
मेरे एक सीनियर ने कुछ साल पहले अपनी कहानी बताई थी। उन्होंने 80 के दशक के अंत में एक अग्रणी मीडिया संस्थान में पहली नौकरी शुरू की थी। और उसी दिन संस्थान से एक सीनियर साथी रिटायर हो रहे थे। उनके सम्मान में एक विदाई समारोज आयोजित किया गया था। मेरे सीनियर का कहना था कि उस विदाई समारोह को देख कर मुझे भी लगा कि मैं भी इसी तरह से एक दिन इसी संस्थान से रिटायर हो जाउंगा। हालांकि समय के साथ पता चला कि उनका इस तरह से सोचना सही नहीं था। और बाद में चीजें बहुत बदल गईं। उनको इस बदले हुए माहौल के साथ खुद को एडजस्ट करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
मेरे सीनियर भारत में प्राइवेट सेक्टर में नौकरी को लेकर आई अनिश्चितता की बात कर रहे थ्ो। और यह कोरोना से कई साल पहले की बात है। कोरोना ने नौकरी को लेकर असुरक्षा को और भी बढ़ा दिया है। जो नौकरी कर रहे हैं वे भी इस बात को बहुत भरोसे से नहीं कह सकते हैं कि उनकी नौकरी कब तक रहेगी।
क्या हो आगे का रास्ता
तो सवाल उठता है कि इस माहौल में आगे का रास्ता क्या होना चाहिए। हम कौन सा तरीका अपनाएं जिससे हम नौकरी की असुरक्षा और अनिश्श्चितता का सामना अच्छी तरह से कर पाएं और तनाव मुक्त जीवन जी सकें। एक बात तो साफ है कि नौकरी को लेकर मौजूदा माहौल बेहतर होगा या और खराब होगा। यह हमारे या आपके हाथ में नहीं है। ऐसे में हम सिर्फ उन बातों पर फोकस कर सकते हैं जो हमारे हाथ में हैं। यानी जो हम कर सकते हैं।
मौजूदा परिदश्य से निपटने का एक ही तरीका है। वह है कि आप ज्यादा से ज्यादा बचत और निवेश करें। माहौल कैसा भी हो ।
ये लेख पहली बार सितंबर 28, 2021 को पब्लिश हुआ.