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क्‍या आपको सच में ज्‍यादा जानने की जरूरत है ?

क्‍या ज्‍यादा जानकारी होने से निवेश से जुड़े फैसले बेहतर होते हैं ? इसका जवाब आपकी उम्‍मीद से कहीं ज्‍यादा दिलचस्‍प है

क्‍या ज्‍यादा जानकारी होने से निवेश से जुड़े फैसले बेहतर होते हैं ? इसका जवाब आपकी उम्‍मीद से कहीं ज्‍यादा दिलचस्‍प है

कुछ साल पहले एक स्‍टडी में पता चला कि वित्‍तीय साक्षरता में अधिक अंक हासिल करने वालों ने निवेशक के तौर पर कम अंक हासिल करने वालों की तुलना में खराब प्रदर्शन किया। इसके अलावा अमेरिका के इन्‍वेस्‍टमेंट एडवाइजर / ब्रोकर की स्‍टडी में पाया गया कि उनके पास सबसे अच्‍छा प्रदर्शन करने वाले अकाउंट उन लोगों के थे जिनकी मौत हो गई थी। एक और स्‍टडी से पता चलता है कि अधिक आंकड़े होने से भविष्‍य के बारे में अनुमान लगाने की क्षमता बेहतर नहीं होती है। यही नहीं लगभग हर इन्‍वेस्‍टमेंट एडवाइजर यह बात जानता है कि न्‍यूज और छोटी बड़ी घटनाओं पर बारीक नजर रखने निवेशक अक्‍सर निवेश से जुड़े फैसले जल्‍दबाजी में करते हैं और बाद में इसकी कीमत चुकाते हैं।

इन सभी विषयों पर मैं अलग -अलग समय पर लिख चुका हूं। हालांकि इन सब बातों से एक सोच उभर कर आती है जिसे पकड़ना ज्‍यादा मुश्किल नहीं है। लोगों की नजर में जो बातें किसी को एक स्‍मार्ट निवेशक बनाती हैं वे पूरी तरह से गलत भी हो सकती हैं। वास्‍तव में हो सकता है कि इन बातों का सच से दूर- दूर तक कोई लेना- देना न हो। हम इस बात को मानते हैं कि निवेशक को वित्‍तीय रूप से साक्षर होना चाहिए यानी उसे वित्‍तीय मामलों की कम से कम बेसिक जानकारी तो होनी ही चाहिए। हम मानते हैं कि पूरे परिदृश्‍य को अच्‍छी तरह से समझने के लिए निवेशकों को यह जानना चाहिए कि उनके आसपास क्‍या हो रहा है। हमें यह भी लगता है कि उनको इस जानकारी के आधार पर निवेश से जुड़े कदम उठाने चाहिए। पारंपरिक सोच और विश्‍वास के उलट यह भी हो सकता है कि इन सब बातों का निवेश में सफलता से कोई संबंध न हो और अगर कोई संबंध हो तो यह नुकसान पहुंचाने वाला हो।

अब सवाल यह पैदा होता है कि वित्‍तीय साक्षरता और निवेश से जुड़ी जानकारी का मतलब क्‍या है ? इन फूल्‍ड बाई रैंडमनेस किताब में नासिम निकालेस तालेब ने आस्ट्रिया के दार्शनकि लुडविग विटगेनस्‍टाइन के हवाले से लिखा है कि जब आप पटरी का इस्‍तेमाल मेज को नापने के लिए करते हैं तो आप मेज का इस्‍तेमाल भी पटरी को नापने में कर रहे होते हैं। अगर इस नजरिए से उस स्‍टडी को देखें जिसमें कहा गया है कि वित्‍तीय साक्षरता में अधिक अंक लाने वालों ने निवेशक के तौर पर खराब प्रदर्शन किया तो इसका मतलब है कि वित्‍तीय साक्षरता का पारंपरिक विचार गलत है। ऐसा नहीं है कि मेज गलत तरीके से बनी है बल्कि इसे नापने के लिए जिस पटरी का इस्‍तेमाल किया गया वही सही नहीं है।

कुछ ऐसी ही सोच रखने वाले मानते हैं कि बेहतर जानकारी रखने वाले और इस जानकारी पर अमल करने वाले आपके निवेश के रिटर्न को बढ़ा सकते हैं। मरे हुए निवेशकों का उदाहरण इस विचार को गलत साबित करता है। मरे हुए लोग ज्‍यादा जानकारी न तो हासिल करते हैं और न ही इस जानकारी के आधार पर तेजी से निवेश से जुड़े फैसले करते हैं। और इसके बावजूद वे ज्‍यादा पैसा बनाते हैं। बहुत संभावना इस बात की है कि उन्‍होंने इसलिए ज्‍यादा पैसा बनाया क्‍योंकि वे कुछ नहीं कर रहे थे। तो इन सब बातों का मतलब क्‍या है ? मेरे लिए सबसे दिलचस्‍प बात यह है कि वित्‍तीय साक्षरता का निवेश के प्रदर्शन से कोई लेना देना नहीं है। यही नहीं वित्‍तीय साक्षरता से निवेशकों को एक हद तक नुकसान ही होता है। यह संभव है कि वित्‍तीय तौर पर साक्षर निवेशकों को रिटर्न के लिहाज से नुकसान उठाना पड़े।

एक तीसरी स्‍टडी इफेक्‍ट्स ऑफ अमाउंट ऑफ इन्‍फॉर्मेशन ऑन जजमेंट अक्‍यूरेशी एंड कांफीडेंस में कुछ दिलचस्‍प बातें बताई गईं हैं। स्‍टडी से पता चलता है कि जब लोगों के पास अधिक जानकारी होती है तो अपने फैसले में उनका भरोसा बढ़ता है लेकिन इससे इस बात की संभावना नहीं बढ़ती है कि उनका फैसला ज्‍यादा सटीक होगा। यह एक रोचक बात है और अगर आप इस पर विचार करें तो आप पाएंगे कि खुद पर जरूरत से ज्‍यादा भरोसा होना इसे ही कहते हैं। मान लेते हैं कि आपने पांच जानकारी या इनपुट के आधार पर कोई निष्‍कर्ष निकाला। हो सकता है कि आपका निष्‍कर्ष सही हो, हो सकता है कि यह गलत हो।

हालांकि अगर आपको पांच और जानकारी मिल जाती है तो किसी भी हालात में बेहतर फैसला लेने की संभावना बहुत कम बढ़ती है लेकिन अपने फैसले में आपका भरोसा बहुत बढ़ जाता है। दूसरे शब्‍दों में कहें तो आप अति आत्‍मविश्‍वास के शिकार हो जाते हैं।

तो इस सीख के आधार पर हम निवेश करने वाले इंडीविजुअल्‍स को देखनें का प्रयास करें। कुछ इंडीविजुअल्‍स अच्‍छे फैसले लेते हैं और कुछ खराब। जिन निवेशकों के पास अधिक जानकारी होती है वे आम तौर पर निवेश से जुड़े ज्‍यादा कदम उठाते हैं। और वे ऐसा करने में इस बात पर खास ध्‍यान नहीं देते हैं कि उनका फैसला सही है या नहीं।

अगर हम इस हिसाब से देश के सभी निवेशकों को देखें तो पाएंगे कि जब लोग ज्‍यादा से ज्‍यादा जानकारी पाते हैं तो उसी अनुपात में निवेश से जुड़े गलत फैसले करते हैं। क्‍या ऐसा हो रहा है? हां मुझे लगता है कि ऐसा हो रहा है।

मैं यहां इस समस्‍या का कोई समाधान नहीं पेश कर रहा हूं। हालांकि एक इंडीविजुअल के लिए जरूरी है कि उसके पास निवेश से जुड़ी उचित जानकारी हो। लेकिन बहुत ज्‍यादा जानकारी होना भी उसी तरह से नुकसानदेह साबित हो सकता है जैसे कम जानकारी होना।

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