IPO अनालेसिस

Paras Healthcare IPO: भविष्य के अस्पतालों के लिए क्या इतनी क़ीमत चुकाना सही है?

चार पुराने अस्पताल पूरे कारोबार का बोझ उठा रहे हैं. IPO का प्राइस यह मानकर चल रहा है कि बाक़ी अस्पताल भी, और जो दो नए आने वाले हैं वो भी, उतना ही कमाने लगेंगे.

चार पुराने अस्पताल पूरे कारोबार का बोझ उठा रहे हैं. IPO का प्राइस यह मानकर चल रहा है कि बाक़ी अस्पताल भी, और जो दो नए आने वाले हैं वो भी, उतना ही कमाने लगेंगे.Anand Kumar/AI-Generated Image

सारांशः FY25 में Paras Healthcare घाटे में थी. और अब उसका IPO जो प्राइस मांग रहा है, वो पिछले साल की कमाई को देखता ही नहीं. यह पूरा दांव उन अस्पतालों पर है जो अभी जमने की कोशिश कर रहे हैं, और बिल चुकाने वाली उन सरकारी योजनाओं पर, जो रेट ख़ुद तय करती हैं. कुछ आंकड़े इस दांव के पक्ष में हैं. पर कुछ ऐसी जगह छिपे हैं, जहां आमतौर पर निवेशक देखते ही नहीं.

Paras इस IPO से ₹1,450 करोड़ जुटा रही है. इसमें ₹500 करोड़ नए शेयर जारी करके आएंगे और ₹950 करोड़ पुराने शेयरहोल्डरों के शेयर बिकने से, यानी ऑफ़र फ़ॉर सेल से. इशू 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक खुला है. नए शेयरों से आए पैसे में से ₹375 करोड़ कर्ज़ चुकाने में जाएंगे और बाक़ी कंपनी के आम कामकाज में.

कौन बेच रहा है

प्रमोटर Dr. Dharminder Kumar Nagar के पास अभी 72.8% हिस्सेदारी है, जो ऊपरी प्राइस बैंड पर घटकर क़रीब 64% रह जाएगी. पर सबसे ज़्यादा शेयर Commelina बेच रहा है, जो 2017 से कंपनी में पैसा लगाए हुए है. वो अपनी आधी से ज़्यादा हिस्सेदारी बेच रहा है और वो भी अपनी औसत लागत के क़रीब छह गुना पर. अप्रैल 2025 में कंपनी के शेयर ₹237 पर बिके थे, यानी IPO प्राइस के क़रीब एक-तिहाई पर.

Paras करती क्या है

Paras के आठ अस्पताल हैं, जिनमें कुल 2,211 बेड हैं. पांच अस्पताल उत्तर भारत में हैं, और तीन पटना, दरभंगा और रांची में. सबसे बड़ा अस्पताल गुरुग्राम में है और कंपनी का क़रीब एक-तिहाई रेवेन्यू अकेले वहीं से आता है. FY26 में 41% रेवेन्यू सरकारी योजनाओं और सरकारी कंपनियों से आया. इनसे बेड तो भर जाते हैं, पर ये तय रेट पर पैसा देते हैं और वो भी देर से. आठ में से छह अस्पताल किराये की इमारतों में चलते हैं. इससे शुरू में कम पैसा लगता है, पर हर महीने किराया तो देना ही पड़ता है.

फ़ाइनेंशियल झलक

आंकड़ा (₹ करोड़) FY24 FY25 FY26
ऑपरेशंस से रेवेन्यू 1,129 1,294 1,606
एडजस्टेड EBIT 62 11 169
नेट प्रॉफ़िट -15 -58 44
ऑपरेशंस से कैश 92 86 164
सोर्स: कंपनी का RHP. एडजस्टेड EBIT में किराये वाली इमारतों का डेप्रिसिएशन वापस जोड़ा गया है, और उसकी जगह असल में चुकाया गया किराया घटाया गया है.

रिटर्न और कर्ज़

आंकड़ा FY24 FY25 FY26
रेवेन्यू ग्रोथ (%) - 14.6 24.1
एडजस्टेड EBIT मार्जिन (%) 5.5 0.8 10.5
एडजस्टेड ROCE (%) 7.1 1.1 13.6
एडजस्टेड डेट-टू-इक्विटी (गुना) 1.6 2.6 2.2
सोर्स: कंपनी का RHP. एडजस्टेड आंकड़ों में किराये की देनदारी को कर्ज़ और लगी पूंजी में नहीं जोड़ा गया है, और EBIT में से असल में चुकाया गया किराया घटाया गया है.

कामकाज के अहम पैमाने

आंकड़ा FY24 FY25 FY26
कुल बेड 2,135 2,135 2,211
चालू बेड 1,332 1,465 1,502
ऑक्यूपेंसी (%) 52.5 50.8 61.8
भरे हुए बेड-दिन 2,54,716 2,68,927 3,38,321
ARPOB (₹) 44,306 48,089 47,398
मरीज़ के भर्ती रहने के औसत दिन 3.1 2.9 2.9
सोर्स: कंपनी का RHP. ऑक्यूपेंसी, यानी कितने बेड भरे रहे, चालू बेड के हिसाब से है. ARPOB यानी एक भरे हुए बेड से रोज़ की औसत कमाई.

FY25 में दो नए अस्पताल शुरू करने और उनमें मरीज़ लाने में रेवेन्यू की लगभग सारी बढ़त खप गई, और Paras को ₹58 करोड़ का घाटा हुआ. FY26 में बाज़ी पलट गई. इस बार कमाई इसलिए बढ़ी कि ज़्यादा बेड भरे, इसलिए नहीं कि हर बेड से कमाई बढ़ी. इस सुधार का एक हिस्सा रेडियोलॉजी से भी आया. Paras ने यह काम बाहर से कराने के बजाय ख़ुद करना शुरू किया, जिससे FY26 में आउटसोर्सिंग का ख़र्च लगभग आधा रह गया. पर यह बचत एक बार की है, हर साल नहीं होगी. और अकेले Q1 FY27 में ही कंपनी ने ₹50 करोड़ का नेट प्रॉफ़िट कमाया.

दूसरे अस्पतालों से तुलना (FY26)

आंकड़ा Paras Healthcare Global Health Jupiter Life Line Yatharth Hospital and Trauma Care
चालू बेड 1,502 2,737 1,052 1,645
ऑक्यूपेंसी (%) 61.8 61.6 61.2 68
ARPOB (₹) 47,398 66,550 67,700 33,124
भर्ती रहने के औसत दिन 2.9 3 3.9 4.2
सोर्स: कंपनी का RHP, FY26 के आंकड़े.

अस्पतालों के अंदर की तस्वीर

Paras के अस्पताल जितने पुराने होते हैं, उतना ज़्यादा कमाते हैं. इसे समझने के लिए ऑपरेटिंग EBITDA देखिए, यानी डेप्रिसिएशन, ब्याज और टैक्स से पहले, मरीज़ों के इलाज से हुआ मुनाफ़ा. FY24 में पुराने अस्पताल हर ₹1 के रेवेन्यू पर 18 पैसे का ऑपरेटिंग मुनाफ़ा बचाते थे. FY26 में यह बढ़कर 26 पैसे हो गया. रांची और उदयपुर, जो अभी बढ़ने के दौर में हैं, 5 पैसे से भी कम से 15 पैसे पर पहुंच गए. और श्रीनगर व कानपुर के दो नए अस्पताल, जो पहले हर ₹1 पर 86 पैसे गंवा रहे थे, अब 9 पैसे से भी कम गंवा रहे हैं, और जून 2026 की तिमाही में ऑपरेटिंग मुनाफ़े में आ गए.

पुराने अस्पताल हर ₹1 के रेवेन्यू पर क़रीब 26 पैसे का ऑपरेटिंग मुनाफ़ा कमाते हैं, बढ़ते अस्पताल 15 पैसे, और नए अस्पताल जून 2026 की तिमाही में मुनाफ़े में आ गए.

पर कंपनी के पुराने अस्पताल अब अपनी सीमा के क़रीब हैं. Q1 FY27 में गुरुग्राम का अस्पताल 89% भरा रहा, और पुराने अस्पतालों का रेवेन्यू सिर्फ़ 9% बढ़ा. यानी अब ग्रोथ नए अस्पतालों से ही आनी है, और अक्सर सरकारी योजनाओं वाले मरीज़ों से, जिनसे बेड तो भरते हैं पर कमाई कम होती है.

कंपनी की ख़ूबियां

1. ख़ास इलाज पर ज़ोर. हार्ट, कैंसर, न्यूरो, पेट, हड्डी और किडनी, इन छह स्पेशियलिटी को मिलाकर CONGOR कहा जाता है. FY26 का 74.7% रेवेन्यू इन्हीं से आया, और इनमें से किसी एक का हिस्सा 25% से ज़्यादा नहीं है.

2. नए अस्पताल तेज़ी से सुधर रहे हैं. नए अस्पतालों का घाटा लगभग ख़त्म हो चुका है, और बढ़ते अस्पतालों का मार्जिन दो साल में तीन गुना हो गया है.

3. बढ़ने की पूरी गुंजाइश. ज़्यादा बेड भरने का फ़ायदा साफ़ दिखा है. FY24 से FY26 के बीच कंपनी ने ₹364 करोड़ की अतिरिक्त पूंजी लगाई, और उससे एडजस्टेड EBIT ₹107 करोड़ बढ़ा, यानी क़रीब 29% का रिटर्न. गुरुग्राम और लुधियाना के नए अस्पतालों के बाद, FY28 तक कुल क्षमता क़रीब 3,000 बेड हो जाएगी.

जोखिम, जो जानना ज़रूरी है

1. सरकारी भुगतान पर निर्भरता. सरकारी योजनाएं रेट ख़ुद तय करती हैं, किसी अस्पताल को अपनी सूची से बाहर भी कर सकती हैं, जैसा Paras के साथ पहले हो चुका है, और पैसा देर से देती हैं. पैसा आने में लगने वाला वक़्त दो साल में 46 दिन से बढ़कर 66 दिन हो गया है. और अब कामकाज से आने वाला कैश, ऑपरेटिंग EBITDA का सिर्फ़ आधा रह गया है.

2. डॉक्टर और स्टाफ़. पिछले तीन साल से हर साल 60% से 67% स्टाफ़ नौकरी छोड़ रहा है. और अस्पताल के कारोबार में मरीज़ अक्सर डॉक्टर के नाम पर आते हैं, इसलिए किसी स्पेशलिस्ट के जाने से कमाई और साख, दोनों को नुक़सान होता है.

3. कर्ज़ और किराया. IPO के बाद भी Paras पर ₹500 करोड़ से ज़्यादा का कर्ज़ रहेगा, और लगभग इतनी ही किराये की देनदारी. इसके अलावा घाटे में चल रही दो सब्सिडियरी कंपनियों पर पेरेंट कंपनी के ₹407 करोड़ बकाया हैं, और इनमें से अब तक एक रुपया भी नहीं लौटा है. 

आगे का रास्ता

Paras के पास आगे बढ़ने के दो रास्ते हैं. सस्ता रास्ता यह है कि वो अपने उन बेड को चालू करे, जो पहले से बने पड़े हैं और कुल बेड का क़रीब एक-तिहाई हैं. इसमें पैसे से ज़्यादा डॉक्टरों और नर्सों की ज़रूरत है. महंगा रास्ता है गुरुग्राम और लुधियाना में किराये पर नए अस्पताल खोलना. यहां कमाई शुरू होने से पहले ही किराया शुरू हो जाता है, और जून 2026 तक गुरुग्राम की इमारत बन ही रही थी. Paras के सबसे नए अस्पतालों को ऑपरेटिंग मुनाफ़े तक पहुंचने में क़रीब तीन साल लगे थे.

हमारी राय

₹693 के प्राइस पर Paras की कुल वैल्यू ₹7,498 करोड़ बैठती है, यानी FY26 के ₹44 करोड़ के मुनाफ़े का क़रीब 171 गुना. साफ़ है कि निवेशक पिछले साल की कमाई के पैसे नहीं दे रहे. वो इस उम्मीद के पैसे दे रहे हैं कि नए अस्पताल बड़े होकर कितना कमा सकते हैं.

पुराने अस्पताल अच्छा कमा रहे हैं, नए तेज़ी से सुधर रहे हैं, और ज़्यादातर क्षमता पहले से तैयार है. Paras के सबसे पुराने अस्पताल दिखाते हैं कि यह पूरा नेटवर्क कितना कमा सकता है. IPO का प्राइस इसी दांव पर टिका है कि बाक़ी अस्पताल भी वहां तक पहुंचेंगे. और यह दांव सही बैठेगा या नहीं, इसका सबसे पहला इशारा नए अस्पतालों में भरे बेड और पैसे की वसूली से मिलेगा.

यह भी पढ़ें: Fortis vs Aster: दो हॉस्पिटल चेन, लेकिन क्यों एक-दूसरे अलग हैं दांव?

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