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निवेश के हमारे भ्रम

निवेश को लेकर हम कई तरह के भ्रम हम गढ़ते हैं. जिन्हें ठीक से समझने की ज़रूरत है.

निवेश को लेकर हम कई तरह के भ्रम हम गढ़ते हैं. जिन्हें  ठीक से समझने की ज़रूरत है.Illustration: Anand Kumar

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कई दशक पहले, एक ऐसी घटना घटी जो डैनियल काह्नमैन (Daniel Kahneman) की अभूतपूर्व खोजों का कारण बनी. उनकी खोजों का नतीजा था, व्यवहारिक अर्थशास्त्र (behavioural economics) का जन्म. एक मनोविज्ञानी होने के बावजूद, काह्नमैन को उनके योगदान के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया. हालांकि, हम निवेशकों के लिए ये कहानी इस बात की अहमियत याद दिलाने की है कि कैसे हम सिरे से ग़लत होने के बावजूद, सही होने का भ्रम पाल लेते हैं.

1960 के दशक में, काह्नमैन यरूशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी में बतौर जूनियर प्रोफ़ेसर काम कर रहे थे और साथ-साथ इज़राइली एयर फ़ोर्स फ़्लाइट इंस्ट्रक्टरों को पार्ट-टाइम असाइनमेंट के तौर पर मनोविज्ञान के लेक्चर दे रहे थे. उनकी एक सलाह थी कि इंस्ट्रक्टर, ट्रेनी पायलटों की उपलब्धियों की तारीफ़ करें मगर ग़लतियों की आलोचना करने से बचें. उनकी इस सोच का आधार उनकी मनोविज्ञान की शिक्षा और समझ थी.

हालांकि, फ़्लाइट इंस्ट्रक्टरों ने तर्क दिया कि उनके असल-ज़िंदगी के अनुभवों से मिली सीख इससे अलग है. उन्होंने देखा था कि प्रशंसा किए जाने पर ट्रेनी अक्सर कमतर प्रदर्शन करते थे और जब उन्हें फटकार लगाई जाती तो बेहतर करते. हालांकि, कान्हमैन को अपने आइडिया पर पूरा भरोसा था, मगर असल दुनिया के इतने गहरे अनुभव को देखते हुए उन्होंने इंस्ट्रक्टरों की बात तुरंत खारिज नहीं की. वो इस विषय पर सोचते रहे. और फिर, जो विचार उन्हें कौंधा उसने उन्हें व्यवहारिक अर्थशास्त्र के रास्ते पर डाल दिया.

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काह्नमैन को एहसास हुआ कि डांट खाने के बाद का अच्छा प्रदर्शन, उस डांट का नतीजा नहीं था. दरअसल, ये हरेक पायलट की कुशलता का एक स्तर था, जो आमतौर पर ट्रेनिंग से धीरे-धीरे बेहतर होता रहता था. स्वाभाविक है कि हरेक ट्रेनी के कुछ दिन अच्छे जाते थे और कुछ ख़राब. ये ट्रेनी की कुशलता के स्तर की औसत के तौर पर एक जैसे बंटे हुए थे. एयरक्राफ़्ट में एक अच्छे दिन के बाद, इस बात की गुंजाइश ज़्यादा थी कि अगला दिन ख़राब होगा, और ऐसे ही इसका उलटा भी होता रहेगा. मगर, क्योंकि हर रोज़ दिन के अंत में इंस्ट्रक्टर या तो प्रशंसा करते या फटकार लगाते, तो ऐसा लगता था कि फ़ीडबैक का उलटा असर हो रहा है. ये अचंभे में डालने वाली बात थी कि दो बिल्कुल अलग क़िस्म की घटनाएं कारण (cause) और प्रभाव (effect) के रिश्ते का एहसास करा रही थी.

अब, क्या ये बात साफ़ नहीं है कि जिस तरह हम निवेश के फ़ैसले लेते हैं और जिस तरह से हम अपने फ़ैसलों के असर का नतीजा निकालते हैं, इन दोनों बातों में गहरी समानता है? हमारे मस्तिष्क का बहुत शक्तिशाली और पैटर्न को पहचानने का सिस्टम हमेशा सतर्क रहता है, इतना कि वो अविश्वसनीय पैटर्न तलाश लेता है जो मौजूद ही नहीं होते. कुछ साल के निवेश के बाद, चाहे वो इक्विटी में हो या इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड में हो, उन फ़्लाइट इंस्ट्रक्टरों की तरह, हम सभी के दिमाग ग़लत नतीजों और भ्रमित करने वाले ख़ुद के बनाए नियमों से प्रभावित हो सकते हैं. इसकी सबसे ख़राब बात ये है कि हम सभी के पास इसका 'सुबूत' होता है कि हमारे नियम काम करते हैं. जब हम ख़राब निवेश करते हैं, तब हम उन्हें समझाने के लिए और भी ज़्यादा सतही कारणों से जोड़ देते हैं और इस तरह से, कुछ और नए नियम गढ़ लेते हैं. दिलचस्प है कि मुझे ऐसे कई लोग मिलते हैं जिन्होंने अच्छे निवेशों की पहचान करने के बजाए, मार्केट में आगे क्या होगा इसका अंदाज़ा लगाने के लिए अपने नियम बनाए हुए हैं. हर किसी के पास ऐसे संकेत हैं जिनके आधार पर वो ये तय करते हैं कि स्टॉक कब ख़रीदा जाए, कब नहीं, और कब और कैसे उन्हें बेचा जाए. कई बार, केवल संयोग से ये नियम काम करते हुए लगते हैं, और ऐसे में ये विश्वास और गहराते जाते हैं.

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मैंने जिस तरह से इस विषय को बयान किया है, इसका कोई हल नज़र नहीं आता. हालांकि, इसका हल है. और बहुत ही आसान हल है. एक शब्द में कहें: ऑटोमेट. इस शब्द का इस्तेमाल मैंने तकनीक के संदर्भ में नहीं बल्कि नियम पर आधारित निवेश करने के लिहाज़ से किया है. इसका एक सटीक उदाहरण है इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड्स में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP के ज़रिए निवेश करना. ये आपके निवेश के तरीक़े को ऑटोमैटिक बना देता है, एक नियम पर आधारित कर देता है जो मार्केट का प्रदर्शन देख कर निवेश करें या नहीं, इस लोभ और पशोपेश से बचा लेता है. इक्विटी निवेश के लिए इसी तरह का तरीक़ा इस्तेमाल करें. जो स्टॉक आपकी ख़रीदने वाली बास्किट में रखे हैं, उनमें समय-समय पर एक तय रक़म डालते रहिए. हमारी वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र सर्विस में हम ठीक यही स्ट्रैटजी अपनाने की सलाह देते हैं.

याद रखिए, पैटर्न की पहचान करना आपके जीवन के कई पहलुओं में बहुत अच्छी तरह से काम करता है, मगर एक निवेशक का ये सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है.

देखिए ये वीडियो- बेस्ट डेट म्यूचुअल फ़ंड कौन सा है?

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