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सारांशः ज़्यादातर स्टॉक स्क्रीन हालिया विनर्स को खोजते हैं. यह स्क्रीन एक मुश्किल सवाल पूछती है: कौन-सी कंपनियां लगातार 16 तिमाहियों में 20 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ीं? इस कसौटी पर सिर्फ़ पांच पास हुईं. जानिए इनकी ग्रोथ का मतलब क्या है, और क्या नहीं.
लगातार 16 तिमाहियों तक 20 प्रतिशत से ऊपर रेवेन्यू ग्रोथ बनाए रखना कोई रिकॉर्ड नहीं है. यह एक कड़ा इम्तिहान है.
एक अच्छी तिमाही को कई तरह से समझाया जा सकता है. पिछले साल का कमज़ोर बेस. क़ीमतों में बढ़ोतरी. कोई एकबारगी ऑर्डर. कोई अस्थायी अनुकूल परिस्थिति. लेकिन लगातार 16? इसके पीछे आमतौर पर कुछ ढांचागत वजह होती है: एक बड़ा बाज़ार, बढ़ता हुआ मार्केट शेयर या एक बिज़नेस मॉडल जो छोटे से बड़े प्लेटफ़ॉर्म में तब्दील हो रहा हो.
भारत में हज़ारों लिस्टेड कंपनियों में से सिर्फ़ पांच इस स्क्रीन में पास हुईं.
इसका मतलब यह नहीं कि ये अपने आप में ख़रीदने लायक हैं. लगातार रेवेन्यू ग्रोथ और बिज़नेस की असली क्वालिटी एक ही बात नहीं होती. इनमें से कुछ कंपनियों को एक्विज़िशन, अकाउंटिंग में बदलाव या ऐसे साइकल से फ़ायदा मिला जो दोबारा न हों. कुछ ने अभी तक इस ग्रोथ को नकदी में नहीं बदला. यह स्क्रीन बताती है कि ग्रोथ कहां टिकी रही. यह समझना कि ऐसा क्यों हुआ और ग्रोथ आगे भी जारी रहेगी या नहीं, वह काम अभी बाकी है.
वह ग्रोथ जो मंदी में भी बरकरार रही
पांच कंपनियां जिन्होंने लगातार 16 तिमाहियों में 20 प्रतिशत से ज़्यादा रेवेन्यू ग्रोथ बनाए रखी
| कंपनी | 5 साल की रेवेन्यू ग्रोथ (%) | 5 साल की PAT ग्रोथ (%) | स्टॉक रेटिंग (5 में से) |
|---|---|---|---|
| Eternal | 94 | 22 | 2 |
| FSN E-Commerce | 35 | 43 | 3 |
| KPI Green Energy | 92 | 85 | 4 |
| Sejal Glass | 109 | 40 | 3 |
| Tembo Global Industries | 57 | 86 | 3 |
Eternal
Eternal, जिसका नाम पहले Zomato था, अब चार बिज़नेस चलाती है: फ़ूड डिलीवरी, Blinkit का क्विक कॉमर्स, District का गोइंग-आउट प्लेटफ़ॉर्म और Hyperpure का B2B रेस्टोरेंट सप्लाई बिज़नेस.
असली कहानी सिर्फ़ रेवेन्यू की नहीं है. यह एक ढांचागत बदलाव की कहानी है, जहां एक भारी भरकम नुक़सान उठाने वाली फ़ूड-टेक कंपनी धीरे-धीरे एक कंज़्यूमर इंटरनेट प्लेटफ़ॉर्म में बदल रही है, जो अब असली मुनाफ़ा भी देने लगी है. फ़ाइनेंशियल ईयर 21 में Eternal को टैक्स से पहले ₹815 करोड़ का घाटा हुआ था और ऑपरेटिंग कैश फ़्लो -₹1,018 करोड़ था. फ़ाइनेंशियल ईयर 26 तक PAT ₹615 करोड़ पर पॉज़िटिव हो गया और ऑपरेटिंग कैश फ़्लो ₹632 करोड़ पर पहुंच गया.
इसके पीछे तीन बातें थीं. फ़ूड डिलीवरी मैच्योर हुई, जिसमें बेहतर ऑर्डर डेंसिटी, प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस और डिलीवरी इकोनॉमिक्स ने मदद की. Hyperpure ने एक बढ़ता हुआ B2B रेवेन्यू स्ट्रीम जोड़ा. और Blinkit ने ग्रोथ प्रोफ़ाइल पूरी तरह बदल दी.
हालांकि, प्रमुख नंबरों को ध्यान से पढ़ें. फ़ाइनेंशियल ईयर 26 की चौथी तिमाही में Eternal ने 186 प्रतिशत कंसॉलिडेटेड एडजस्टेड रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई. लाइक-फ़ॉर-लाइक ग्रोथ 64 प्रतिशत थी, क्योंकि Blinkit के ओन-इन्वेंटरी मॉडल में शिफ़्ट होने से रेवेन्यू ज़्यादा दिखा. नेट ऑर्डर वैल्यू, एडजस्टेड EBITDA और सेगमेंट-लेवल प्रॉफ़िटेबिलिटी ज़्यादा सही तस्वीर पेश करते हैं.
फ़ूड डिलीवरी अभी भी कैश का इंजन है. अगला पड़ाव Blinkit तय करेगी. अगर डार्क-स्टोर यूटिलाइज़ेशन बेहतर हो और मुक़ाबला कम हो, तो ग्रोथ ज़्यादा मुनाफ़े वाली होगी. अगर नहीं, तो PAT और कैश फ़्लो उतार-चढ़ाव भरे बने रहेंगे.
KPI Green Energy
KPI Green Energy सोलर, विंड, हाइब्रिड प्रोजेक्ट, कैप्टिव पावर, IPP प्रोजेक्ट और बैटरी स्टोरेज व ग्रीन हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों में काम करती है.
भारत में रिन्यूएबल एनर्जी के लिए कैपेक्स साइकल मज़बूत रहा है, और KPI Green को प्रोजेक्ट मिलने, ज़मीन की उपलब्धता, एग्ज़ीक्यूशन की काबिलियत और बढ़ती ऑर्डर बुक से फ़ायदा हुआ. रिन्यूएबल ग्रोथ सिर्फ़ ज़्यादा सोलर पैनल बेचने का मामला नहीं है. हर प्रोजेक्ट में ज़मीन, सरकारी मंज़ूरियां, फ़ंडिंग, पावर इवेक्युएशन इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऑफ़टेक अग्रीमेंट यानी बनी बिजली बेचने के लिए लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट की ज़रूरत होती है. KPI Green की इन सब टुकड़ों को जोड़ने की क्षमता ने ही रेवेन्यू और मुनाफ़े दोनों को कंपाउंड किया है.
लेकिन इस ग्रोथ की क्वालिटी पर भी नज़र डालनी ज़रूरी है.
रिन्यूएबल बिज़नेस में ज़्यादा पूंजी की ज़रूरत होती है. KPI Green का कर्ज़ और निवेश दोनों बढ़े हैं. प्रोजेक्ट बिज़नेस में कंपनी पहले उधार लेती है और निवेश करती है, कैश फ़्लो तभी आता है जब प्रोजेक्ट चालू हो. यह अपने आप में कोई खतरा नहीं है, लेकिन एग्ज़ीक्यूशन का जोख़िम ज़रूर बढ़ जाता है. अगर प्रोजेक्ट में देरी हो, टैरिफ़ कम निकले, या रिसीवेबल खिंचें, तो ब्याज़ का बोझ कैश फ़्लो से पहले आ सकता है. पिछले छह साल में से दो साल में ऑपरेटिंग कैश फ़्लो नेगेटिव रहा. PAT अकेला पूरी कहानी नहीं बताता.
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Sejal Glass
Sejal Glass रेज़िडेंशियल इमारतों, कमर्शियल प्रॉपर्टी, हॉस्पिटल, डेटा सेंटर और हाई-सिक्योरिटी सुविधाओं के लिए आर्किटेक्चरल ग्लास बनाती है.
एक ज़रूरी बात पहले: Sejal कई साल तक घाटे में थी. फ़ाइनेंशियल ईयर 22 में इसका मुनाफ़ा काफ़ी हद तक एक NCLT रेज़ोल्यूशन से मिले ₹150 करोड़ के एक्सेप्शनल गेन की वजह से था, जो एक कोर्ट की देखरेख में किसी संकटग्रस्त कंपनी की वित्तीय संरचना को दुरुस्त करने की प्रक्रिया है. यह बैलेंस शीट की रीसेट थी, ऑपरेटिंग परफ़ॉर्मेंस नहीं. इसके पांच साल की PAT ग्रोथ को इसी नज़रिए से देखा जाना चाहिए.
उसके बाद का ऑपरेटिंग टर्नअराउंड असली है. फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में कंसॉलिडेटेड इनकम बढ़कर ₹401 करोड़ पर पहुंची, EBITDA 88 प्रतिशत बढ़कर ₹66 करोड़ हो गई और PAT 160 प्रतिशत उछलकर ₹29 करोड़ पर आई. मैनेजमेंट इसे स्केल विस्तार, बेहतर कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन, इंटीग्रेटेड सुविधाओं और समृद्ध प्रोडक्ट मिक्स यानी लैमिनेटेड, इंसुलेटेड ग्लास (IG), फ़ायर-रेटेड और बुलेट-रेज़िस्टेंट प्रोडक्ट की तरफ़ बढ़ने से जोड़ता है. दुबई और रास अल ख़ैमाह में इसके UAE ऑपरेशन GCC, मिडिल ईस्ट, अफ़्रीका और यूरोप के बाज़ारों में सप्लाई करते हैं.
जोख़िम अभी भी बने हैं. डेट-टु-इक्विटी क़रीब 1.3 गुना है. बिज़नेस के आकार के हिसाब से रिसीवेबल ज़्यादा हैं. कैश फ़्लो उतार-चढ़ाव भरा रहा है, हालांकि फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में सुधार हुआ. यह एक पोस्ट-रीस्ट्रक्चरिंग, एक्विज़िशन से चला टर्नअराउंड है. असली परीक्षा यह है कि क्या यह साइकिल के उतार-चढ़ाव में बेहतर मार्जिन को स्थिर कैश फ़्लो में बदल पाती है.
यह स्क्रीन असल में क्या बताती है
लगातार ग्रोथ एक ही चीज़ नहीं होती.
Eternal के लिए यह प्लेटफ़ॉर्म के विस्तार और क्विक कॉमर्स के उभार को दर्शाती है. KPI Green के लिए यह भारत के रिन्यूएबल एनर्जी के निर्माण को. Sejal Glass के लिए यह एक्विज़िशन, यूटिलाइज़ेशन और कंस्ट्रक्शन की मांग को.
यह स्क्रीन इसलिए काम की है क्योंकि यह उन कंपनियों को छांट देती है जो सिर्फ़ एक-दो तिमाहियों में अच्छी दिखी थीं. लेकिन यह अधूरी है. यह नहीं बता सकती कि ग्रोथ ऑर्गेनिक है या एक्विज़िशन से, यह कैश में तब्दील होती है या नहीं, बैलेंस शीट इसे टिकाए रखने का बोझ उठा सकती है या नहीं, और जिस साइकल ने इसे चलाया वह अभी भी बरकरार है या नहीं.
यही वह काम है जो यह स्क्रीन आपसे करने को कह रही है.
क्या आपको इनमें से किसी कंपनी में निवेश करना चाहिए?
लगातार बढ़ने वाली कंपनियां खोजना पहला क़दम है. यह समझना कि वह ग्रोथ टिकाऊ है या नहीं, कैश से समर्थित है या नहीं, और सही क़ीमत पर मिल रही है या नहीं, यह कठिन हिस्सा है और यही तय करता है कि आप पैसा बनाएंगे या नहीं.
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