Khyati Simran Nandrajog/AI-generated image
सारांश: राजीव ठक्कर की Parag Parikh Flexi Cap Fund के निवेशकों को लिखी ताज़ा चिट्ठी में फ़ंड की कैश, हाल के कमज़ोर प्रदर्शन और निवेश के चुनावों के बारे में कई दावे हैं. फ़ंड के मासिक खुलासे निवेशकों को यह परखने का रास्ता देंगे कि ठक्कर के वादे और उनकी सोच टिकते हैं या नहीं.
राजीव ठक्कर ने यूनिटहोल्डरों से कहा है कि Parag Parikh Flexi Cap Fund में पड़ी कैश अपने क़रीब 25% के शिखर से घटकर 14 या 15% पर आ गई है, और यह सिंगल डिजिट तक पहुंचेगी. मासिक पोर्टफ़ोलियो के खुलासे बता देंगे कि ऐसा होता है या नहीं. 4 अगस्त की उनकी चिट्ठी में बाक़ी कुछ भी इतनी साफ़ तरह से परखा नहीं जा सकता.
यह चिट्ठी दो मुश्किल सालों का जवाब देती है. FY26 की चौथी तिमाही में फ़ंड ने Nifty 500 TRI के मुक़ाबले 9.97% गंवाया, और इसका पांच साल का सालाना रिटर्न 13.77% है. 30 जून को ₹1.43 लाख करोड़ के साथ, यह भारत की सबसे बड़ी एक्टिव तरीक़े से चलने वाली इक्विटी स्कीम है. वैल्यू रिसर्च इसे पांच स्टार देता है.
आलोचक इसके साइज़ को दोष देते हैं. ठक्कर इसे ख़ारिज करते हैं, और 2007 की तरफ़ इशारा करते हैं, जब उन्होंने ₹100 करोड़ से थोड़ी ज़्यादा की एक पोर्टफ़ोलियो मैनेजमेंट बुक पर इससे भी बुरे कमज़ोर प्रदर्शन का दौर संभाला था. स्ट्रैटिजी इसे बेहतर समझाती है. एक ऐसा फ़ंड जो वो शेयर और सेक्टर ख़रीदता है जिनसे बाज़ार मुंह मोड़ चुका है, वो साल-साल भर या उससे ज़्यादा के दौर में पीछे रहेगा. उस पैमाने पर, यह फ़ंड आम ही है.
Nifty 100 अपनी कमाई के 20.8 गुना पर ट्रेड करता है, Nifty Midcap 150 30.7 गुना पर और Nifty Smallcap 250 34.6 गुना पर (screener.in, 4 अगस्त). छोटी कंपनियां, मुनाफ़े के हर रुपये के लिए बड़ी कंपनियों से क़रीब दो-तिहाई ज़्यादा महंगी हैं. जो कोई इसे भौतिकी का नियम मान बैठा है कि छोटी कंपनियां ऊंचा रिटर्न देती हैं, वो अमेरिका की तरफ़ देख ले, वो लिखते हैं.
IT सर्विसेज़ पर, वो इस बिकवाली में ख़रीद रहे हैं, और कहते हैं कि इससे वो भीड़ से अलग खड़े हो जाते हैं. AI शायद ज़्यादातर कोड लिख दे, पर उसे लागू करने का काम बना रहेगा, और AI का इस्तेमाल करने वाले हमलावर, साइबर सुरक्षा की मांग पैदा करेंगे. वो बेनेडिक्ट इवांस के दो लेखों का हवाला देते हैं (नीचे लाइन के बाद का हिस्सा देखिए).
वो चलन वाली थीम से इनकार करते हैं. न डिफ़ेंस, न एनर्जी ट्रांज़िशन, न फ़िनटेक, और AI मॉडल बनाने वाली कंपनियों में कोई सीधी हिस्सेदारी नहीं, हालांकि उनके पास वो हाइपरस्केलर हैं जो उसके नीचे की कंप्यूटिंग बेचते हैं.
HDFC Bank इस फ़ंड की सबसे बड़ी होल्डिंग है, 8.33% पर, और वो इसमें बने रहेंगे. अब तक सामने आई दिक़्क़तें अच्छी नहीं हैं, वो लिखते हैं, पर ये ग्राहकों के भरोसे को ख़तरे में नहीं डालतीं, और वो इन्हें उन बातों से अलग करते हैं जिन्हें वो एक प्राइवेट बैंक में हुआ फ़्रॉड और एक दूसरे में कम बताए गए डेरिवेटिव घाटे के तौर पर बताते हैं. उन्होंने ICICI Bank को भी ऐसी ही आलोचना के बीच अपने पास रखा था.
इसे एक ऐसे दस्तावेज़ की तरह पढ़िए जिस पर आप उन्हें आगे कठघरे में खड़ा कर सकें, और यह ज़्यादातर फ़ंड मैनेजरों की चिट्ठियों से कहीं ज़्यादा है. यह एक पांच-स्टार फ़ंड को बेचने की कोई वजह नहीं देता, जो पूरे साइकल में एक फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड की तरह ही बर्ताव कर रहा है. आज की कैश का आंकड़ा नोट कर लीजिए, फिर मार्च के पोर्टफ़ोलियो खुलासे को देखिए. वही नंबर आपको बता देगा कि उनका इरादा सच्चा था या नहीं.
बेनेडिक्ट इवांस ने क्या दलील दी
ठक्कर की चिट्ठी पाठकों को टेक्नोलॉजी विश्लेषक बेनेडिक्ट इवांस के दो लेखों की तरफ़ भेजती है, उनकी इस सोच के आधार के तौर पर कि AI और नौकरियों को लेकर डर, कुल मिलाकर देखने पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है. यह उनमें से एक है, 'AI and the automation of work', जो जुलाई 2023 में छपा. वो दलील देते हैं कि ऑटोमेशन 200 साल से नौकरियां ख़त्म करता आया है, और हर लहर ने ऐसी नई नौकरियां बनाईं जिनका कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता था.
'लंप-ऑफ़-लेबर फ़ैलेसी' वो ग़लती है जिसमें यह मान लिया जाता है कि काम की मात्रा तय है. जबकि 'जेवन्स पैराडॉक्स' कहता है कि किसी चीज़ को सस्ता कर देने से लोग उसका ज़्यादा इस्तेमाल करने लगते हैं. टाइपराइटर ने एक क्लर्क को 10 का काम करने लायक़ बनाया, और मालिकों ने और क्लर्क रख लिए. कंप्यूटर स्प्रेडशीट 1979 में आया, और अकाउंटिंग में नौकरियां बढ़ गईं.
एक लैंग्वेज मॉडल कोई जवाब ढूंढकर नहीं लाता. वो उस तरह का जवाब बनाता है, जो ऐसे सवाल पर आमतौर पर आता है. यही उसे वहां काम का बनाता है, जहां आपको बहुत से ऐसे इंटर्न चाहिए जो तेज़ी से मसौदा बना दें और जिनके काम को आप फिर से चेक कर लें.
यह भी पढ़ें: क्यों PPFAS के CIO को FII की बिक़वाली की चिंता नहीं है?




