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सिर मुड़ाते ही तो नहीं पड़ेगे ओले

नए निवेशक हैं तो तीसरी या चौथी लहर का डर है बेमानी

नए निवेशक हैं तो तीसरी या चौथी लहर का डर है बेमानी

बाज़ार में तेजी का दौर जारी है। 50,000 अंक के पार अब सेंसेक्‍स का नया ठिकाना है। वैसे तो ब़ाजार में निवेश शुरू करने का कोई खास समय नहीं होता है। निवेश शुरू करने के लिए कोई भी समय अच्‍छा है। फिर भी ब़ाजार में निवेश शुरू करने की चाहत रखने वाले निवेशकों के मन में तीसरी लहर की आशंका को लेकर कई तरह के सवाल हो सकते हैं। मसलन निवेश शुरू करते ही या कुछ माह बाद ही तीसरी लहर आ गई तो। ब़ाजार में बड़ी गिरावट आने से पूंजी का नुकसान तो नहीं हो जाएगा। यहां हम आपके मन में उठ रही तमाम आशंकाओं का जवाब देने का प्रयास कर रहे हैं। साथ हम आपको निवेश का वह तरीका भी बताएंगे जिससे ब़ाजार का उतार-चढ़ाव आपके लिए बेमानी हो जाए।

ब़ाजार टूटा तो क्‍या होगा

किसी भी नए निवेशक के मन में यह सवाल आ सकता है कि अभी तो ब़ाजार का अच्‍छा दौर चल रहा है। ऐसे में अगर मैं निवेश शुरू करता हूं और अगले कुछ महीनों में तीसरी लहर आ जाती है तो क्‍या होगा। मेरे निवेश पर इसका क्‍या असर होगा? कोरोना की पहली लहर के शुरूआती दौर में यानी मार्च 2020 में ब़ाजार में कहर बरपा था। उस समय ब़ाजार 30 फीसदी तक नीचे आ गया था। अगर फिर ऐसा कुछ हो गया तो मेरे लिए तो सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने वाली बात हो जाएगी।


एक नए निवेशक के तौर पर आपके मन में इस तरह से सवाल उठना स्‍वाभाविक है। लेकिन अगर आप व्‍यवस्थित तरीके से ब़ाजार में निवेश शुरू करते हैं और निवेश की बुनियादी बातों पर अमल करते हैं तो ब़ाजार का उतार-चढ़ाव आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। उलटा इससे आपको फायदा ही होगा।

एसआईपी करेगी आपकी राह आसान

अगर आप नए निवेशक हैं तो निवेश की शुरूआत सिस्‍टमेटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान यानी एसआईपी के जरिए करना हमेशा बेहतर होता है। एसआईपी के जरिए आप हर माह एक तय रकम ब़ाजार में निवेश करते हैं। और यह छोटी रकम लंबी अवधि में एक बड़ी रकम में बदल जाती है। एसआईपी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके जरिए छोटी-छोटी रकम नियमित अंतराल पर ब़ाजार में निवेश की जाती है। इससे आपके निवेश की लागत औसत हो जाती है। आसान शब्‍दों में कहें तो इस तरह निवेश का जोखिम कम हो जाता है।

ब़ाजार टूटा तो मिलेगा बड़ा फायदा

जब आप एसआईपी के जरिए निवेश करते हैं तो ब़ाजार में आने वाली किसी भी छोटी-बड़ी गिरावट का फायदा भी आपको मिलता है। क्‍योंकि ब़ाजार गिरने पर यूनिट सस्‍ती हो जाती है और उतनी ही रकम में आपको ज्‍यादा यूनिट मिलती है और बाद में ब़ाजार रिकवर होने पर गिरावट के समय खरीदी गई अतिरिक्‍त यूनिट आपके रिटर्न को बढ़ाती है। तो अगर आप आज एसआईपी के जरिए निवेश शुरू करते हैं और अगले कुछ महीनों में ब़ाजार टूट जाता है या ब़ाजार में 20-30 फीसदी तक गिरावट आ जाती है तो इससे आपका कोई नुकसान नहीं होने वाला है। पहली बात तो यह है कि आपने अभी निवेश शुरू ही किया है ऐसे में आपके निवेश की रकम इतनी ज्‍यादा नहीं होगी कि ब़ाजार टूटने पर आपके रातों की नींद उड़ जाए। दूसरी बात, ब़ाजार गिरने पर सस्‍ता ब़ाजार आपको उसी रकम में ज्‍यादा यूनिट खरीदने का मौका देगा। इसका फायदा आपको उस समय मिलेगा जब ब़ाजार इस गिरावट से उबरेगा और फिर से तेजी की राह पर होगा।

निवेश की बुनियादी बातों पर करें अमल

अगर आप ब़ाजार के उतार चढ़ाव को बेमानी बनाना चाहते हैं तो आपको निवेश की कुछ बुनियादी बातों पर अमल करना होगा। सबसे पहले निवेशक के तौर पर आपको लंबी अवधि का नजरिया अपनाना होगा। अगर आप एसआईपी के जरिए निवेश शुरू कर रहे हैं तो यह लंबी अवधि के लिए होना चाहिए। यहां लंबी अवधि से मतलब 10 साल या इससे अधिक की अवधि है। 10 साल या इससे लंबी अवधि की एसआईपी में ही आपको कंपाउंडिंग का फायदा मिल पाता है और आपके निवेश की अवधि जितना अधिक होगी कंपाउंडिंग का फायदा भी उतना ही अधिक होगा। दूसरी अहम बात यह है कि ब़ाजार नीचे जाए या ऊपर आपको निवेश जारी रखना है। आप निवेश तभी बंद करें जब आपका गोल पूरा हो जाए यानी उतनी रकम हो जाए जो आपकी जरूरतों को पूरा कर सके। और सबसे अहम और आखिरी बात। आप एसआईपी की रकम में हर साल इजाफा करना न भूलें। आप हर अपनी इनकम के हिसाब से एसआईपी की रकम बढ़ाते रहें। इससे लंबी अवधि में आपको बड़ी रकम जुटाने में बहुत आसानी होगी।


ये लेख पहली बार अक्तूबर 04, 2021 को पब्लिश हुआ.

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