सीधी बात

निवेश की कला और उसकी कुछ बारीक़ बातें

मॉर्गन हाउज़ल की क़िताब 'धन--संपत्ति का मनोविज्ञान' से सबसे रोचक बातें

मॉर्गन हाउज़ल की क़िताब 'धन--संपत्ति का मनोविज्ञान' से सबसे रोचक बातें


अच्छे इक्विटी मार्केट का एक असर ये भी हुआ है कि उससे जुड़ी बहुत सी क़िताबें बाज़ार में आ गई हैं। हर क़िताब ये दावा करती है कि उसके 250 पन्ने पढ़ने के बाद, निवेश नाम की सोने से भरी हांडी आपके नाम हो जाएगी। निवेश की क़िताबों के इस समंदर में, एक ऐसे मोती को तलाशना जो नायाब हो, और मौजूदा बुल-रन के ख़त्म होने के बहुत बाद भी क्लासिक क़िताबों में शुमार रहे, जिसे आप अपनी बुक-शेल्फ़ पर हमेशा रखना चाहें, ये एक विरली सी बात है। मगर जिसकी मैं बात कर रहा हूं वो ऐसी ही एक क़िताब है। मॉर्गन हाउज़ल की, 'धन-संपत्ति का मनोविज्ञान' (The Psychology of Money). लेखक, स्तंभकार और कोलैबोरेटिव फ़ंड के पार्टनर, मॉर्गन हाउज़ल ने कई क़िताबें लिखी हैं जिनकी परिपक्वता, उनकी अपनी उम्र से कहीं ज़्यादा लगती है।

पर्सनल फ़ाइनांस पर अपना नज़रिया पेश करते हुए हाउज़ल इस बात पर ज़ोर देते हैं, कि यहां 'फ़ाइनांस' से ज़्यादा 'पर्सनल' महत्वपूर्ण है। "आर्थिक सफलता कोई मुश्किल विज्ञान नहीं है। ये एक आसान कला है, जहां आप क्या जानते हैं इससे ज़्यादा महत्वपूर्ण है, कि आपका व्यवहार कैसा है।" जो लोग निवेश के नाम से डरते हैं, उनके कानों के लिए ये किसी मधुर संगीत जैसा होना चाहिए। हाउज़ल इसे "धन-संपत्ति का मनोविज्ञान कहते हैं।"

आपका निजी अनुभव तय करता है निवेश पर आपका रुख क्या होगा
हाउज़ल एक प्वाइंट उठाते हैं कि हर किसी का (और पीढ़ी का) धन को लेकर एक ख़ास रवैया होता है, जो उनके बचपन की आर्थिक परिस्थितियों से उपजता है। वो कहते हैं कि निवेश के चुनाव और रिस्क को लेकर लोगों की पसंद-नापसंद बहुत अलग तरह की होती है। दुनिया के तौर तरीक़ों पर किसी एक व्यक्ति के निजी अनुभव शायद ही कोई असर करते हों, मगर हर किसी के अनुभव दुनिया के बारे में उसका नज़रिया ज़रूर तय करते हैं। हाउज़ल कहते हैं, "कुछ बातें समझने के लिए हमें सबक़ की ज़रूरत होती है"। 2006 में, दो अर्थशास्त्रियों ने, ये देखने के लिए कि अमेरिकी अपने पैसे से क्या करते हैं, पिछले 50 साल के "कन्यज़ूमर फ़ाइनांस सर्वे" का अध्यन किया। उन अर्थशास्त्रियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "हमारा अध्यन ये बताता है कि कोई निवेशक कितना रिस्क लेता है, ये उसके निजी इतिहास पर निर्भर करता है" - दूसरे शब्दों में - ये सिर्फ़ "क़िस्मत की बात है कि आप कहां और कब पैदा होते हैं"।

जो लोग महंगाई के दौरान जन्म लेते हैं, वो उन लोगों के मुक़ाबले अलग तरह से बॉंड में निवेश करेंगे, जो तब पैदा हुए जब महंगाई दर बहुत कम रही। हमारा रिस्क लेने के प्रति रवैया वित्तीय स्प्रैडशीट के मॉडल पर निर्भर नहीं करता है कि उसमें क्या लिखा है, और जो एक निवेशक को तर्कसंगत दिखाई देगा और दूसरे को बहुत ज़्यादा रिस्क वाला। इस द्वंद्व में 'वाजिब' (reasonable) लगने वाली बात 'तर्क-संगत' (rational) बात से बाज़ी मार लेती है।

क़िस्मत और रिस्क एक ही सिक्के के दो पहलू हैं
हाउज़ल अपने एक सवाल के जवाब में नोबल पुरस्कार विजेता रॉबर्ट शिलर का जवाब लिखते हुए कहते हैं, "आप निवेश के बारे में ऐसा क्या जानते हैं जो हम नहीं जानते?" शिलर इसके जवाब में कहते हैं: "सफल नतीजे में क़िस्मत का सही रोल"।

भविष्य अनजाना है। कोई भी स्ट्रैटजी शत-प्रतिशत काम नहीं कर सकती। सफलता के लिए स्किल या रिस्क लेने की क्षमता को बहुत ज़्यादा श्रेय दिया जाता है और असफलता के लिए ग़लत निर्णयों को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है। मगर इन्हें अलग करना मुश्किल है। 2006 में - ज़करबर्ग ने याहू के फ़ेसबुक ख़रीदने का $1 बिलियन का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। ये फ़ैसला सही साबित हुआ, और इसके लिए ज़करबर्ग को जीनियस कहा गया। उसी याहू ने माइक्रोसॉफ़्ट को ख़रीदने का प्रस्ताव ठुकरा दिया। याहू के लिए इसका नतीजा बिल्कुल ही अलग था और इस बात के लिए उसके मैनेजमेंट को बेवकूफ़ क़रार दिया जाता है। हाउज़ल के मुताबिक़ जब हम रोल मॉडल तलाश रहे होते हैं, तो हमें सफल व्यक्तियों को तलाशने की इच्छा पर रोक लगानी चाहिए - इसके बजाए बुनियादी पैटर्न पर ध्यान देना चाहिए, जहां लगातार सफलता हासिल की गई हो। जहां बड़े-बड़े नतीजे ख़बरों में छाए रहते हैं, औसत प्रदर्शन ज़्यादा दोहराया जा सकता है, और औसत नतीजों वाले ट्रेंड निवेशक के लिए ज़्यादा काम की जानकारी देते हैं।

गोल पोस्ट को मत छेड़िए
वो क्या बात थी जिसके चलते जाने-माने, और अपनी इंडस्ट्री में टॉप पर रहने वाले, बेहद सफल निवेशक, रजत गुप्ता ने इनसाइडर ट्रेडिंग की? जिन लोगों के साथ वो उठते-बैठते थे, उनके मुक़ाबले जो उनके पास था - उसके नाकाफ़ी होने का एहसास। उसके साथ तुलना करना जिसके पास आपसे ज़्यादा है दुखी रहने की पक्की रेसिपी है क्योंकि कोई न कोई तो ऐसा होगा ही जिसके पास आपसे ज़्यादा होगा। "खुशी नतीजों से अपेक्षा न रखने का नाम है"। जब एक आर्थिक गोल के उस स्तर को हासिल कर लिया जाता है जो आपकी आरामदायक ज़िंदगी के लिए काफ़ी है, तो आपको अपना टार्गेट बदलना नहीं चाहिए।

हाउज़ल कंपाउंडिंग की ताक़त का भी ज़िक्र करते हैं, जहां ग्रोथ की नॉन-लीनियर नेचर से, वक़्त के साथ थोड़ी सी पूंजी भी बहुत बड़ी हो सकती है। वो कहते हैं कि बहुत ज़्यादा रिटर्न हासिल करने के बजाए, लंबे वक़्त में लगातार रिटर्न पाने से से "फ़ाइनेंशियल अनब्रेकेबिलिटी" या आर्थिक मज़बूती हासिल की जा सकती है। जब फ़ाइनेंशियल प्लान बना रहे हों, तो ये ज़रूरी है कि उस समय के लिए भी सोचा जाए, जब फ़ाइनेंशियल प्लान काम नहीं करे। सफल निवेश तब होता है जब आप सेफ़्टी का मार्जिन ले कर चलें ताकि जब प्लान गड़बड़ हो जाए तो आपकी लंबी अवधि के निवेश में रुकावट न आए - क्योंकि ये तो होना ही है। हाउज़ल इस बात की ज़रूरत पर ज़ोर देते हैं कि अगर आपको रेस में बने रहना है तो रिज़र्व में इतना ईंधन रखना ही चाहिए कि जब बहुत उतार-चढ़ाव आएं, तो निवेशकों को सबकुछ गंवा कर बाहर न होना पड़े, और वो कभी दोबारा इस रेस में शामिल ही न हो पाएं।

हाउज़ल निवेशकों के लिए "एक बार-बैल जैसी पर्सनैलिटी" पर ज़ोर देते हैं - जहां आप भविष्य को लेकर आशावादी रहें, पर "जो आपको भविष्य में रोक सकता है उसे लेकर आपको डर भी होना चाहए "। वो ऐसा समझाने के लिए कहते हैं कि अक्सर सफल बिज़नस करने वाले, रिस्क लेने की वजह से सबकुछ गंवा बैठते हैं। पैसा बनाना और उसे बनाए रखना, दो अलग तरह की कलाएं हैं - पैसा बनाने के लिए दुनिया का सकारात्मक नज़रिया रखने की ज़रूरत होती है और साथ ये विश्वास बनाए रखने की ज़रूरत होती है कि मुश्किलें अपने आप सुलझ जाती हैं। पैसा बनाए रखने के लिए अनजान बातों को लेकर एक तरह का डर बना रहना ज़रूरी होता है कि आपके बनाए बेस्ट-प्लान को बिगड़ सकते हैं। ये ज़रूरत विरोधाभासी है, और यही विरोधाभास ही लोगों की आर्थिक आज़ादी के रास्ते में रोड़ा बन जाता है।

हाउज़ल अपनी आमदनी के भीतर ही जीवन चलाने - और बिना किसी 'गोल' के बचत करने पर ज़ोर देते हैं, क्योंकि बचाया हुआ पैसा ही आपकी ये क्षमता तय करता है कि वो अपना वक़्त कैसे गुज़ारेगा - और ये बात सबसे ज़रूरी है!

जो कुछ भी हाउज़ल ने लिखा है, वो पहले भी लिखा जा चुका है। मगर जिस तरह से वो हर बात को अपनी कहानी में एक साथ पिरो पाए हैं, वो सच में अद्भुत है। वो बताते हैं कि निवेश के ऐसे फ़ैसले लेना क्यों सही है, जो आपको रात में अच्छी नींद लेने में मदद करते हैं। बजाए ज़्यादा-से-ज़्यादा फ़ायदे हासिल करने के किसी ख़याली गोल के लिए की दिन-रात एक किया जाए। अपने पास कैश बचा कर रखना मज़बूती देता है, उतार-चढ़ाव के वक़्त में निवेश को बनाए रखने की क़ाबिलियत ये पक्का करती है कि कंपाउंडिंग अपना काम करती रहे। बहुत ज़्यादा रिस्क वाली स्ट्रैटजी की कोई ज़रूरत नहीं है, और किसी बहुत सफल व्यक्ति के साथ अपनी तुलना करने की भी कोई ज़रूरत नहीं है - जब खुश रहने के लिए सिर्फ़ उतने ही धन की ज़रूरत है, जितने धन के होने पर आप अपने जीवन में वो कर सकें, जो आप करना चाहते हैं। ये क़िताब अक्सर और कई बार पढ़ी जाने के लायक है।

ये लेख पहली बार नवंबर 22, 2021 को पब्लिश हुआ.

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