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भविष्‍य के बारे में सही अनुमान लगाना मुश्किल

अक्‍सर हम सोचते हैं कि अगर हमारे पास सही जानकारी है और इस पर सही तरीके से अमल कर सकें तो हम सफल निवेशक बन सकते हैं

अक्‍सर हम सोचते हैं कि अगर हमारे पास सही जानकारी है और इस पर सही तरीके से अमल कर सकें तो हम सफल निवेशक बन सकते हैं

कुछ समय पहले मुझे निवेश के बारे में दिलचस्‍प जानकारी मिली। यह एक स्‍पीच थी। यह स्‍पीच फंड मैनेजमेंट कंपनी के इन्‍वेस्‍टमेंट मैनेजर लगभग 40 साल पहले दी थी। अब यह स्‍पीच वेब और सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हो गई है। इस स्‍पीच में कुछ ऐसी बुनियादी बातें बताईं गई हैं जो निवेश के लिहाज से काफी फायदेमंद हो सकतीं हैं।

इस स्‍पीच का शीर्षक था ट्राइंग टू हार्ड। यह अपने आप में अजीब लगता है। वास्‍तव में ट्राइंग टू हार्ड यानी बहुत ज्‍यादा प्रयास करने जैसी कोई चीज नहीं होती है। आप गूगल सर्च करके यह स्‍पीच पा सकते हैं और पूरी बात पढ़ सकते हैं। इस स्‍पीच की सबसे दिलचस्‍प बात भौतिक विज्ञान और निवेश के तौर तरीकों में समानता है।

भौतिक विज्ञान इस सिद्धांत पर आधारित है कि सभी भौतिक घटनाएं भौतिक नियमों के अनुसार चलती हैं। यह ऐसे नियम हैं जिनको तर्कपूर्ण तरीके से समझ सकते हैं। और अगर हम इन नियमों को अच्‍छी तरह से जान लेते हैं तो हम ज्ञान को बढ़ाने के साथ अपने पर्यावरण को प्रभावित कर सकते हैं।
तमाम शेयरों के बारे में विश्‍लेषण, तकनीकी विश्‍लेषण, आर्थिक सिद्धांत और अनुमान के तरीके जो हमने और आपने सीखें है यह भी इसी सिद्धांत पर आधारित है। कुछ आर्थिक ताकते हैं जो तार्किक हैं और जिनका आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है। और अगर हम पूरा प्रयास करें और कंपनी के बारे में हर जरूरी डिटेल जान लें। अनुमान लगाने के तौर तरीकों के लिए सही घटकों का पता लगा लें। तो आय, कीमतें और ब्‍याज दरें तार्किक और अनुमानित तरीके से व्‍यवहार करेंगी। अगर हम पूरा प्रयास करें तो।

हालांकि भौतिक विज्ञान की तरह ही निवेशक की वास्‍तविकता काफी हद तक क्‍वांटम मकैनिक्‍स की तरह है। यहां पर घटनाएं हमेशा तर्क और अनुमान के आधार पर नहीं चलती हैं। समय के साथ हमें पता चलता है कि वित्‍तीय और आर्थिक घटनाओं को संचालित करने वाले कारकों के बारे में हमारी जानकारी उतनी नहीं है जितनी होनी चाहिए।

ज्‍यादातर इक्विटी निवेशक सोचते हैं कि अगर वे जरूरी जानकारी जुटा कर इस पर सही से अमल करें तो वे यह जान सकते हैं कि आने वाले दिनों में उनके निवेश का प्रदर्शन कैसा होगा। इन सब बातों का मतलब यह जानना है कि कल शेयर की कीमतें क्‍या होंगी और इस तरह से कुछ पैसे कमाए जा सकते हैं। हम मानते हैं कि कोई रिसर्च पेपर या किसी बिजनेस अखबार में छपा लेखा भविष्‍य का अनुमान लगा सकता है। लेकिन क्‍या वे सफलतापूर्वक ऐसा कर पाते हैं ? यह इस बात पर निर्भर करता है कि भविष्‍य से आपका क्‍या मतलब है ? क्‍या भविष्‍य से आपका मतलब निकट भविष्‍य मे आने वाले बड़ी कंपनियों के वित्‍तीय आंकड़ों से है या आपका मतलब कुछ बड़ा असर डालने वाले चीजों से है ?

इस सवाल का जवाब पीछे मुड़ कर देखने से साफ हो जाता है कि किस बात का अनुमान लगाया जा सकता था और किसका नहीं। आप याद करिए कि 20 वीं शताब्‍दी के आखिरी 25 सालों में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में क्‍या हुआ था ? क्‍या इन घटनाओं का अनुमान पहले से लगाया जा सकता था। आपको लंबी अवधि के रूझानों के साथ कम अवधि के रूझानों पर भी गौर करना होगा। 1980 के अंत में क्‍या आप सॉफ्टवेयर सेवाओं के शानदार उभार का अनुमान लगा सकते थे ? क्‍या शहरों में भारतीयों के जीवन स्‍तर की गुणवत्‍ता में आए उछाल का किसी ने अनुमान लगाया था ? क्‍या 1995 में यह सोचा जा सकता था कि आने वाले समय में ब्‍याज दरों में गिरावट आएगी और अर्थव्‍यवथा में आसानी से पैसा कमाया जा सकेगा ? क्‍या हाउसिंग सेक्‍टर में आए उछाल का अंदाजा पहले से किसी को था ?

1996 में जब एक सस्‍ते और बेसिक मोबाइल फोन की कीमत आज के 20,000 रुपए के बराबर थी तब क्‍या किसी ने इस बात का सटीक अनुमान लगाया था कि 2008 में भारत में कितने मोबाइल कनेक्‍शन होंगे ? इसी तरह से क्‍या किसी ने पहले से इस बात का पूर्वानुमान जताया था कि 2008 में पूरा वैश्विक तंत्र बुरी तरह से धराशाई हो जाएगा। और जब 2009 में मनमोहन सिंह की प्रधानमंत्री के तौर पर वापसी का इक्विटी मार्केट ने सराहा था तो क्‍या किसी ने सोचा था कि अगले पांच साल में स्थितियां कितनी खराब होने जा रही हैं ?
यह कहने की जरूरत नहीं है कि अब आपको ऐसे कई एक्‍सपर्ट मिल जाएंगे जो दावा करेंगे कि उनको इन घटनाओं के बारे में पहले से संकेत मिल गए थे। इस तरह के एक्‍सपर्ट अब कहते हैं कि अंग्रेजी बोलने वालों की बड़ी संख्‍या और टेक्निकल मैन पावर की वजह से आईटी और इससे जुड़े सेवाओं के निर्यात के क्षेत्र में भारत का सुपर पावर बनना तय था। और इलेक्‍ट्रॉनिक वस्‍तुओं की कीमतों में गिरावट ने टेलीकॉम सेक्‍टर में मोबाइल क्रांति का रास्‍ता साफ किया। हालांकि ये एक्‍सपर्ट अब ऐसा कह रहे हैं। और शेयर बाजार का उतार चढ़ाव काफी हद तक चौंकाने वाला रहा है। पिछले दो दशक के दौरान शेयर बाजार की दिशा और बाजार कितनी तेजी से ऊपर जाएगा और कितनी तेजी से नीचे आएगा, इसाके बारे में एक या दो साल पहले भी अनुमान नहीं लगाया जा सका।

तो क्‍या इसका यह मतलब है कि निवेशक के पास ऐसा कोई आधार नहीं है जिस पर वे इस बात का अनुमान लगा सकें कि आने वाले समय में उनका निवेश किस दिशा में जाएगा। ऐसा भी नहीं है। निवेशक को किसी बिजनेस या कंपनी की गुणवत्‍ता को लंबी अवधि के ट्रैक रिकॉर्ड पर परखना चाहिए। इसके अलावा निवेशक का पोर्टफोलियो बड़ा और डायवर्सीफाइड होना चाहिए जिससे कंपनी और किसी खास सेक्‍टर में होने वाली नकारात्‍मक घटनाओं के असर को कम किया जा सके।

अगर आप गौर करें तो पाएंगे कि निवेश करने के तौर तरीकों में दो तरह का नजरिया दिखता है। एक है बहुत ज्‍यादा प्रयास करके भविष्‍य के बारे में अनुमान लगाना और एक है कि आज हो रही घटनाओं के कारणों को पहचानना और इस बात का आंकलन करना कि वे कौन सी चीजें जो हुईं हैं और आगे भी बनी रहेंगी।

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