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HDFC मर्जर का हमारे फ़ंड रेकमेंडेशन पर असर

कुल मिलाकर, मर्जर से म्यूचुअल फ़ंड इन्वेस्टर्स पर कोई ख़ास असर पड़ने की संभावना नहीं है

कुल मिलाकर, मर्जर से म्यूचुअल फ़ंड इन्वेस्टर्स पर कोई ख़ास असर पड़ने की संभावना नहीं हैIllustration: Anand Kumar

HDFC Merger: फ़ाइनेंस सेक्टर की एक बड़ी कंपनी बनने के लिए भारतीय बाज़ार की दो दिग्गज HDFC और HDFC Bank का मर्जर हो गया है. अलग-अलग होकर भी दोनों स्टॉक्स मार्केट कैप के लिहाज़ से देश की टॉप 10 कंपनियों की लिस्ट में शामिल थीं. अब दोनों के मर्ज होने से HDFC Bank , भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बैंक बन गया है. लगातार ग्रोथ के उनके ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए, ये आश्चर्यजनक नहीं है कि HDFC की दोनों कंपनियां, ख़ासकर लॉर्ज-कैप कैटेगरी में, म्यूचुअल फ़ंड्स की फ़ेवरेट रही हैं. इसलिए, उनके मर्ज होने के बाद हमारे रेकमेंड किए फ़ंड्स पर इसके असर का अनालेसिस दिया गया है. एक्टिव फ़ंड्स Active funds: SEBI के नियमों के मुताबिक़, सक्रिय तौर पर मैनेज होने वाले म्यूचुअल फ़ंड किसी एक स्टॉक में अपनी एसेट का 10 फ़ीसदी से ज़्यादा होल्ड नहीं कर सकते. ऐसा किसी ख़ास स्टॉक में निवेश से जुड़े पोर्टफ़ोलियो के रिस्क को क़ाबू में रखने के लिए किया जाता है. अब चूंकि, कई फ़ंड्स के पास दोनों स्टॉक्स हैं, इसलिए कुछ मामलों में HDFC और HDFC Bank का कुल एक्सपोज़र 10 फ़ीसदी की सीमा से ज़्यादा हो जाएगा. स्पष्ट रूप से कहें, तो ऐसे म्यूचुअल फ़ंड्स की संख्या 40 है. ये भी पढ़िए- DSP टैक्स सेवर: लंबी रेस का घोड़ा हालांकि, हमारे रेकमेंडेशन ('बेस्ट बाय' और 'बाय' फ़ंड्स की लिस्ट) के भीतर, सिर्फ़ इन सात फ़ंड्स पर इसका असर पड़ने की संभावना है: HDFC Twins

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