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लिंच बनाम बफ़ेट? फ़ेक न्यूज़!

ये स्टोरी सोशल मीडिया में काफ़ी घूमी, मगर पीटर लिंच और वॉरेन बफ़ेट के बीच पैसिव इन्वेस्टिंग पर विवाद की बात फ़ेक न्यूज़ है

लिंच बनाम बफ़ेट? फ़ेक न्यूज़!


लिंच बनाम बफ़ेट। निवेश पर ऐसा आर्टिकल मज़ेदार लगेगा ही। इसी शीर्षक से एक आर्टिकल एक ऐसी बिज़नस न्यूज़ वेबसाइट ने छापा, जिन्होंने हेडलाइन बनाने की कला में महारत हासिल कर ली है। उन्होंने कुछ इस तरह लिखा, - लेजेंडरी इन्वेस्टर पीटर लिंच ने वॉरेन बफ़ेट से उलटे बयान में कहा, निवेशक पैसिव फ़ंड चुन कर कुछ खो रहे हैं, और बेस्ट फ़ंड मैनेजरों का पक्ष लेते हुए कहा कि वो मार्केट से बेहतर प्रदर्शन करना जारी रखें।”
इस हेडलाइन को गूगल न्यूज़ ने उठा लिया और इसे फ़ॉर्वर्ड किया गया, फिर इसे ट्वीट किया जाने लगा और फिर ये बात तब तक बार-बार ट्वीट होती रही, जब निवेश की ख़बरों को फ़ॉलो करने वालों में ये ख़बर एक बड़े विवाद जैसी नहीं बन गई। इस ख़बर से ऐसा लगा कि दो महान निवेशकों में बहुत बड़ी बहस हो गयी है। लिंच और बफ़ेट के बीच कोई ज़बर्दस्त बहस हुई है, जिसमें शामिल लिंच के फ़ैन एक्टिव-एक्टिव-एक्टिव चिल्ला रहे थे, और बफ़ेट के फ़ैन पैसिव-पैसिव-पैसिव का शोर मचा रहे थे।
मगर, असलियत इतनी रोमांचकारी कतई नहीं थी। बस इतना हुआ था कि बॉस्टन के एक इनवेस्टमेंट-पॉडकास्ट ने पीटर लिंच का एक छोटा सा इंटरव्यू किया था। इस बातचीत, बॉस्टन कॉलेज के आर्ट कलेक्शन के लिए लिंच के प्राइवेट कलेक्शन से यू.एस. $20 मिलियन की एक पेंटिग को दान किए जाने के बारे में थी। क़रीब-क़रीब ये पूरा इंटरव्यू इस पेंटिंग और कला पर था, और कुछ बातें इस बारे में थीं, कि 77-साल के हो चले लिंच के अब 10 नाती-पोते हैं और उन्होंने अपने परिवार के लिए क्रिसमस प्रेज़ेंट्स की सारी शॉपिंग कर ली है।
इस सबके बीच एक सवाल पैसिव इन्वेस्टिंग की और बढ़े रुझान पर लिंच की राय जानने को लेकर था। लिंच ने इसका बहुत छोटा सा जवाब ये कहते हुए दिया, कि निवेशक पैसिव इन्वेस्टिंग से मौक़े को गंवा रहे हैं और सबसे अच्छे एक्टिव मैनेजरों का सबसे आगे बने रहने का अब तक रिकॉर्ड बहुत शानदार रहा है, जिसकी तुलना नहीं की जा सकती। इसके लिए उन्होंने फ़िडेलिटी और दूसरे फ़ंड मैनेजरों के कुछ उदाहरण भी दिए। लिंच ने बस इतना ही कहा। ज़ाहिर है, उनकी बात में वॉरेन बफ़ेट का कोई ज़िक्र नहीं था। तो ये ‘बफ़ेट से ब्रेक’ की हेडलाइन ग़लत और सिर्फ़ एक मनगढ़ंत थी। ये हैडलाइन मछली पकड़ने के चारे जैसी थी जिससे लोगों का ध्यान खींचा जा सके, ठीक वैसे ही जैसी आजकल की ज़्यादातर हेडलाइन होती हैं।
इसकी तह में जाएं तो पाएंगे कि ये एक सरल सी बात है। पीटर लिंच इतिहास के सबसे सफल-13 साल में 29% का रिटर्न हासिल करने वाले-एक्टिव फ़ंड मैनेजर रहे, जब वो मैगलन फ़ंड जैसा बहुत बड़ा फ़ंड चला रहे थे। ध्यान देने वाली बात ये भी है कि वॉरेन बफ़ेट भी, असल में एक एक्टिव फ़ंड मैनेजर ही हैं। हालांकि टेक्निकली देखा जाए तो वो ‘निवेश फ़ंड’ कहे जाने वाला कोई फ़ंड नहीं चलाते हैं। पर अपने काम के तरीक़े में, बर्कशायर हैथवे, बफ़ेट के लिए एक निवेश का ज़रिया है जिसमें चार्ली मंगर और कुछ दूसरे लोग उसके फ़ंड मैनेजर हैं। इसका स्वरूप फ़ंड जैसा भले ही नहीं है, मगर एक पब्लिक कॉर्पोरेशन के तौर पर तो इस ‘फ़ंड’ के ज़रिए निवेश करने का एक ही तरीक़ा है कि आप एक शेयरहोल्डर हों। यक़ीनन बफ़ेट और मंगर दोनों अपने निवेश का एक्टिव मैनेजमेंट करते हैं।
अब सवाल आता है, बफ़ेट की पैसिव इन्वेस्टिंग के पक्ष में कही बातों का। उन्होंने पहले कई बार ये कहा है कि वॉल-स्ट्रीट के प्रोफ़ेशनल फ़ंड मैनेजर बहुत ज़्यादा फ़ीस लेते हैं और इन ख़र्चौं के बावजूद आम इन्डेक्स से कम रिटर्न देते हैं। इसलिए, ये बेहतर ही होगा कि निवेशक कम ख़र्च वाले इंडेक्स फ़ंड में निवेश करें। इस बात के सही होने में किसी को ज़रा भी शक़ नहीं होना चाहिए। पीटर लिंच का ये मानना है कि सबसे अच्छे फ़ंड मैनेजर उसी इंडैक्स में बहुत बेहतर प्रदर्शन करते हैं और वो ऐसा लगातार करते रहे हैं। ये बात भी बिल्कुल सही है। इन दोनों ही बातों में कोई विरोधाभास नहीं है। मुश्किल तो फ़ंड के चुनाव में है।
अमेरिका में, पैसिव इन्वेस्टिंग की शुरुआत ही जॉन बोगल ने अपने वैनगार्ड फ़ंड से की थी और इसका आधार था, एक्टिव तरीक़े से चलाए जाने वाले फ़ंड्स का काफ़ी ख़र्चीला होना। जैसा कि मैंने पहले भी लिखा है, काफ़ी निवेशक-शायद ज़्यादार-जो इक्विटी में निवेश करने आते हैं, उन्हें इंडेक्स के बराबर कमाने की कोई इच्छा नहीं होती। उन्हें ज़्यादा चाहिए। ये ‘ज़्यादा’ पाना मुश्किल तो है, मगर असंभव नहीं और मैं ये बात पूरे आत्मविश्वास से कह सकता हूं क्योंकि यही हम वैल्यू रिसर्च में दशकों से करते रहे हैं।
हालांकि, एक निवेश के तौर पर ये सब आपके नज़रिए पर निर्भर करता है। क्योंकि पैसिव के लिए भी तर्क हैं और एक्टिव के लिए भी। मगर जो एक्टिव-नाटक-कर-रहा-है-पैसिव-फ़ंड-होने-का और जिसकी तरफ़ म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री का झुकाव हो रहा है, उसकी लिए तर्क की कमी है। जैसा कि मैंने हाल ही में लिखा भी था, ये इनोवेटिव-फ़ंड, फ़ंड कंपनियों की अपने बिज़नस की मुश्किलों के हल के लिए हैं, आपके निवेश की मुश्किलों के लिए नहीं।

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