
बाजार एक बार फिर नई उंचाई पर या उसके करीब है लेकिन जो इक्विटी निवेशक स्टॉक्स अच्छी कीमत में खरीदना चाहते हैं उनके लिए चिंता की कोई बात नहीं है। अप्रत्याशित तौर पर 2020 के आखिरी दौर में कई बार ऐसा हुआ है जब बाजार नई ऊंचाईयों पर पहुंचा है। 9 नवंबर के बाद से सेंसेक्स 34 कारोबारी दिनों में 19 बार नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है। इस तरह से आधे से अधिक दिन ऐसे रहे हैं जब बाजार ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। अगर आप सेंसेक्स का पूरा इतिहास देखें तो यह कोई असामान्य बात नहीं है। इससे पहले 52 बार ऐसा हुआ है जब 34 कारोबारी दिनों में 19 बार सेंसेक्स रिकॉड ऊचाई पर पहुंचा है। हालांकि पहले ऐसा तब हुआ हे जब बाजार ने तीन बार जोरदार तेजी का दौर देखा था। यह दौर 1981,1992 और 2006 में आया था। मई 2006 के बाद यह पहला मौका है जब ऐसा हुआ है।
इसका मतलब है कि निवेशकों का डर काफी हद तक वाजिब है। निवेशकों की एक पूरी पीढ़ी है जिसने इस तरह की तेजी नही देखी है और बहुत से पुराने निवेशक इस बात को भूल गए हैं कि ऐसी चीजें पहले भी होतीं थीं। बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर या इसके करीब होने के साथ समस्या यह है कि निवेशक इसका यह मतलब लगा लेते हैं कि अभी निवेश नहीं करना चाहिए। आखिरकार सभी तरह के निवेश का मुख्य लक्ष्य कम कीमत में खरीदना और ऊंची कीमत में बेचना है ऐसे में उस समय स्टॉक्स क्यों खरीदा जाए जब स्टॉक्स की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। हालांकि इस तरह की सोच रखने वाले इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि रिकॉर्ड ऊंचाई की बात होती है तो हम इसकी तुलना बीते समय से करते हैं और कम कीमत में खरीदने और ऊंची कीमत में बेचने की बात करते समय हम तुलना आने वाले समय से कर रहे हैं। बाजार की आज की रिकॉर्ड ऊंचाई भविष्य का निचला स्तर भी हो सकता है। और निश्चित तौर पर हमेशा ऐसा होता रहा है।
इस बात को आंकड़ों के जरिए समझने के लिए मैंने सेंसेक्स के पूरे इतिहास पर गौर किया। सेंसेक्स के सभी दिनों में 6.4 फीसदी दिन रिकॉर्ड ऊंचाई वाले रहे। इसके बाद मैंने कैलकुलेट किया कि रिकॉर्ड ऊंचाई वाले दिनों में निवेश करने पर मिले रिटर्न और सभी दिनों में निवेश करने पर मिले रिटर्न में कितना अंतर है। इससे यह पता चला कि एक साल के रिटर्न की बात करें तो रिकॉर्ड ऊंचाई के दिनों में निवेश करने पर औसत रिटर्न 22.3 फीसदी मिला होता वहीं सभी दिनों के लिए रिटर्न 19.6 फीसदी होता। तो यह आम सोच के ठीक उलटा है। सभी दिनों के लिए तीन साल का कुल रिटर्न 67.7 फीसदी रहा वहीं रिकॉर्ड ऊंचाई वाले दिनों के लिए कुल रिटर्न 55.3 फीसदी रहा। और पांच साल के लिए सभी दिनों में निवेश का कुल रिटर्न 136.4 फीसदी रहा जबकि रिकॉर्ड ऊंचाई वाले दिनों के लिए कुल रिटर्न 122.3 फीसदी रहा। इस तरह से लंबी अवधि में निवेश के लिहाज से रिकॉर्ड ऊंचाई वाले दिनों में निवेश करने का नुकसान है लेकिन यह बहुत ज्यादा नहीं है। और मुनाफा काफी अधिक है।
ऐसा नहीं है कि इसके लिए मैंने बहुत गहन रिसर्च किया है लेकिन इससे यह बात तो साबित होती है कि बाजार के उच्चतम स्तर से बहुत चिंतित होने की जरूरत नहीं है। अहम बात यह है कि आप निवेश करें और लंबी अवधि के लिए निवेश करें। अगर आप बाजार के रिकॉर्ड ऊंचाई या उसके करीब होने पर निवेश करेंगे तो आपको ज्यादा नुकसान नहीं होने वाला है।
लेकिन एक समस्या है जब आप बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब होता है तो तेज गिरावट की ज्यादा संभावना रहती है। निश्चित तौर पर इस तरह की गिरावट किसी भी समय हो सकती है। ऐसे में बाजार ऊंचाई पर हो निचले स्तर पर हो या इसके बीच कहीं भी एकमुश्त बड़ी रकम निवेश करना अच्छा विचार नहीं है। और बड़ी रकम का मतलब आपके लिए क्या है यह आपकी माली हालत पर निर्भर करता है। इसके लिए कोई एक तय नियम नहीं है।
इसका कारण मनोवैज्ञानिक है। आपके निवेश करने के बाद गिरावट अच्छी भी हो सकती है और किसी के लिए निवेश के तुरंत बाद अपने निवेश की कीमत में गिरावट देखना डरावना भी हो सकता है। ऐसे में बेहतर है कि आप रकम पहले फिक्स्ड इनकम में निवेश करें और इसके बाद इक्विटी या इक्विटी म्युचुअल फंड में एसआईपी/ एसटीपी करें। निवेश बाजार की रिकॉर्ड ऊंचाई में फंसने की चिंता करना या निवेश के लिए बाजार के निचले स्तर का इंतजार करना अच्छी रणनीति नहीं है।


