकिंग एरर देखकर फ़ंड चुनना काफ़ी नहीं है.
बड़े इंडेक्स से बाहर जाने पर ट्रैकिंग मुश्किल होती है
निफ़्टी 50 जैसे बड़े और आसानी से ख़रीदे-बेचे जाने वाले इंडेक्स को ट्रैक करना आसान है. मिडकैप, स्मॉलकैप, सेक्टोरल या फ़ैक्टर इंडेक्स को ट्रैक करना ज़्यादा मुश्किल है.
वजह: शेयर कम आसानी से बिकते हैं, इंडेक्स में बदलाव ज़्यादा होते हैं, ट्रेडिंग लागत ज़्यादा है.
निफ़्टी मिडकैप 150 में Motilal Oswal का ट्रैकिंग एरर 0.06% और ट्रैकिंग डिफ़रेंस -0.20% था. HDFC का ट्रैकिंग एरर भी 0.06% लेकिन ट्रैकिंग डिफ़रेंस -0.49%.
निफ़्टी स्मॉलकैप 250 में Motilal Oswal का ट्रैकिंग एरर 0.05%, ट्रैकिंग डिफ़रेंस -0.40%. SBI का ट्रैकिंग एरर 0.06%, ट्रैकिंग डिफ़रेंस -0.57%. Edelweiss का ट्रैकिंग एरर 0.10%, ट्रैकिंग डिफ़रेंस -0.92%.
इसका मतलब मिडकैप या स्मॉलकैप इंडेक्स फ़ंड से दूर रहना नहीं है. बस इन कैटेगरी में ट्रैकिंग क्वालिटी और सख़्ती से देखें.
ट्रैकिंग एरर क्यों होती है?
इंडेक्स का कोई ख़र्च नहीं, कोई कैश नहीं, कोई काम करने की दिक्कत नहीं. फ़ंड में यह सब होता है.
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वजह
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असर |
|---|---|
| एक्सपेंस रेशियो | इंडेक्स का कोई ख़र्च नहीं, फ़ंड का है |
| कैश रखना | निवेश आने-जाने के लिए कैश रखना पड़ता है |
| देरी से बदलाव | इंडेक्स बदल गया, फ़ंड को शेयर ख़रीदने-बेचने में वक़्त लगता है |
| शेयर की कम बिक्री | स्मॉलकैप और सेक्टोरल इंडेक्स में ट्रेडिंग मुश्किल |
| कंपनी के फ़ैसले | डिविडेंड, बोनस, राइट्स इश्यू में टाइमिंग का फ़र्क़ |
| फ़ंड का छोटा आकार | बहुत छोटे फ़ंड में इंडेक्स को कॉपी करना कम असरदार |
SEBI के नियम के मुताबिक़ इंडेक्स में बदलाव होने पर फ़ंड को 7 कैलेंडर दिनों में बदलाव करना होगा.
इंडेक्स फ़ंड चुनने का सही तरीक़ा
ज़्यादातर लोग पहले फ़ंड चुनते हैं. यह ग़लत क्रम है.
सही क्रम यह है: पहले इंडेक्स चुनें, फिर उस इंडेक्स को ट्रैक करने वाले फ़ंड की आपस में तुलना करें, फिर सबसे अच्छा फ़ंड चुनें.
पहला क़दम: इंडेक्स चुनें
निफ़्टी 50 में 50 बड़ी कंपनियां हैं. मिडकैप 150 में मीडियम साइज़ की कंपनियां. स्मॉलकैप 250 में छोटी कंपनियां. पहले तय करें कि आप किस तरह की कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं. यह आपके लक्ष्य और जोख़िम पर निर्भर करता है.
दूसरा क़दम: एक ही इंडेक्स के फ़ंड की तुलना करें
निफ़्टी 50 के फ़ंड की तुलना निफ़्टी 50 के फ़ंड से ही करें. स्मॉलकैप फ़ंड से नहीं. यही सही तुलना है.
तीसरा क़दम: इन पांच चीज़ों पर ग़ौर करें
1. एक्सपेंस रेशियो: कम हो तो बेहतर. लेकिन यही एकमात्र नंबर नहीं है.
2. ट्रैकिंग एरर: 0.02% से 0.10% के बीच हो तो अच्छा है. इससे ज़्यादा हो तो सोचें.
3. ट्रैकिंग डिफ़रेंस: यह सबसे ज़रूरी नंबर है. इसे ऐसे समझें: इंडेक्स ने 12% दिया, आपके फ़ंड ने 11.5% दिया. तो फ़ंड इंडेक्स से 0.5% पीछे रहा. यही ट्रैकिंग डिफ़रेंस है यानी -0.5%.
अब -0.11% और -0.65% में कौन बेहतर है? -0.11% वाला. क्योंकि वो इंडेक्स से कम पीछे है. जितना कम पीछे, उतना अच्छा फ़ंड.
20 साल में ₹10,000 मासिक SIP पर -0.11% और -0.65% का फ़ासला ₹7 लाख से ज़्यादा का बन जाता है.
4. AUM: ₹500 करोड़ से ज़्यादा होना चाहिए. बहुत छोटे फ़ंड में शेयर ख़रीदने-बेचने में दिक्कत होती है.
5. ट्रैक रिकॉर्ड: कम से कम 3 साल का इतिहास देखें. नए फ़ंड में जल्दी मत कूदें.
यह पांचों मिलकर असली तस्वीर देते हैं. सिर्फ़ एक नंबर देखना वैसा ही है जैसे गाड़ी ख़रीदते वक़्त सिर्फ़ रंग देखना.
अहम सबक़
पैसिव निवेश का वादा सीधा है: इंडेक्स का रिटर्न कम लागत पर दो. लेकिन यह वादा तभी पूरा होता है जब फ़ंड इंडेक्स को सही तरीक़े से ट्रैक करे. एक्सपेंस रेशियो सबसे ज़्यादा दिखने वाला नंबर है. लेकिन यह अकेला काफ़ी नहीं है. ट्रैकिंग एरर बताता है कि फ़ंड रास्ते में कितना साफ़ चला. ट्रैकिंग डिफ़रेंस बताता है कि निवेशक को आख़िर में क्या मिला.
2026 में सही इंडेक्स फ़ंड चुनने का सवाल यह नहीं है: "एक्सपेंस रेशियो क्या है?"
सवाल यह है: "यह फ़ंड अपने इंडेक्स को कितनी सफ़ाई से ट्रैक करता है?"
वैल्यू रिसर्च की राय
सही इंडेक्स फ़ंड चुनना उतना आसान नहीं है, जितना लगता है. वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र ट्रैकिंग एरर, ट्रैकिंग डिफ़रेंस, एक्सपेंस रेशियो और AUM सब देखकर सही पैसिव फ़ंड चुनने में मदद करता है.
आज ही फ़ंड एडवाइज़र एक्सप्लोर करें
यह भी पढ़ें: Nifty 50, Nifty 100 या Nifty 500: आपके लिए कौन सा सही है?
ये लेख पहली बार जून 03, 2026 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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