हाऊस वॉयस

'नुकसान कम करने की क्षमता उतनी ही ज़रूरी है जितना धन कमाना'

एल. एंड टी. म्यूचुअल फ़ंड के सीईओ कैलाश कुलकर्णी के साथ बिज़नस के कई अहम मुद्दों पर बातचीत

एल. एंड टी. म्यूचुअल फ़ंड के सीईओ कैलाश कुलकर्णी के साथ बिज़नस के कई अहम मुद्दों पर बातचीत

रेग्युलेटर द्वारा ख़र्च के स्लैब में संशोधन, पैसिव पर ज़ोर, और कई नए AMC के अचानक मैदान में आने से लगता है जैसे लागत की तरफ़ ध्यान ज़्यादा है। क्या आप मानते हैं कि मौजूदा स्तर की लागत (ख़र्च के अनुपात में) को कम कर के बिज़नस को फ़ायदे में चलाया जा सकता है?
इसका सीधा सा जवाब है, हां। लेकिन हमें यह समझने की ज़रूरत है कि हम ऐसा क्यों कह रहे हैं। महामारी के में इंडस्ट्री के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण बात हुई है, वो टैक्नोलॉजी का अपनाया जाना है। पहले अगर, 40-60 प्रतिशत क़ारोबार इलेक्ट्रॉनिक तरीक़े से किया जाता था, वहीं आज ये 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है। ज़ाहिर है, जितने ज़्यादा बिज़नस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या सिस्टम पर जा रहे हैं, उतना ही इनकी लागत में भारी कमी आ रही है। इसके साथ ही सर्विसिंग के ख़र्च में भी काफ़ी कमी हो गई है। पिछले दो साल में टैक्नोलॉजी में भी काफ़ी सुधार हुआ है, जिससे लागत कम करने में मदद मिली है। उस हद तक, जब उद्योग के AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) बढ़ते हैं, तो फ़ंड का साईज़ भी बढ़ता है। इसमें अर्थव्यवस्था का स्केल भी रोल अदा करता है।

आजकल बहुत से लोग सीधे शेयरों को ख़रीद कर इक्विटी में निवेश कर रहे हैं। स्मॉल केस जैसे इनोवेशन इसे और ज़्यादा प्रोत्साहित कर रहे हैं। म्यूचुअल फ़ंड के क़ारोबार पर आप इसका क्या प्रभाव देखते हैं? क्या ये उस ग्रोथ स्टोरी को चुनौती दे सकते हैं जिसे आप फ़ंड इंडस्ट्री के भविष्य के तौर पर देखते हैं?
आपको ये मानना होगा कि किसी सीरियस निवेश करने वाले के पोर्टफ़ोलियो में म्यूचुअल फंड हमेशा मौजूद रहेंगे। किसी भी रिटेल इन्वेस्टर के लिए सीधे स्टॉक ख़रीदना आसान नहीं होता, क्योंकि ज्यादातर लोग दोस्तों और साथ में काम करने वालों के सुझावों पर ये निवेश करते हैं। हालांकि, जब नुकसान होता है या कोई बड़ी गिरावट आती है, तो इसी समय निवेश करने वाले व्यक्ति को पता चलता है कि शेयरों में निवेश करना इतना आसान भी नहीं है, और निवेश के लिए माइक्रो और मैक्रो दोनों ही तरह के फ़ैक्टर की गहरी समझ की ज़रूरत होती है।

मेरा विश्वास है कि जैसे-जैसे वक़्त गुज़रेगा, आप दोनों तरह की बातें देखेंगे। हालांकि, ज़्यादातर धन म्यूचुअल फ़ंड में ही निवेश किया जाएगा। मगर ये भी है कि निवेशक कुछ निवेश अपने दम पर भी निवेश करना चाहेंगे और हो सकता है कि हर किसी के जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर, 10-25 प्रतिशत निवेश सीधे स्टॉक बाज़ार में किया जाए।


रैपिड-फ़ायर सवाल:
· वो निवेश गुरु/मैनेजर जिसे आप सबसे ज़्यादा मानते हैं: मैं कुछ ऐसे लोगों को फ़ॉलो करना पसंद करता हूं जो बहुत ज़्यादा जाने-पहचाने तो नहीं हैं, और वो 'निवेश गुरु' होने का दावा भी नहीं करते हैं। लेकिन निवेश की बुनियादी बातों का ध्यान रखते हुए, उन्होंने काफ़ी धन कमाया है, और मार्केट में ऐसे बहुत से लोग मौजूद हैं।

· वो बिज़नस लीडर जिनका अनुकरण आप करना चाहेंगे: रतन टाटा, और इसके तीन कारण हैं। पहला, वो न केवल बिज़नस के मामले में फ़ोकस्ड हैं। दूसरा, वो हमेशा भविष्य पर नज़र रखते हैं, और ये भी देखते हैं कि भविष्य में कंपनियां कैसे चलेंगी। एक और महत्वपूर्ण पहलू है कि उनकी कपंनी चुपचाप, बिना किसी शोर के भलाई के कामों में (समाजसेवा या फ़िलेंथ्रोपी) लगी हुई है, ये बहुत प्रशंसनीय है।


· आपका अब तक का सबसे फ़ायदेमंद फ़ाइनेंशियल निवेश: मैंने 1998 में एक म्यूचुअल फ़ंड में निवेश किया था, और फिर इसके बारे में भूल गया। ये एक लंबी कहानी है, इसके संक्षेप में मैं कहूंगा, कि ये मेरे सबसे अच्छे निवेशों में से एक रहा। इसने मुझे निवेश का सबसे बड़ा सबक़ सिखाया कि बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, अगर आप लंबी-अवधि के लिए निवेश को बनाए रखते हैं, तो आप वक़्त के साथ सही रिटर्न पाएंगे ही पाएंगे।

· धन कमाने वो का मंत्र जिसे आप मानते हैं: नुक़सान में कटौती करने की क्षमता उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना पैसा कमाना।

· अगर आप मनी-मैनेजर नहीं होते, तो क्या होते: मैं ट्रैवल को पसंद करने वाला एक ऐसे ट्रैवल-शो का एंकर होता, जो भारत और दुनिया भर में घूमता।

ये लेख पहली बार नवंबर 16, 2021 को पब्लिश हुआ.

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