
सेबी ने एक बार फिर अश्योर्ड रिटर्न का वादा करने को लेकर म्यूचुअल फंड्स को हिदायत दी है. सेबी ने कहा कि म्यूचुअल फंड्स को सेबी के एमएफ़ (SEBI MF) से जुड़े नियमों को मानना चाहिए. हालांकि, इस बार मामला सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और सिस्टमैटिक विदड्राल प्लान (SWP) दोनों से जुड़ा है. सेबी ने इससे जुड़ा एक पत्र 3 मार्च को एमएफ़ इंडस्ट्री की बॉडी एम्फ़ी (AMFI) को भेजा है. आइए समझते हैं कि क्या है पूरा मामला
हाल में कुछ म्यूचुअल फंड्स हाउस ने ऐसे पंफ़लेट और ब्रोशर बांटे, जिन्हें पढ़कर इन्वेस्टर्स को लगता है कि अगर वे SIP और SWP की मिली-जुली स्कीम लेते हैं, तो उन्हें एक निश्चित रक़म मिलेगी.
क्या है SWP?
SWP यानी सिस्टमैटिक विथड्रॉल प्लान वो तरीक़ा है, जिसके ज़रिये आप हर महीने एक तयशुदा रक़म निकाल सकते हैं.
इसके उलट, SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के ज़रिये आप नियमित रूप से एक रक़म निवेश करते हैं. और आमतौर पर ऐसा हर महीने की SIP से होता है. नियमों के तहत म्यूचुअल फंड्स रिटर्न का भरोसा नहीं दिला सकते, लेकिन SWP ऐसी सुविधा है, जिससे नियमित या तयशुदा रिटर्न पाए जा सकते हैं. इन दिनों जागरूकता बढ़ने की वजह से ये सुविधा रिटायर्ड लोगों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है.
आखिर मुश्किल क्या है?
निश्चित रिटर्न, या तयशुदा आमदनी हासिल करना दोनों अलग-अलग बातें हैं. बस, यहीं पर समस्या खड़ी हो जाती है. हाल ही में सेबी की नज़र ऐसे ब्रोशर और विज्ञापनों पर पड़ी, जिनसे ऐसा लगता था कि अगर आप एक SIP शुरू करते हैं, और फिर तीन या उससे ज़्यादा साल के बाद एक SWP शुरू कर देते हैं, तो आपको पहले से तय रिटर्न मिल सकते हैं. असल में, अगर आपकी स्कीम की नेट एसेट वैल्यू (NAV) लगातार नहीं बढ़ती है, तो SWP के ज़रिये आपको अपनी पूंजी में से ही पैसा वापस मिलने लगेगा.
रिटर्न के सब्ज़बाग़ से नाराज़गी है
सेबी के नियमों के मुताबिक़, कोई भी म्यूचुअल फंड रिटर्न का भरोसा नहीं दिला सकता. क्योंकि, सभी म्यूचुअल फंड्स इक्विटी और डेट मार्केट में निवेश करते हैं, इसलिए NAV मार्केट के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है. इस मामले में पक्के रिटर्न देने की बात करने का कोई मतलब ही नहीं है.
सेबी ने विज्ञापनों में धारणाओं के आधार पर एक रेखाचित्र खींचना और भविष्य में रिटर्न का सब्जबाग दिखाने पर भी नाराज़गी ज़ाहिर की है. सेबी ने एम्फ़ी को भेजे पत्र में कहा, "इस संबंध में आपको (एम्फ़ी को) सभी AMC को ऐसी गतिविधियों से बचने और ऐसे विज्ञापन, पंफ़लेट या ब्रोशर हटाने के बारे में सूचना देने की सलाह दी जाती है." अब देखने की वाली बात है कि म्यूचुअल फंड्स पर सेबी की इस हिदायत का क्या असर होता है.
इन्वेस्टर्स के लिए छिपा है यह संदेश
अब अगर आपके पास किसी म्यूचुअल फंड का एजेंट या एग्जीक्यूटिव आए. सुनिश्चित रिटर्न का वादा करते हुए स्कीम की पेशकश करे तो झांसे में बिल्कुल न आएं. उसके वादों पर अपने विवेक का इस्तेमाल करें और उसके बाद ही निवेश से जुड़ा कोई फैसला करें.