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Retirement: इक्विटी आपकी आराम कुर्सी है

रिटायरमेंट के बाद भरोसेमंद और बढ़ती हुई इनकम ज़रूरी है, तो चलिए ऐसी रिटायरमेंट इनकम प्लान करते हैं जो हर साल बढ़ती रहे.

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Retirement Planning: रिटायरमेंट शुरू हुआ नहीं कि ज़्यादातर लोग अपने इक्विटी इन्वेस्टमेंट को अलविदा कह देते हैं. उन्हें लगता है कि अब सारी ज़िंदगी की जद्दोजहद के बाद चैन से बैठने का वक़्त आ गया है. ये ऐसी सोच है जो कहती है, 'बिल्कुल रिक्स नहीं लेने का', और इसका नतीजा होता कि रिटायर होने वाला एक ऐसा पोर्टफ़ोलियो बना बैठता है जो ख़ालिस, शुद्ध और पूरा-का-पूरा फ़िक्स्ड-इनकम इन्वेस्टमेंट वाला होता है. तो इसमें दिक्कत क्या है? इसमें बस एक ही दिक्कत है. यही साक्षात रिस्क है! जब आप सिर्फ़ डेट (debt) में पैसा लगाते हैं, तो आप अपना पैसा जल्दी ख़त्म करने का रिस्क ले रहे होते हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि महंगाई से एडजस्ट होने के बाद फ़िक्स्ड-इनकम के रिटर्न काफ़ी कम होते हैं. और अगर आपने इसमें टैक्स भी जोड़ लिया (जो कि जुड़ना ही है), तो ये सोने पर सुहागा हो जाता है, यानी, असल रिटर्न या मुनाफ़ा ना के बराबर रह जाता है. इसलिए, हम हमेशा यही सलाह देते हैं कि आप अपने रिटायरमेंट के बाद भी इक्विटी इन्वेस्टमेंट को पूरी तरह से मत छोड़ें. अब आप पूछेंगे: "इक्विटी इन्वेस्टमेंट में आने वाले उतार-चढ़ाव का क्या होगा? आख़िर, इक्विटी के रिटर्न तो नेगेटिव भी हो सकते हैं." ये स्टोरी इसी सवाल का जवाब देगी. मगर पहले, रिटायरमेंट प्लानिंग में इक्विटी की अहमियत समझना, बेहद अहम है कि... नो इक्विटी = पैसे खल्लास होने का रिस्क मान लीजिए, आप आज ही 60 बरस के हो गए, और अपने ₹1 करोड़ के रिटायरमेंट कॉर्पस के साथ आपने कामकाजी ज़िंदगी को अलविदा कर दिया. आपके रिटायरमेंट के ये 1 करोड़ रुपए बैंक के फ़िक्स्ड डिपॉज़िट में हैं (जिसका ब्याज 7.5% मिल रहा है), और इसका ब्याज आपकी रेग्युलर इनकम है. और हां, आपका हर महीने का ख़र्च ₹50,000 है. तो, आपकी आमदनी और आपका पैसे निकालने का प्लान कुछ इस तरह का होगा: साल 1: जहां पहले साल में ख़र्च के लिए आप ₹6 लाख रुपए निकालेंगे (50,000*12), वहीं ब्याज से होने वाली इस साल की आमदनी ₹7.05 लाख होगी. (नोट करें कि ब्याज ₹7.5 लाख नहीं होगा क्योंकि हम ये मान कर चल रहे हैं कि आप अपने पहले साल का ख़र्च, बैंक में रखने से पहले ही अलग रख लेंगे). ये भी पढ़िए- Navi Nifty 50 Index Fund: सस्ता है और अच्छा है साल 2: महंगाई की वजह से, आपका हर महीने का ख़र्च बढ़ जाएगा. इसका मतलब हुआ कि रहन-सहन के उसी स्टैंडर्ड को बनाए रखने के लिए आपको ₹6 लाख से ज़्यादा की ज़रूरत होगी. अपने देश की बात करें, तो भारत में पिछले 20 साल से रहन-सहन का ख़र्च, हर साल 6 प्रतिशत की एवरेज से बढ़ता रहा है. इसे ध्यान में रखें, तो अब आपको हर साल ₹6.36 लाख निकालने होंगे, और ब्याज से मिलने वाली आमदनी ₹7.10 लाख होगी. मानते हैं कि अब तक ये इतना बुरा भी नहीं है. मगर अब ज़रा आगे का हाल देखते हैं... साल 7: सातवें साल तक आपको हर साल ₹8.5 लाख चाहिए होंगे और आपकी ब्याज की आमदनी ₹6.9 लाख ही होगी. ब्याज की आमदनी इसलिए कम हो जाएगी क्योंकि

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