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इंटरनेशनल फ़ंड: हमारी लेटेस्‍ट रेकमेंडेशन

बीता साल उन इन्वेस्टर्स के लिए ख़ासा उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपना पैसा लगाया है

बीता साल उन इन्वेस्टर्स के लिए ख़ासा उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपना पैसा लगाया है

अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निवेश करने वालों के लिए बीता एक साल एक रोमांचक राइड की तरह रहा है. तेज गिरावट से लेकर जिओपॉलिटिकल टेंशन, सप्‍लाई चेक की दिक्‍कत, रेग्‍युलेटरी दख़ल तक हमने सब कुछ देखा है. और इस साल भी ये रोमांच कम नहीं होने जा रहा है. ब्‍याज दरों में इज़ाफ़ा और अमेरिका में मंदी के डर के चलते अनिश्चितता बनी रहेगी. ऐसे में, इंटरनेशनल इन्वेस्टर्स को क्‍या करना चाहिए? आइये देखते हैं कि हमारी फ़ंड रेकमंडेशंस में बदलाव के बाद क्‍या हुआ है. निवेश कभी खुला तो कभी बंद कोविड के बाद इंटरनेशनल म्‍यूचुअल फ़ंड में निवेश काफी तेजी से बढ़ा. ऐसा उस समय अमेरिका के टेक स्‍टॉक्‍स के शानदार प्रदर्शन और भारतीय मार्केट के कमजोर प्रदर्शन की वज़ह से हुआ. हालांकि 2022 में चीजें बदल गईं. इस बार, भारतीय मार्केट ने दम दिखाया और वहींं ज्‍यादातर इंटरनेशनल इंडेक्‍स का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा. हालांकि, जब गिरावट के बाद विदेशी स्‍टॉक्‍स निवेश के लिए आकर्षक बन गए, फरवरी 2022 में भारतीय निवेशकों के लिए निवेश का दरवाजा बंद कर दिया गया. बज़ार नियामक SEBI ने कदम उठाया और इंटरनेशनल फ़ंड्स के और निवेश लेने पर रोक लगा दी.SEBI का कहना था कि फ़ंड्स ने विदेशी बाज़ारों में निवेश की अधिकतम सीमा को पार कर लिया है. बाद में SEBI ने रोक हटा ली क्‍योंकि बहुत से निवेशकों ने कमजोर प्रदर्शन की वजह से इंटरनेशनल फ़ंड्स से अपना पैसा निकाला शुरू कर दिया था, हालांकि सेबी ने अस्‍थाई तौर पर इंटरनेशनल फ़ंड्स को कारोबार शुरू करने की अनुमति दे

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