Anand Kumar/AI-Generated Image
15 अक्तूबर से UPI मर्चेंट के लिए मुफ़्त नहीं रहेगा. आपके लिए मुफ़्त ही रहेगा. अगर आपको बस इतना ही जानना था, तो यहीं रुक जाइए.
UPI से एक लाख रुपए किसी म्यूचुअल फ़ंड में डालिए, तो फ़ीस बनती है ₹24. ये फ़ीस फ़ंड हाउस भरता है. आप नहीं. UPI AutoPay से चलने वाले SIP पर कुछ भी नहीं लगता.
आप तक ये ख़र्च सिर्फ़ एक ही सूरत में पहुंच सकता है. अगर फ़ंड हाउस इसे ख़ुद न उठाएं और एक्सपेंस रेशियो में जोड़ दें. Capitalmind ने इसका हिसाब लगाया है. मान लीजिए किसी फ़ंड में आने वाले पैसे का 10वां हिस्सा UPI से आता है. तो आपके एक लाख पर साल में क़रीब दो रुपए ज़्यादा लगेंगे.
जी हां, सही पढ़ा-दो रुपए.
अब देखिए कि आप पहले से क्या दे रहे हैं. एक आम फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड अपने रेगुलर प्लान पर साल में 2.07 प्रतिशत लेता है. उसी एक लाख पर ये ₹2,070 बनता है. हर साल. रोज़ाना इतने छोटे-छोटे हिस्सों में कटता है कि पता ही नहीं चलता. एक अग्रेसिव हाइब्रिड ₹2,210 ले लेता है. इस पर कोई WhatsApp मैसेज फ़ॉरवर्ड नहीं करता.
हम किसी ख़र्च को इस बात से आंकते हैं कि वो कितने शोर के साथ आया है, इस बात से नहीं कि वो हमसे कितना ले जाता है. एक्सपेंस रेशियो कभी अपना ऐलान नहीं करता. इस फ़ीस ने कर दिया. इसलिए ये बड़ी लगती है. जबकि है नहीं.
उसी फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड का डायरेक्ट प्लान 0.86 प्रतिशत लेता है. वही फ़ंड, वही मैनेजर, वही पोर्टफ़ोलियो और ₹2,070 की जगह ₹860. प्लान बदलने से हर एक लाख पर आपके साल के ₹1,210 बचते हैं. ये ख़बरों में छाई उस फ़ीस से छह सौ गुना है और ये फ़ैसला आप आज दोपहर ही कर सकते हैं.
एक जगह ये तसल्ली काम नहीं करती. UTI Nifty 50 Index का डायरेक्ट प्लान साल में 0.18 प्रतिशत लेता है. कुछ इंडेक्स फ़ंड तो सिर्फ़ 0.05 प्रतिशत लेते हैं. इतने छोटे ख़र्च के सामने 0.02 प्रतिशत फ़ंड के पूरे ख़र्च का 10वां हिस्सा बन जाता है. फ़ंड हाउस इसका कुछ हिस्सा ख़ुद उठा सकते हैं. ज़्यादा नहीं. गुंजाइश सबसे कम इंडेक्स फ़ंड के पास ही है.
ब्रोकर्स की शिकायत वाजिब है. बस वो आपकी शिकायत नहीं है. अपने ब्रोकर को मार्जिन के तौर पर ₹5 लाख भेजिए, ऐसे सौदे पर जिसमें आपका ख़र्च ₹20 है और ब्रोकर को उस ट्रांसफ़र पर ₹100 देने पड़ते हैं. ये लड़ाई ब्रोकर ख़ुद लड़ लें.
नेट बैंकिंग पर भी लौटने की ज़रूरत नहीं. उस तरह के ट्रांसफ़र पर बरसों से ₹3 से ₹14 तक ख़र्च आता रहा है. इन पाइपों का पैसा हमेशा कोई भरता रहा है. अब तक सरकार भर रही थी. साल में ₹20,000 करोड़.
तो बात ये है: SIP बंद न करें. 15 तारीख़ को देखकर एकमुश्त निवेश का वक़्त तय न कीजिए. अगर आपके पास इंडेक्स फ़ंड हैं, तो अगली बार एक्सपेंस रेशियो छपने पर उसे देख लीजिए. और अगर आपके पास रेगुलर प्लान है, तो आज ही उसका डायरेक्ट वर्ज़न देखिए. वहां जो पैसा बचेगा, वो ख़बरों वाले पैसे से हज़ार गुना है.
इस स्टोरी में जिन एक्सपेंस रेशियो का ज़िक्र है
कैटेगरी के हिसाब से मीडियन एक्सपेंस रेशियो, Value Research के आंकड़े, 16 सितंबर 2026 तक.
| कैटेगरी | रेगुलर | डायरेक्ट |
|---|---|---|
| इक्विटी: फ़्लेक्सी कैप | 2.07% | 0.86% |
| इक्विटी: मल्टी कैप | 2.18% | 0.93% |
| इक्विटी: फ़ोकस्ड | 2.20% | 1.05% |
| इक्विटी: मिड कैप | 1.54% | 0.77% |
| इक्विटी: स्मॉल कैप | 1.73% | 0.74% |
| हाइब्रिड: अग्रेसिव हाइब्रिड | 2.21% | 1.09% |
| हाइब्रिड: डाइनैमिक एसेट एलोकेशन | 2.30% | 1.00% |
| हाइब्रिड: मल्टी एसेट एलोकेशन | 1.81% | 0.62% |
| Value Research इंडेक्स फ़ंड की अलग कैटेगरी नहीं रखता. इंडेक्स फ़ंड इक्विटी कैटेगरी के अंदर ही आते हैं. इक्विटी: लार्ज कैप का पैसिव हिस्सा 0.05 प्रतिशत (डायरेक्ट) से शुरू होकर ऊपर जाता है. | ||
यह भी पढ़िएः UPI MDR: ₹2,000 से ज़्यादा भुगतान पर लगेगा चार्ज? जानें नियम





