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गुरु कौन कहला सकता है

एक दूरदर्शी इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट होने के लिए क्या ज़रूरी है

एक दूरदर्शी इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट होने के लिए क्या ज़रूरी हैAnand Kumar

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6:05

अक्तूबर 2023 की 'वैल्थ इनसाइट' की हमारी कवर स्टोरी निवेश गुरु फ़्रांस्वां रिशान (Francois Rochon) पर है. चौंक गए? क्या उनके बारे में कभी नहीं सुना? आपका चौंकना ग़लत नहीं है. जब मैं "पीटर लिंच" के बारे में गूगल सर्च करता हूं, तो मुझे 20+ लाख रिज़ल्ट देखने को मिलते हैं (उनकी कही बातों के साथ). "फ़्रांस्वां रिशान" पर सर्च करने पर मुझे 17,700 नतीजे ही दिखते हैं. ये काफ़ी बड़ा फ़र्क़ है.

और इसके बावजूद, इस अंजान से शख़्स को हम एक इन्वेस्टमेंट गुरु की संज्ञा दे रहे हैं. सवाल है कि आख़िर वो क्या है जो एक गुरु को गुरु बनाता है? निवेश के संदर्भ में, एक निवेशक को गुरु कब माना जाए? एक अलग बैकग्राउंड वाले शख़्स का नाम लेते हैं, राकेश झुनझुनवाला, क्या आप उन्हें गुरु कहेंगे? बिल्कुल नहीं.

जब हम ये कवर स्टोरी प्लान कर रहे थे, तो मैंने गुरु होने की परिभाषा पर काफ़ी सोच-विचार किया. सवाल था कि एक निवेश गुरु क्या होता है? तो, इसका जो नतीजा मैंने निकाला, उसे मैं यहां बता रहा हूं.

निवेश के संदर्भ में, आमतौर पर एक "इन्वेस्टमेंट गुरु" उसे कहा जाता है जिसके पास ये ख़ूबियां हों:

पहली ख़ूबी, उसके पास एक साबित करने वाला ऐसा ट्रैक रिकॉर्ड हो जिसमें निवेश के अच्छे रिटर्न का लॉन्ग-टर्म रिकॉर्ड शामिल हो. केवल एक या दो अच्छे दांव लगाने, या एक-दो साल के लिए इंडेक्स को मात देने की बात नहीं हो, बल्कि कई साल, और साल ही क्यों दशकों का और कई अलग-अलग तरह की मार्केट सायकल और परिस्थितियों में मिले ज़बरदस्त नतीजों का ट्रैक रिकॉर्ड होना चाहिए.

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दूसरी ख़ूबी, एक अलग निवेश की फ़िलॉसफ़ी हो. मैं ये नहीं कहूंगा कि ये फ़िलॉसफ़ी यूनीक हो क्योंकि इस दुनिया में कुछ भी नया नहीं है, पर कुछ ऐसा ज़रूर होना चाहिए जो साफ़ तौर पर अलग हो. वॉरेन बफ़े और पीटर लिंच इसके बड़े उदाहरण हैं, और उनकी मिसाल से साफ़ हो जाता है कि इस संदर्भ में अलग होने के क्या मायने हैं.

तीसरी ख़ूबी है, इन्फ़्लुएंस या प्रभाव का होना. आज के संदर्भ में, ये मुश्किल लगता है क्योंकि ये शब्द 'इन्फ़्लुएंस', सोशल मीडिया ने बिल्कुल बिगाड़ दिया गया है. एक वक़्त था, जब लोग अपने जीवन में दूसरों से बेहतर करते थे और ये बात उन्हें इन्फ़्लुएंशिल बनाती थी. आजकल, इन्फ़्लुएंशियल होना अपने आप में एक एक्टिविटी हो गई है. हालांकि, इस विषय पर मेरा मानना है कि जब आप इसे पिछली दोनों ख़ूबियों को एक साथ जोड़ देते हैं, तब इन्फ़्लुएंस एक अच्छा संकेत बन जाता है.

चौथी ख़ूबी है, बेहतर शब्द अभिव्यक्ति के अभाव में, वैचारिक स्तर पर नेतृत्वशील होना. इस वाक्य में एक तरह के छलावे की झलक दिख रही है, जो मुझे सख़्त नापसंद है, मगर निवेश के परिप्रेक्ष्य में, नेतृत्वशील या लीडरशिप से मेरा मतलब एक ऐसे गुरु से है, जो अपनी अप्रोच को किसी सार्वजनिक तरीक़े से ज़ाहिर करता हो, जैसे क़िताबें, लेख, वार्ता, इंटरव्यू आदि. उस व्यक्ति का विचारशील निवेश की बौद्धिक परंपरा में कुछ योगदान होना चाहिए. फिर से, एक बार पीटर लिंच की बात करते हैं. रिटायर होने के दशकों बाद, उनके निवेश का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड उनकी क़िताबों को साबित करता है, मगर आज क़िताबें हमारे ज़्यादा कहीं ज़्यादा अहमियत रखती हैं.

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पांचवीं ख़ूबी है, ईमानदार आत्म-मूल्यांकन और विनम्रता. किसी निवेश गुरु का 'मैं ही सबसे महान हूं' वाला गर्व से छाती पीटने वाला रवैया नहीं होता. अगर है, तो वो एक निवेश गुरु की पदवी से तुरंत ही 100 प्रतिशत अयोग्य हो जाता है. और ये बात महज़ चरित्र तक ही सीमित नहीं है बल्कि ईमानदार होने की बात भी है. मार्केट सब कुछ एक ही धरातल पर लाने में माहिर होता है. अगर आपको निवेश करते कुछ साल हो गए हैं, तो आपने भी ग़लतियां की हैं. आप कई बार मूर्ख और नासमझ हुए हैं. असल में, आपने शुरुआत ही इस तरह से की होगी. ये निवेश (और जीवन की बहुत सी चीज़ों को) सीखने का एकमात्र तरीक़ा है कि आप उन ग़लतियों को पहचानें और सुनिश्चित करें कि आप उन्हें कभी नहीं दोहराएंगे. जब तक कोई इंसान ऐसा नहीं करता, तब तक उसके निवेश का ट्रैक रिकॉर्ड गुरु कहलाने लायक़ नहीं हो सकेगा.

मेरे ख़याल से, एक निवेश गुरु की सभी बुनियादी बातें इन ख़ूबियों में कवर हो जाती हैं, और फ़्रांस्वां रिशान बख़ूबी इनके दायरे में आते हैं. असल में, जब आप ये कवर स्टोरी पढ़ेंगे, जिसे मेरे युवा साथियों ने लिखा है, तो आप देखेंगे कि रिशान के पास एक शानदार (छोटी) लिस्ट उन चीज़ों की है जो आपको अपने निवेश में नहीं करनी चाहिए. इसकी दिलचस्प बात ये है कि निवेश को लेकर उनकी अप्रोच का एक हिस्सा उन ग़लत चीज़ों के बारे में है जो नहीं की जानी चाहिए. मुझे ये सोच पसंद है और इसके बारे में मैंने कई बार लिखा है. अगर आप ऐसी चीज़ें नहीं करते जो ग़लत हैं, तो इसकी काफ़ी गुंजाइश है कि आप अच्छा करेंगे.

बदक़िस्मती से, ग़लतियां करने के तरीक़े, सही तरीक़े से निवेश करने के तरीक़ों से कहीं ज़्यादा हैं. पर अगर निवेश के इन गुरुओं के ज्ञान को आत्मसात किया जाए, तो हम कहीं बेहतर नतीजे पा सकते हैं.

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