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म्‍युचुअल फंड में निवेश का सुनहरा दौर

अब हम म्‍युचुअल फंड निवेश की नई दुनिया में जा रहे हैं। यहां ज्‍यादा से ज्‍यादा निवेशक निवेश से बेहतर रिटर्न और सुकून का अनुभव का रहे हैं

अब हम म्‍युचुअल फंड निवेश की नई दुनिया में जा रहे हैं। यहां ज्‍यादा से ज्‍यादा निवेशक निवेश से बेहतर रिटर्न और सुकून का अनुभव का रहे हैं

पिछले साल इसी समय जब मैं अपना कॉलम लिख रहा था तो मेरे दिमाग में भारत में एसआईपी निवेश की शानदार ग्रोथ बसी हुई थी। उस समय मैंने लिखा था कि अगर यह रूझान जारी रहा तो अगले 15 साल में न सिर्फ इक्विटी असेट बढ़ कर 320 लाख करोड़ रुपए हो जाएगी बल्कि यह भारत में कुल म्‍युचुअल फंड निवेश का लगभग 75 फीसदी होगा।
अब मुझे लगता है कि मेरा यह आकलन गलत था। पिछले कुछ माह की घटनाओं से पता चलता है कि एसआईपी का चलन इससे ज्‍यादा तेजी से बढ़ रहा है। इसका कारण यह है कि एसआईपी भारतीय निवेशकों के मनोविज्ञान को बदल रही है। और पहले से मैं इस बात की उम्‍मीद भी कर रहा था। निवेशकों पर एसआईपी का यह सबसे अहम प्रभाव है। इससे पहले इक्विटी मार्केट एक ही स्‍तर के आसपास घूम रहा था फिर इसमें तेजी का दोर आया। ऐसे में एसआईपी निवेशक और गैर एसआईपी निवेशक के व्‍यवहार में साफ अंतर देखा जा सकता है। यह बात सिर्फ कुछ लोगों के आकलन के आधार पर नहीं कही जा रही है बल्कि यह बात म्‍युचुअल फंड इंडस्‍ट्री के आंकड़ों में साफ दिखती है। एसोसिएशन ऑफ म्‍युचुअल फंड्स इन इंडिया (एमएफआई) हर माह म्‍युचुअल फंड से जुड़े आंकड़े जारी करता है।
सितंबर 2009 में इक्विटी और इक्विटी फंडों में निवेश का कुल प्रवाह 28 फीसदी कम हो गया। यानी यह 9,152 करोड़ रुपए से गिर कर 6,609 करोड़ रुपए रह गया। इसे एक बुरी खबर की तरह देखा गया लेकिन एसआईपी निवेश 8,231 करोड़ रुपए से बढ़ कर 8,263 करोड़ रुपए रह गया। अब सवाल यह है कि इसका मतलब क्‍या है। इसका मतलब है कि गैर एसआईपी निवेशकों ने उसी तरह से व्‍यवहार किया, जिस तरह से वे पहले करते थे। उन्‍होंने बाजार में सही मौका देख कर पैसा निकाल लिया और मुनाफा कमाने का प्रयास किया। हालांकि एसआईपी निवेशक इसके अपवाद रहे और उन्‍होंने अच्‍छे या बुरे समय में निवेश जारी रखा।
यह म्‍युचुअल फंड निवेश की नई दुनिया है जिसमें हम प्रवेश कर रहे हैं। मेरा हमेशा से मानना था कि समय के साथ भारतीय निवेशकों का रवैया बदलेगा और वे इसी दिशा में जाएंगे। मैंने पहले कभी ऐसा उत्‍साह महसूस नहीं किया था। क्‍योंकि इस बार यह वास्‍तव में होता हुआ दिख रहा है। और सबसे अहम बात यह है कि निवेशकों के रवैये में यह बदलाव अपने आप हो रहा है और वे खुद इस बदलाव को मजबूत कर रहे हैं। जैसे- जैसे अधिक से अधिक निवेशकों को एसआईपी का अनुभव हो रहा है वे बेहतर रिटर्न और सुकुन हासिल कर रहे हैं।
भारतीय निवेशकों के रवैये में बड़े पैमाने पर बदलाव आने का बड़ा कारण यह भी है कि साथ ही साथ म्‍युचुअल फंडों की दुनिया भी लगातार बेहतरी की ओर बढ़ती रही है। यह बदलाव अचानक नहीं हुए हैं बल्कि इसमें एक दशक से भी अधिक का समय लगा है। हालांकि, एक के बाद एक सभी बड़ी दिक्‍कतों को दूर किया गया है। यह सभी बदलाव कदम दर कदम हुए हैं ऐसे में इस बात का अनुभव करना थोड़ा कठिन है कि इससे क्‍या फर्क पड़ा है। हालांकि अगर आप इन सभी बदलाव को एक साथ देखें तो आपको पता चलेगा कि इससे भारतीय बचतकर्ताओं को एक नया विकल्‍प मिला है। सही मायन में अगर आप 17 साल पहले से तुलना करें तो आज के म्‍युचुअल फंड अब पूरी तरह से नए प्रोडक्‍ट हैं। अहम बात यह है कि यह सभी बदलाव बेहतरी के लिए हुए हैं। और इसने म्‍युचुअल फंड को एक बेहतरीन जरिया बना दिया है जिससे भारतीय बचतकर्ता रकम बना सकें।
आखिरकार हम म्‍युचुअल फंड में निवेश इसलिए करते हैं जिससे हम आर्थिक विकास में अपना हिस्‍सा हासिल कर सकें। एफडी में निवेश करने वालों को वह फायदा नहीं मिलता है जो म्‍युचुअल फंड देता है। आजकल भारतीए अर्थव्‍यवस्‍था की धीमी ग्रोथ को लेकर कई बातें कही और गढ़ी जा रही हैं। आप को इन बातों पर ध्‍यान नहीं देना चाहिए। बिल गेट्स ने एक बार कहा था कि हम हमेशा इस बात को बढ़ा चढ़ा कर आंकते हैं कि एक साल में क्‍या कर सकते हैं और इस बात को कम करके आंकते हैं कि 10 साल में क्‍या कर सकते हैं। यह बात बचत और निवेश के लिए ज्‍यादा सही है। महीनों और साल को खुद पर हावी मत होने दीजिए यह दशक है जो आपके लिए मायने रखता है।

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