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म्‍यूचुअल फंड कंपनियों का इनोवेशन

ज्‍यादातर नए म्‍यूचुअल फंड कंपनियों की बिजनेस ज़रूरतों के लिए लांच किए जा रहे हैं। निवेशकों पुराने और खुद को साबित कर चुके फंड के साथ बने रहना चाहिए

ज्‍यादातर नए म्‍यूचुअल फंड कंपनियों की बिजनेस ज़रूरतों के लिए लांच किए जा रहे हैं। निवेशकों पुराने और खुद को साबित कर चुके फंड के साथ बने रहना चाहिए

ऐसा लगता है कि भारतीय म्‍यूचुअल फंड निवेशक पिछले कुछ सालों से एक स्‍वर्णिम दौर से गुजर रहे हैं। यह दौर म्‍यूचुअल फंड कंपनियों द्वारा किए जा रहे इनोवेशन की वजह से आया है। इनोवेटिव और नए तरह के म्‍यूचुअल फंड लगातार लांच किए जा रहे हैं। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि आम लोगों की निवेश जरूरतों को सरल, बोरिंग पुराने फंड के बजाए नए तरह के फंड के जरिए पूरा किया जाए,जो सबके लिए कहीं ज्‍यादा बेहतर तरीके से काम करेगा।

क्‍या यह सही है? या इस कहानी में बात कुछ और है? फाइनेंशियल सर्विस इंडस्‍ट्री के लिए इनोवेशन का क्‍या मतलब होता है, इसके बारे में जो लोग पिछले काफी समय से परिचित हैं वे इसे थोड़ा शक की निगाह से देखते हैं। हालांकि इनोवेशन की इस लहर के पीछे के इरादे पर और ज्‍यादा बात बाद में, पहले यह देखते हैं कि निवेशकों के लिए इसका वास्‍तव में क्‍या मतलब है ?

ऐसा ही एक इनोवेशन है स्‍मार्ट बीटा फंड। ये एक पैसिव फंड है, जो वास्‍तव में पैसिव नहीं है। सुनने में ऐसा लगता है कि इस फंड को बनाने में कोई बड़ा वैज्ञानिक रिसर्च किया गया है। इसलिए बहुत से निवेशक इसके बारे में जानना चाहते हैं। कुछ समय से पैसिव फंड एक बड़ी हाइप वेव के लिहाज से फोकस में रहे हैं और यह वेव और मजबूत हो रही है। अगर आप फाइनेंशियल मीडिया और सोशल मीडिया के निवेश से जुड़े हिस्‍से पर नजर डालें तो ऐसा लगेगा कि पैसिव फंड के सेगमेंट में क्रांति का दौर है। ज्‍यादातर AMC के पास पैसिव फंड का एक बड़ा बुके है और नए पैसिव फंड लांच करने की होड़ है। कुछ AMC ने तो पूरी तरह से ऐसे फंड पर फोकस करना शुरू कर दिया है और एक नई AMC लांच हुई है, जिसने 100 फीसदी पैसिव होने का वादा किया है।

हालांकि पैसिव फंड का तर्क पश्चिमी बाजारों से आयातित है और यह इक्विटी निवेशकों को ज्‍यादा अपील नहीं करता। पैसिव फंड मैसेज देता है ‘आप चाहे जितना प्रयास कर लें आप बाजार से बेहतर नहीं कर सकते, ऐसे में आप प्रयास भी न करें। मार्केट रिटर्न से संतुष्‍ट रहें जो एक इंडेक्‍स के बराबर है’। इक्विटी निवेशक आशावादी और निवेश के लिहाज से आक्रामक नजरिया रखते हैं। ऐसे में उनके लिए पैसिव फंड में कुछ खास नहीं है। कैटेगरी के तौर पर, पैसिव फंड मजबूती से उभरा है लेकिन इसकी बड़ी वजह EPFO का इन्‍फलो है। इसमें रिटेल इन्‍वेस्‍टर्स की भागीदारी कम रही है।

ऐसा लगता है कि म्‍यूचुअल फंड कंपनियों ने इसका एक रास्‍ता निकालना है। यह रास्‍ता है पैसिव लेकिन थोड़ा एक्टिव फंड। स्‍मार्ट बीटा फंड इसका सटीक उदाहरण हैं। ये फंड एक इंडेक्‍स पर बेस्‍ड हैं लेकिन इसमें थोड़ा पेंच है। ये कंपनियां जाने -माने इंडेक्‍स जैसे सेंसेक्‍स या निफ्टी का बेस कंपोजीशन लेती हैं लेकिन इसके बाद इसमें थोड़ा बदलाव करती हैं। जैसे ये मार्केट कैप के बजाए सभी स्‍टॉक्‍स को बराबर वेट असाइन कर सकती हैं। या ये खुद को एक तिहाई स्‍टॉक्‍स तक सीमित करके बेस्‍ट P/E रख सकती हैं और समय-समय पर रीकंपोज कर सकती हैं। ये सभी कंपनियां ऐसे फैक्‍टर की पहचान करती हैं,जो ओरिजनल इंडेक्‍स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को बढ़ावा देते हैं और इसके बाद इन फैक्‍टर में बदलाव करती हैं।

इनमें से कोई भी सुनने में अच्‍छा लगता है लेकिन सवाल यह है कि क्‍या ये बेस इंडेक्‍स की तुलना में बेहतर प्रदर्शका का अनुमान लगा सकते हैं। माना जाता है कि फंड इस सवाल का जवाब हिस्‍टोरिक डाटा पर फंड के आइडिया को टेस्‍ट करते हुए देता है।

असल समस्‍या यह है कि ऐसे फंड पैसिव फंड नहीं बल्कि एक्टिव फंड हैं। किसी के दिमाग में एक आइडिया आया और उसने इसको दुरूस्‍त किया। क्‍या ये पैसिव फंड के मूल विचार में फिट होते हैं? साफ तौर पर नहीं? मेरे मूल सवाल का जवाब यह है कि ऐसे फंड की जड़े निवेशकों की जरूरतों में नहीं बल्कि फंड कंपनी की बिजनेस जरूरतों में हैं। कंपनियां निवेशकों को पुराने और स्‍थापित फंड के बजाए नए आइडिया पर बेस्‍ड नए फंड बेचने पर फोकस करती हैं।

यह नहीं, सेबी के नए फंड कैटेगराइजेशन सिस्‍टम के तहत कोर कैटेगरी में एक से अधिक फंड नहीं लांच किया जा सकता है। ऐसे में कंपनियां स्‍पेशलाइज्‍ड कैटेगरी में इस तरह का इनोवेशन कर रही हैं।

निवेशकों की वास्‍तविक जरूरतें अच्‍छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले सरल, स्‍थापित फंड चुन कर इनमें लगातार निवेश करके ज्‍यादा बेहतर तरीके से पूरी हो सकती हैं।

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