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बुझने से पहले दिये की तेज़ी

बीते दशक में पॉजिटिव रिटर्न देने वाले स्‍टॉक्‍स के पिछले पांच साल के नंबर्स उलटी कहानी बयां कर रहे हैं

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शुरुआत से ही हमने अपने पढ़ने वालों से कहा है कि थोड़े वक़्त के लिए आने वाले तेज़ उतार-चढ़ाव के शोरगुल के दबाव में न आएं। जिन निवेशकों के निवेश की बुनियाद सही है वो स्‍टॉक मार्केट के मुश्किल समय में भी ख़ुद को बचा कर ले जायेंगे। लेकिन खुद को बचा लेना ही हमेशा काफी नहीं होता। बहुत तेज़ी से जल कर बुझ जाने के बजाए, हम चाहते हैं कि हमारे स्‍टॉक्‍स लगातार औसत से बेहतर प्रदर्शन करते रहें। लेकिन ऐसा हमेशा संभव नहीं हो पाता है। ज़्यादातर तो ये होता है कि मल्‍टी-बैगर चुपचाप पड़े रहते हैं और जब मार्केट उनकी क़ीमत पहचान लेता है तो वो अचानक ऊपर भागने लगते हैं।

हालांकि, जब इसका उलटा होता है तो ये सब पचाना मुश्किल हो सकता है। मिसाल के तौर पर, ABC लिमिटेड नाम की कंपनी को लेते हैं। मान लेते हैं कि आपने 10 साल पहले ABC में ₹100 निवेश किए। तो पहले पांच साल में आपका निवेश बढ़ कर ₹800 हो गया। यानी 51.6 प्रतिशत का रिटर्न। मगर अगले पांच साल में स्‍टॉक की वैल्‍यू गिर कर ₹620 रह गई। ऐसा सेकेंड हॉफ़ में कंपनी का रिटर्न 5 प्रतिशत ही रहने की वजह से हुआ। हालांकि सेकेंड हाफ़ में ख़राब प्रदर्शन की वजह से पहले हाफ़ के मुनाफ़े को नुकसान हुआ, लेकिन 10 साल की अवधि के लिए आपका कुल रिटर्न अब भी 20 प्रतिशत ही रहा। ये एक आकर्षक रिटर्न है।

ये सफ़र काफी खट्टे-मीठे अनुभव से भरा रहा है।

हकीकत की दुनिया में ऐसे स्‍टॉक्‍स तलाशने के लिए हमने BSE 500 इंडेक्‍स का विश्लेषण किया और ऐसे स्‍टॉक्‍स की पहचान की है जिन्‍होंने पिछले दशक में 15 प्रतिशत से ज़्यादा रिटर्न दिए हैं, लेकिन दशक के दूसरे हाफ़ में रिटर्न नकारात्मक रहा है। इसके लिए हमने 10 साल को दो अवधियों में बांटा है। 9 नवंबर, 2012 से 10 नवंबर, 2017 (अवधि - 1) और 10 नवंबर, 2017 से 11 नवंबर, 2022 (अवधि - 2)। यहां लिस्‍ट में टॉप 10 कंपनियां हैं, जिनका दूसरे पीरियड में रिटर्न काफ़ी ख़राब रहा है।

बुझने से पहले दिये की तेज़ी

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