लर्निंग

म्‍युचुअल फंड में निवेश से बचाएं टैक्‍स

इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग स्‍कीम यानी ईएलएसएस टैक्‍स बचाने का बेहतर विकल्‍प है

म्‍युचुअल फंड में निवेश से बचाएं टैक्‍स

अगर आप म्‍युचुअल फंड में निवेश करके टैक्‍स बचाना चाहते हैं तो इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग स्‍कीम यानी ईएलएसएस बेहतर विकल्‍प है। टैक्‍स बचाने के लिए निवेश करने के दूसरे विकल्‍पों की तुलना में ईएलएसस में निवेश आपको ज्‍यादा फायदे देता है। इसके दो कारण हैं। आप जानते हैं कि 80 सी के तह‍त एक साल में 1.5 लाख रुपए तक के निवेश पर टैक्‍स छूट क्‍लेम कर सकते हैं। इस लिमिट के तहत आप जिन विकल्‍पों में निवेश कर सकते हैं उनमें ईएलएसस भी शामिल है। लेकिन इन विकल्‍पों में ईएलएसस फंड एक ऐसा विकल्‍प है, जो आपको इक्विटी रिटर्न का फायदा देता है।

इक्विटी रिटर्न देने वाले विकल्‍प

इक्विटी रिटर्न देने वाले दो और विकल्‍प हैं। यूनिट लिंक्‍ड प्‍लान यानी यूलिप्‍स और नेशनल पेंशन सिस्‍टम यानी एनपीएस। हालांकि यूलिप्‍स में कम से कम 10 साल का लॉकइन पीरियड होता है। इसके अलावा इसमें निवेश की लागत काफी अधिक होती है और यह कम पारदर्शी है। वहीं एनपीएस रिटायरमेंट फंड बनाने के काम आता है। एनपीएस में निवेश करने पर आपके निवेश का छोटा हिस्‍सा इक्विटी में जाता है और दूसरा इसमें लॉक इन पीरियड रिटायरमेंट तक है। वहीं ईएलएसएस में लॉकइन पीरियड 3 साल का होता है। ऐसे में इस की तुलना एनपीएस से नहीं की जा सकती है। ईएलएसएस फंड में निवेश यूलिप्‍स की तुलना में कई तरह से ज्‍यादा फायदेमंद है। ईएलएसस फंड में निवेश की लागत यूलिप्‍स की तुलना में काफी कम है। ईएलएसस फंड में निवेश करने पर आपका 100 फीसदी पैसा इक्विटी में जाता है। इसके अलावा ईएलएसस में लॉकइन पीरियड सिर्फ 3 साल का है जो काफी हद तक व्‍यावहारिक है।

म्‍युचुअल फंड में निवेश का अनुभव देता है ईएलएसएस

इसके अलावा ईएलएसस फंड में निवेश से एक और फायदा मिलता है,जो काफी हद तक छिपा हुआ होता है। निवेश की शुरूआत करने वाले तमाम निवेशकों के लिए ईएलएसएस एक शानदार उत्‍पाद है जो इक्विटी और म्‍युचुअल फंड में निवेश का पहला अनुभव मुहैया कराता है।

वे इस फंड में इसलिए निवेश करते हैं क्‍योंकि टैक्‍स बचाने का विकल्‍प आकर्षक लगता है और इसमें लॉकइन पीरियड भी काफी कम यानी 3 साल का है। उनका पहला अनुभव अपनी टैक्‍स बचाने की जरूरतों से भी पैसा इक्विटी म्‍युचुअल फंड में निवेश करने को प्रेरित करता है। एक बार जब आपको लंबी अवधि में इक्विटी रिटर्न का स्‍वाद लग जाता है तो आप दूसरे तरह के इक्विटी में निवेश में भी प्रयास करते हैं।

ईएलएसएस में निवेश के लिए पहले से करें प्‍लानिंग

निवेश के लिए ईएलएसएस फंड चुने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप पहले से प्‍लान करें। साल के आखिरी महीनों में टैक्‍स बचाने के लिए निवेश करना सही तरीका नहीं है। जो लोग आखिरी समय में ऐसा करते हैं वे अक्‍सर गलत फैसले लेते हैं और ऐसी जगह निवेश करते हैं जिससे खास फायदा नहीं होता है।

बहुत से लोग यह जानते हैं कि उनको टैक्‍स बचाने के लिए निवेश करना होगा। फिर भी लोग इसके लिए साल के अंत तक इंतजार करते हैं। इनमें से ज्‍यादातर ऐसे लोग होते हैं जो इसके अलावा कहीं और निवेश नहीं करते हैं। उनको निवेश का कोई अनुभव नहीं होता है और वे टैक्‍स बचाने के लिए साल में एक बार निवेश करते हैं। ऐसे लोग आम तौर पर ऐसे उत्‍पाद में निवेश कर देते हैं, जो एजेंट उनको बेच देता है। ऐसे लोगों की सोच होती है कि जब तक उनका टैक्‍स बच रहा है उनका काम हो रहा है। लंबी अवधि में यह तरीका महंगा पड़ता है।

एक अच्‍छा टैक्‍स बचाने वाला निवेश निवेश पहले होना चाहिए और टैक्‍स बचाने वाला बाद में होना चाहिए। ज्‍यादातर लोगों को टैक्‍स बचाने के लिए ईएलएसएस फंड में निवेश करना चाहिए। इसका कारण यह है कि आम तौर पर सैलरी क्‍लास के लोगों का पैसा प्रॉविडेंट फंड के जरिए फिक्‍स्ड इनकम में जाता है। ऐसे में उनको अपनी सेविंग का एक हिस्‍सा इक्विटी में निवेश करना चाहिए।

रिटायर्ड लोग भी ईएलएसएस में कर सकते हैं निवेश

ज्‍यादतार लोगों में दिमाग में एक गलत‍ धारणा है कि अधिक उम्र के निवेशकों या रिटायर हो चुके लोगों के लिए इक्विटी में निवेश ज्‍यादा जोखिम वाला है। ऐसे में उनको ईएलएसएस में निवेश से बचना चाहिए। लेकिन यह सच नहीं है। किसी भी व्‍यक्ति की इनकम अगर टैक्‍स के दायरे में आती है तो उसे टैक्‍स बचाने के लिए ईएलएसस में निवेश करना चाहिए।

अगर किसी के पास सेविंग के तौर ज्‍यादा रकम है तो उसके लिए भी रिटायरमेंट प्‍लानिंग में सबसे बडी दिक्‍कत महंगाई के असर से निपटना है। वास्‍तविकता यह है कि रुपये की खरीद क्षमता तेजी से घट राही है और इसकी वजह से हमारी सेविंग की वास्‍तविक कीमत तेजी से कम होती जा रही है। रिटायरमेंट के बाद औसतन 25 साल की अवधि में लोगों को इनकम की जरूरत होती है। इस अवधि में कीमतें 8 गुना तक बढ़ सकती हैं। इसके अलावा रिटायर हो चुके लोगों को हेल्‍थकेयर पर पैसा खर्च करना पड सकता है। हेल्‍थकेयर की लागत बढ़ने की दर महंगाई दर से काफी अधिक है।

अगर आप कम अव‍धि के लिए निवेश कर रहे हैं तो इक्विटी में निवेश में जोखिम अधिक है। वहीं अगर आप इक्विटी में 3 से 5 साल या इससे अधिक अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं तो इक्विटी में निवेश में जोखिम काफी कम है। अगर आप महंगाई का ध्‍यान रखें तो रिटायर हो चुके लोगों के लिए बैंक एफडी या दूसरे फिक्‍स्ड इनकम वाले डिपॉजिट में निवेश कोई फायदा नहीं देता है।

एसआईपी के जरिए करें ईएलएसएस में निवेश

सभी इक्विटी इन्‍वेस्‍टमेंट की तरह ईएलएसएस फंड में निवेश करने का सबसे बेहतर तरीका मासिक एसआईपी है। इसके जरिए आप पूरे साल नियमित तौर पर थोड़ी थोड़ी रकम निवेश कर सकते हैं। इससे आपको टैक्‍स बचाने के लिए साल के आखिरी महीनों में निवेश करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

हर वित्‍त वर्ष की शुरुआत में आपको यह अनुमान लगा लेना चाहिए कि आपको टैक्‍स बचाने के लिए कितनी रकम बचानी होगी। इसके बाद आप इसको 12 हिस्‍सों में बांट कर एसआईपी में निवेश शुरू कर देना चाहिए। आपको ध्‍यान रखना चाहिए कि आप 80 सी के तहत सालाना 1.5 लाख रुपए के निवेश पर ही टैक्‍स छूट हासिल कर सकते हैं। इस सीमा में आपका पीएफ का पैसा भी आता है। ऐसे में आपको पीएफ कंट्रीब्‍यूटन को 1.5 लाख रुपए से घटा कर ईएलएसस में निवेश की राशि तय करनी चाहिए। अगर आप ईएलएसएस में इस सीमा से अधिक निवेश करेंगे तो अतिरिक्‍त राशि पर टैक्‍स छूट का फायदा आपको नहीं मिलेगा।

ये लेख पहली बार अप्रैल 22, 2019 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

"3 साल की SIP के बाद भी 0 रिटर्न". क्या SIP बंद कर दें?

पढ़ने का समय 5 मिनटहर्षिता सिंह

10 साल में ₹1 करोड़ चाहिए? ये रहा आपका पूरा रोडमैप!

पढ़ने का समय 4 मिनटख्याति सिमरन नंदराजोग

कुछ IT कंपनियां आगे निकलेंगी, बाक़ी वेल्थ डुबोएंगी

पढ़ने का समय 8 मिनटआशीष मेनन

निफ़्टी का P/E 20 से नीचे लुढ़का, इसका क्या मतलब है?

पढ़ने का समय 6 मिनटहर्षिता सिंह

स्मॉल-कैप फ़ंड्स फिर से खुल गए हैं. इसे ख़रीद का संकेत न समझें!

पढ़ने का समय 5 मिनटअभिषेक राणा

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

मार्च में जितने दिन नहीं, उससे ज़्यादा क्राइसिस आ गईं

मार्च में जितने दिन नहीं, उससे ज़्यादा क्राइसिस आ गईं

पूरी रक़म एक साथ निवेश करने की जल्दबाज़ी करने के बजाय एक बेहतर तरीक़ा अपनाइए

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी