
Large Cap Funds: कम जोख़िम के साथ लंबे समय में वेल्थ बनाने की चाहत रखने वाले निवेशक आम तौर पर लार्ज-कैप म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करते हैं. ये इक्विटी फ़ंड्स में सबसे बड़ी और सबसे लोकप्रिय कैटेगरी है. अप्रैल, 2023 तक कैटेगरी की एसेट ₹6.57 लाख करोड़ थी. ये ओपेन एंडेड इक्विटी फ़ंड्स द्वारा मैनेज की जा रही कुल एसेट का 31 प्रतिशत से अधिक है. सेबी के वर्गीकरण के अनुसार, लार्ज-कैप में बाजार पूंजीकरण के आधार पर शीर्ष 100 कंपनियां शामिल हैं. लार्ज-कैप फ़ंड्स मुख्य तौर पर अच्छी तरह से स्थापित कंपनियों में निवेश करते हैं. हो सकता है कि ये कंपनियां असाधारण ग्रोथ की संभावनाएं ऑफर न करती हों लेकिन ये बिज़नस, आर्थिक और मार्केट रिस्क से अपेक्षाकृत तौर पर सुरक्षित रहती हैं. इसके अलावा इनका लिक्विड होना अतिरिक्त एडवांटेज है. लार्ज-कैप कंपनियां म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री की लगभग 60 प्रतिशत इक्विटी एसेट में योगदान करती है. ऐसे में आइए इन फ़ंड्स के मौजूदा ट्रेंड्स की पड़ताल करते हैं. EPFO का असर इक्विटी में EPFO के इन्वेस्टमेंट ने लार्ज-कैप कैटेगरी में इनफ़्लो पर गहरा असर डाला है, खास कर पैसिव फ़ंड्स में. मार्च 2022 तक, EPFO का इन्वेस्टमेंट लार्ज-कैप कैटेगरी में कुल असेट अंडर मैनेजमेंट का लगभग 41 प्रतिशत था. आने वाले समय में इक्विटी में EPFO का निवेश और बढ़ सकता है. ऐसी खबरें आई हैं जो बताती हैं कि EPFO की एडवाइजरी बॉडी फाइनेंस ऑडिट एंड इन्वेस्टमेंट कमेटी (FAIC) ने अपनी इक्विटी ऐलोकेशन लिमिट को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने के लिए मंजूरी दे दी है. हालांकि सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने अपनी बैठक के दौरान इस पर विचार नहीं किया. इस तरह से ये प्रस्ताव अधर में लटक गया है. लेकिन जब भी ये होगा और जिस ETF में EPFO निवेश करेगा उस ETF में जोरदार इनफ्लो दिखेगा. अभी भी EPFO की ETF पर मजबूत पकड़ है. ETF के कुल एसेट में EPFO में निवेश 70-90 प्रतिशत है. हालांकि EPFO के दबदबे के कुछ साइड इफेक्ट भी हैं. जैसा 2023 के पहले 5 माह में देखा गया, जब EPFO ने अपना कुछ इक्विटी इन्वेस्टमेंट निकाल लिया था और इसकी वजह से ETF को जोरदार झटका लगा था. ये भी पढ़िए- एक रिटायर्ड व्यक्ति को इक्विटी में कितना निवेश करना चाहिए? इनफ़्लो के दूसरे ट्रेंड आइए अब नॉन EPFO
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