हाऊस वॉयस

'पैसिव फंड्स को लेकर मचा शोर अपने आप ख़त्म हो जाएगा'

जॉर्ज हेबर जोसफ़, सीईओ और सीआईओ, आईटीआई म्यूचुएल फ़ंड, इंडस्ट्री से जुड़े अहम सवालों के जवाब दे रहे हैं

जॉर्ज हेबर जोसफ़, सीईओ और सीआईओ, आईटीआई म्यूचुएल फ़ंड, इंडस्ट्री से जुड़े अहम सवालों के जवाब दे रहे हैं


रेग्युलेटर का ख़र्च के स्लैब को रिवाइज़ करना, पैसिव इन्वेस्टिंग पर ज़ोर होना, और कई नई AMCs का आना, इन कारणों से ख़र्च पर और ज़्यादा फ़ोकस बढ़ जाता है। क्या आप मानते हैं कि बिज़नस को मुनाफ़े में रखते हुए, ख़र्च (एक्सपेंस रेशियो) के मौजूदा स्तर को घटाए जाने की संभावना है?

बिज़नस चलाने के दौरान आपको ख़र्च पर क़ाबू रखना चाहिए। रेग्युलेटर द्वारा एक्सपेंस रेशियो को ठीक किया जाना एक अच्छी पहल है, इससे नए लोगों को बिज़नस में आने में मदद मिलेगी। अगला दशक अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर कमाई और ग्रोथ (अर्निंग-ग्रोथ) में बदलाव का दौर होगा, और धन की मौजूदगी में भी कमी आएगी। इसलिए, मुझे भरोसा है कि उस दौर में पैसिव-फ़ंड, एक्टिव-फ़ंड के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। तब, पैसिव के आसपास का सारा शोर अपने आप खत्म हो जाएगा।

बड़ी AMCs के लिए, उनकी बड़ी-बड़ी ब्रांच के बुनियादी ढांचे को कम कर, लागत घटाने की काफ़ी गुंजाइश है। हमारे जैसे नए AMC में, हमें बुनियादी ढांचा स्थापित कर बिज़नस खड़ा करना होगा, जिसका मतलब है कि डिस्ट्रीब्यूटर्स और इन्वेस्टर्स को साथ लाने की ख़र्च उठाना होगा।

कई लोग आजकल सीधे स्टॉक ख़रीद कर इक्विटी में निवेश कर रहे हैं। स्मॉलकेस जैसे नए प्लेटफ़ॉर्म इसे और आसान बना रहे हैं। आप म्यूचुअल फ़ंड के बिज़नस पर इसका क्या असर देखते हैं? क्या ये बदलाव फ़ंड इंडस्ट्री की ग्रोथ के लिए एक चुनौती पेश कर सकता है?

पिछले 10 साल में सारा खेल, उपभोक्ता की प्रमुखता वाले क्षेत्रों में वैल्यू बढ़ाने (उपभोक्ता फ़ाइनांस, उपभोक्ता रिटेल, उपभोक्ता स्टेपल) को लेकर था। इसलिए, एक्विट फ़ंड मैनेजमेंट का कोई मतलब नहीं था। अगर आप वैल्यूएशन की परवाह किए बिना इन सेक्टरों में बने रहते, तो निवेशकों की नजर में आप सफल थे। ये स्थिति इसलिए हुई, क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन नहीं रही थी और अर्थव्यवस्था से जुड़े ज़्यादातर कोर सैक्टर ख़राब प्रदर्शन कर रहे थे, इसलिए ऊपर बताए गए क्षेत्रों के अलावा अन्य क्षत्रों में निवेश करने का मौक़ा ही नहीं मिला।

साथ ही, पिछले 10 साल में ग्लोबल सैंट्रल बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर लीक्विडिटी बढ़ाने और पैसे छापने से मूल्यांकन के पैमानों को लेकर अव्यवस्था खड़ी कर दी है। अब तक निवेश का बड़ा हिस्सा, बहुत थोड़े से सैक्टर्स में सीमित रहा है और उसी से इन सैक्टर्स का वैलुएशन बहुत ज़्यादा हो गया है। ये सब आर्थिक वैलुएशन के सिद्धांतों के मुताबिक़ है। मुझे पक्का भरोसा है कि अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा जल्द ही संभावित कटौती के साथ, पूरा समीकरण उलट सकता है, और मौजूदा वैलुएशन जो कि असामान्य वैलुएशन है, वो फिर से सामान्य हो जाएगा। ये बात एक्टिव तरीक़े से मैनेज किए जाने वाले म्यूचुअल फ़ंड और प्रोफ़ेशनल फ़ंड के मैनेजमेंट को बहुत मूल्यवान बना देगा।

जब मुफ्त पैसा इधर-उधर फैला हुआ हो और पैसे का कोई मूल्य ही न हो, तब मोमेंटम काम करता है और इक्विटी में सीधे निवेश करने वाले लोगों को चार्ट और मोमेंटम इंडिकेटर्स देखकर पैसा कमाना बहुत आसान लगता है। लेकिन इस तरह की सोच आने वाले समय में धराशायी हो जाएगी क्योंकि ख़रीदारी मौलिक रिसर्च या वैलुएशन के सिद्धांतों पर नहीं की गई। जैसा कि वॉरेन बफ़ेट कहते हैं, "जब ज्वार निकल जाता है तभी आपको पता चलता है कि कौन बिना कपड़ों के तैर रहा था।"


रैपिड-फ़ायर सैक्शन:
निवेश गुरु/ मैनेजर जिसे आप सबसे ज़्यादा पसंद करते हैं: चार्ली मंगर और हावर्ड मार्क्स
वो बिज़नस लीडर जिसकी तरह आप होना चाहेंगे: वॉरेन बफ़ेट
अब तक का सबसे सफल फ़ाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट जो आपने किया: स्टॉक में निवेश करके
आपका मनी-मंत्र क्या है: पैसा मत गंवाओ और पैसा बनाओ, ये याद रखते हुए कि मार्केट/ बिज़नस/ एसेट क्लास सभी कुछ बहुत बड़े पैमाने पर, तेज़ी या मंदी के दौर से गुज़र सकते हैं।
अगर आप मनी मैनेजर नहीं होते, तो क्या होते: फ़्रीलांस निवेशक और युवाओं के लिए वैल्यू इन्वेस्टिंग का टीचर

ये लेख पहली बार दिसंबर 13, 2021 को पब्लिश हुआ.

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