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अंधेरे में तो नहीं चला रहे तीर

अब आप यह बहाना नहीं बना सकते कि आपको निवेश के बारे में जानकार नहीं है आजकल कई एनॉलिटिकल टूल ऑनलाइन उपलब्‍ध हैं

अब आप यह बहाना नहीं बना सकते कि आपको निवेश के बारे में जानकार नहीं है आजकल कई एनॉलिटिकल टूल ऑनलाइन उपलब्‍ध हैं

फ्लाइंड ब्‍लाइंड अंग्रेजी में एक मुहावरा है। इसका मतलब है कि आप कोई काम कर रहे हैं लेकिन आपको इस बात की जानकारी नहीं है कि आप कहां जा रहे हैं या क्‍या कर रहे हैं। अगर वास्‍तव में उड़ने की बात करें तो हवाई जहाज में कई सारे उपकरण होते हैं जो पायलट की उड़ान में मदद करते हैं। भले ही बाहर कुछ भी न दिख रहा हो। लेकिन निवेशक के पास ऐसे उपकरण नहीं होते हैं। या शायद होते हैं। लेकिन ज्‍यादातर निवेशकों के पास ऐसे उपकरण नहीं होते हैं जो निवेश में उनकी मदद करें। मुझे ऐसा इसलिए लगता है क्‍योंकि मेरी बात ऐसे निवेशकों से होती रहती है जिनको बचत और निवेश की थोड़ी समझ होती है। ऐसे ही कुछ निवेशकों से बात करते हुए मुझ अक्‍सर चौंकाने वाली बातें पता चलती हैं। कई बार मुझे झटका भी लगता है।
हाल में एक व्‍यक्ति मुझसे मिलने आए। वे 50 की उम्र पार कर चुके हैं। तमाम लोगों की तरह उनका कैरियर भी पटरी से उतर चुका है और अब वे पहले से कम कमा रहे हैं। वे अब जल्‍द ही रिटायर होना चाहते हैं। उन्‍होंने टैक्‍स बचाने वाले विकल्‍पों में निवेश करते हुए कम रकम बचाई है। ज्‍यादातर रकम पीपीएफ में है। उन्‍होंने म्‍युचुअल फंड में भी निवेश किया है। यह निवेश उन्‍होंने एजेंटों की सलाह पर किया है। हाल में उन्‍होंने एनपीएस में भी निवेश शुरू किया है। कुल मिला कर पीपीएफ और एनपीएस के अलावा उन्‍होंने लगभग 70 फंडों में निवेश किया है। निवेश करने के लिहाज से 70 म्‍युचुअल फंड बहुत अधिक हैं। और यह जानकर किसी को भी झटका लग सकता है। लेकिन यह कोई अनोखी बात नहीं है। अक्‍सर जो लोग एजेंट या सेल्‍सपर्सन की सलाह पर निवेश करते हैं वे बहुत सारे फंड खरीद लेते हैं। पहले के सालों में एजेंटों को फंड बेचने पर बड़ी रकम कमीशन के तौर पर मिलती थी। हालांकि बाद में यह रकम कम होती जाती है। ऐसे में एजेंट लोगों को नए नए फंड खरीदने के लिए प्रोत्‍साहित करते थे। ऐसा वे डायवर्सीफिकेशन के नाम पर करते थे।
निवेशक सोचता है कि डायवर्सीफिकेशन हासिल करने का एक ही तरीका है। ज्‍यादा से ज्‍यादा फंडों में निवेश। लेकिन हकीकत यह है कि ज्‍यादा फंडों में निवेश करने से आपको एक सीमा के आगे कोई अतिरिक्‍त डायवर्सीफिकेशन नही मिलता है।

म्‍युचुअल फंड अपने आप में कोई निवेश नहीं है। यह शेयर में निवेश करने का एक जरिया है। जैसे इक्विटी में फंड के जरिए आप शेयरों में निवेश करते हैं। एक सीमा से अधिक डायवर्सीफिकेशन इसलिए खराब है क्‍योंकि एक ही तरह के फंड अक्‍सर एक ही तरह के शेयरों में निवेश करते हैं। पांच या छह से अधिक फंडों में निवेश करने पर आप एक तरह से ऐसे शेयरों में निवेश कर रहे होते हैं, जो काफी हद तक उन्‍हीं शेयरों की तरह होते हैं जो आपके पास पहले से हैं।
मेरे दोस्‍त के पास 70 फंडों पर नजर रखने का कोई तरीका नहीं था। उनको इन फंडों के रिटर्न के बारे में भी कोई जानकारी नहीं थी। मेरे कहने पर उन्‍होंने अपना सारा निवेश माइ इन्‍वेस्‍टमेंट्स ट्रैकिंग सिस्‍टम में डाला। इसी तरह से एनपीए और पीपीएफ एंटर करना भी आसान था। अब वे अंधेरे में तीर नहीं चला रहे हैं। अब कुल मिला कर उनका निवेश लगभग 75 लाख रुपए का है। इसमें से लगभग आधा पीपीएफ में और 3 लाख रुपए एनपीएस में था। और बाकी निवेश 75 फंडों में था। हालांकि ऐसा करने में वैल्‍यू रिसर्च ऑनलाइन के टूलसेट ने भी उनकी काफी मदद की। इससे उनको न सिर्फ यह जानकारी मिली की उनको कौन सा फंड बेचना चाहिए बल्कि यह भी पता चला कि फंड बेचने पर कितना टैक्‍स लगेगा। वैल्‍यू रिसर्च के टूल से उनको यह भी पता चला कि एफड, इक्विटी या दूसरे विकल्‍पों में निवेश करने पर उनको कितना अच्‍छा या खराब रिटर्न मिल सकता था।
किसी भी मिडिल क्‍लास फैमिली के लिए आजकल 75 लाख रुपए का रिटायरमेंट कॉर्पस काफी नहीं है। मेरे दोस्‍त का काम इससे चल जाएगा क्‍योंकि उनको विरासत में कुछ प्रॉपर्टी मिली है। लेकिन अगर उन्‍होंने एक दशक पहले निवेश के मामले में अंधेरे में तीर चलाना बंद कर दिया होता तो आज वे बहुत बेहतर स्थिति में होते। आजकल निवेश के मामलों में गाइड करने वाले बहुत से टूल ऑनलाइन उपलब्‍ध हैं। ऐसे में अब यह बहाना भी नहीं चलेगा कि मुझे तो निवेश के बारे में जानकारी ही नहीं मिल पा रही थी।

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