
मैं हाल में रिटायर हुआ हूं और मेरे पास 1 करोड़ रुपए का कॉर्पस है। मेरे पास कोई पेंशन या दूसरी इनकम नहीं है। ऐसे में मैं इस कॉर्पस से कम टैक्स देते हुए नियमित इनकम कैसे हासिल कर सकता हूं।
अरूप
कम टैक्स देने के लिण् आप इक्विटी मे निवेश करेंे और आप इससे इनकम हासिल करने का प्रयास करें। इक्विटी से एक साल में 1 लाख रुपए से अधिक इनकम निकालने पर आपको 10 फीसदी लॉंग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ेगा। इसके अलावा अगर आपकी एक साल में कुल इनकम 5 लाख रुपए से अधिक नहीं है तो आपकी इनकम पर वैसे भी कोई टैक्स नहीं लगेगा।
सबसे अहम सवाल यह है कि आपको अपने कॉर्पस से कितनी रकम निकालनी चाहिए जिससे आगे चल कर ऐसा न हो कि आप अपनी पूंजी ही खाने लगें। मेरा मानना है कि आपको टैक्स बचाने पर फोकस नहीं करना चाहिए। टैक्स बचाना बाद में आता है पहले आपको रिटर्न पर फोकस करना चाहिए जिससे आप आकर्षक रिटर्न हासिल कर सकें। इसके अलावा आपको इस बात को लेकर सतर्क रहना चाहिए कि आप इनकम के तौर पर कितनी रकम निकाल रहे हैं जिससे आप निवेश पर मिलने वाला पूरा रिटर्न न खा जाएं। अगर आप ऐसा करेंगे तो आपके पूंजी की कीमत कम नहीं होगी। मेरा सुझाव है कि आप 1 करोड़ रुपए का रिटायरमेंट कॉर्पस की 60 फीसदी रकम इक्विटी में और 40 फीसदी रकम फिक्स्ड इनकम में निवेश करनी चाहिए और सालाना 6 फीसदी रकम यानी प्रति माह 50,000 रुपए निकालनी चाहिए।
इस तरह से आपके पास जरूरतों को पूरी करने के लायक रकम होगी और साथ ही आपकी पूंजी बढ़ती भी रहेगी। इससे भविष्य में जब आपको अधिक इनकम की जरूरत होगी तो आपके लिए इस जरूरत को पूरा करना आसान होगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि आपको निवेश पर 6 फीसदी से अधिक रिटर्न मिलेगा। तो यह अतिरिक्त रिटर्न आपकी पूंजी को बढ़ाने में मदद करेगा। अगर तीन चार साल के बाद आपकी इनकम की जरूरत बढ़ती है तो आप ज्यादा रकम निकाल सकेंगे क्योंकि आपकी पूंजी तब तक बढ़ चुकी होगी।
ऐसा करते हुए आप टैक्स से पूरी तरह से बच नहीं सकते हैं क्योंकि अब निवेश के सभी विकल्पों पर टैक्स लगता है। तो कुल मिला कर आपके पास इनकम के तौर पर 6 लाख रुपए हैं। आप ऐसा विद्ड्रॉअल प्लान सेटअप करने पर विचार कर सकते हैं जो आपकी ज्यादातर टैक्स देनदारी को टाल दे। फिक्स्ड इनकम के लिए विद्ड्रॉअल प्लान और निवेश को अपने और पत्नी के नाम पर बांटने से आपको मदद मिल सकती है। जब आप अपनी असेट के एक भाग को पत्नी के नाम पर ट्रांसफर कर देंगे तो दो इनकम टैक्स अकाउंट हो जाएंगे।
इसके अलावा टैक्स से बचने का और कोई तरीका नहीं है। निवेश को दो लोगों बांट कर और इनकम को इंटरेस्ट इनकम के बजाए कैपिटल गेन के तौर हासिल करना ही टैक्स देनदारी कम करने का आसान तरीका है। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको कुल मुनाफे का 2 या 3 फीसदी ही टैक्स के तौर पर देना होगा।
ये लेख पहली बार जनवरी 13, 2020 को पब्लिश हुआ.

