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OYO मुनाफ़े में लौट आई, क्या IPO की वैल्यूएशन भी जायज़ है?

₹748 करोड़ का नेट प्रॉफ़िट, ₹7,757 करोड़ का लोन, G6 की ख़रीद और क़रीब 45 गुना संभावित EV/EBITDA, OYO IPO से पहले इन आंकड़ों को समझना ज़रूरी है

₹748 करोड़ का नेट प्रॉफ़िट, ₹7,757 करोड़ का लोन, G6 की ख़रीद और क़रीब 45 गुना संभावित EV/EBITDA, OYO IPO से पहले इन आंकड़ों को समझना ज़रूरी हैAnand Kumar/AI-Generated Image

सारांश: दो नाकाम कोशिशों के बाद OYO एक बार फिर IPO लाने की तैयारी में है. लेकिन निवेश पर विचार करने से पहले कंपनी के फ़ाइनेंशियल आंकड़ों और अब तक के प्रदर्शन को गहराई से समझना ज़रूरी है.

पहले की नाकाम कोशिशों के बाद OYO के आख़िरकार अब शेयर बाज़ार में उतरने की उम्मीद है. लिस्टिंग से पहले कंपनी निवेशकों के सामने एक सीधी बात रख रही है: क़रीब एक दशक तक घाटे में रहने के बाद अब वह मुनाफ़ा कमा रही है. ये बात सही है, लेकिन सिर्फ़ हेडलाइन में दिखने वाला मुनाफ़ा पूरी कहानी नहीं बताता.

OYO का नाम सुनते ही ज़्यादातर लोगों के दिमाग़ में कम क़ीमत वाले, एक जैसे होटल रूम आते हैं, जिन्हें फ़ोन पर कुछ क्लिक करके बुक किया जा सकता है. लेकिन आज कंपनी काफ़ी बदल चुकी है. 2019 में OYO की वैल्यूएशन क़रीब ₹70,000 करोड़ थी. इसके बाद कोविड आया, होटल खाली हुए, घाटा तेज़ी से बढ़ा और OYO के सबसे बड़े निवेशकों में शामिल SoftBank ने उसकी वैल्यूएशन में 70 प्रतिशत की कटौती कर दी. 2021 और 2023 में लिस्टिंग की दो कोशिशें भी आगे नहीं बढ़ सकीं. अब कंपनी तीसरी बार कोशिश कर रही है.

OYO की लिस्टिंग अब क्यों हो रही है?

दिसंबर 2024 में OYO ने ₹4,274 करोड़ में G6 Hospitality को ख़रीदा, जिसके पास अमेरिका की Motel 6 और Studio 6 मोटेल चेन हैं. इस डील के लिए OYO ने विदेश से पांच साल का डॉलर लोन लिया और लोन की रक़म डील की क़ीमत से भी ज़्यादा थी. इससे कंपनी ने 2021 का अपना पुराना डॉलर लोन भी चुका दिया. मई 2026 तक ₹7,757 करोड़ का लोन बाक़ी था, जिसकी प्रभावी सालाना लागत क़रीब 13 प्रतिशत थी. IPO में कोई ऑफ़र फ़ॉर सेल नहीं है, यानी कोई मौजूदा शेयरहोल्डर अपनी हिस्सेदारी बेचकर पैसा नहीं निकाल रहा है.

इस रीफ़ाइनेंसिंग से अब भी बड़ा फ़ायदा हो सकता है. लोन को समय से पहले चुकाने पर OYO का सालाना ब्याज ख़र्च क़रीब ₹650 करोड़ घट जाएगा. ये कंपनी की कुल उधारी लागत के आधे से भी ज़्यादा है. इसका मतलब है कि अगले साल कंपनी एक भी अतिरिक्त रूम बेचे बिना अपने मुनाफ़े में सुधार दिखा सकती है.

एक ब्रांड, तीन अलग बिज़नेस

OYO कई साल पहले ही सिर्फ़ भारतीय कंपनी रहना बंद कर चुकी थी. 9M FY26 में उसकी 84 प्रतिशत रेवेन्यू भारत के बाहर से आई. लेकिन ज़्यादा अहम सवाल ये नहीं है कि कंपनी कहां बिज़नेस करती है. असल सवाल ये है कि अलग-अलग जगहों पर उसका बिज़नेस मॉडल कैसा है, क्योंकि एक ही नाम के तहत वह तीन बिल्कुल अलग तरीक़ों से कमाई करती है.

नॉर्थ अमेरिका में OYO फ़्रैंचाइज़ मॉडल पर काम करती है. वहां वह Motel 6 और Studio 6 के नाम होटल मालिकों को इस्तेमाल करने देती है, जबकि प्रॉपर्टी, स्टाफ़ और स्थानीय देनदारियों का ख़र्च मालिक उठाते हैं. भारत में मॉडल इसके उलट है. यहां OYO ‘Townhouse’ और ‘Palette’ जैसे ब्रांड के तहत होटल लीज़ पर लेकर ख़ुद चलाती है. कमरे से मिलने वाली पूरी रक़म उसके पास आती है, लेकिन रूम भरें या खाली रहें, किराया और कर्मचारियों की सैलरी उसे देनी ही होती है. यूरोप में वह दूसरे लोगों के हॉलिडे होम्स को लिस्ट और मैनेज करती है और उसके बदले कमीशन लेती है.

OYO जिस बुकिंग वॉल्यूम का सबसे ज़्यादा ज़िक्र करती है, वह उसकी रेवेन्यू नहीं होती. नॉर्थ अमेरिका में हर ₹100 की बुकिंग पर OYO क़रीब ₹16 अपने पास रखती है. भारत में ये आंकड़ा ₹41 है.

हर ₹100 की बुकिंग में से OYO कितना अपने पास रखती है?

रेवेन्यू में Southeast Asia और UK की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है, जबकि India और Nepal पीछे हैं

रीजन (9M FY26)
ग्रॉस बुकिंग्स (₹ करोड़) रेवेन्यू (₹ करोड़) हर ₹100 की बुकिंग में OYO के पास
US और Canada 12,023 1,879 ₹ 15.60
Southeast Asia, UK और दूसरे देश 4,153 2,296 ₹ 55.30
Europe 4,039 1,639 ₹ 40.60
India और Nepal 2,732 1,127 ₹ 41.30
ग्रुप 22,946 6,941 ₹ 30.30

कम हिस्सा अपने पास रखना अपने आप में ख़राब बात नहीं है. G6 हर बुकिंग का छोटा हिस्सा रखती है, लेकिन उसका एसेट-लाइट मॉडल इस फ़ीस इनकम को 33 प्रतिशत नेट मार्जिन में बदल देता है. नौ महीनों में ₹1,030 करोड़ की रेवेन्यू पर उसने ₹344 करोड़ का मुनाफ़ा कमाया. दूसरी तरफ़, OYO की भारतीय होटल कंपनी हर बुकिंग का कहीं बड़ा हिस्सा अपने पास रखती है, लेकिन होटल चलाने के ख़र्च के बाद उसके पास सिर्फ़ ₹46 करोड़ बचते हैं, यानी क़रीब 4 प्रतिशत नेट मार्जिन. ये दोनों आंकड़े प्रॉस्पेक्टस में दी गई संबंधित एंटिटीज़ के अकाउंट्स से लिए गए हैं और ज़रूरी नहीं कि इनका जोड़ ग्रुप के कुल आंकड़ों के बराबर हो.

हेडलाइन वाले आंकड़ों से आगे की कहानी

OYO ने 9M FY26 में ₹748 करोड़ का नेट प्रॉफ़िट दिखाया. लेकिन इसमें ₹559 करोड़ का डिफर्ड टैक्स क्रेडिट शामिल है. ये कारोबार से कमाया गया पैसा नहीं, बल्कि एक अकाउंटिंग एंट्री है. इसके पीछे पिछले क़रीब एक दशक के घाटे हैं, जिन्हें कंपनी भविष्य में होने वाले मुनाफ़े पर लगने वाले टैक्स के साथ एडजस्ट कर सकती है. अकाउंटिंग रूल्स कंपनी को इस संभावित फ़ायदे को पहले ही एसेट के तौर पर दर्ज करने की इजाज़त देते हैं.

इस डिफर्ड टैक्स क्रेडिट को हटा दें, तो ग्रुप की कमाई ₹189 करोड़ रह जाती है. ऐसे ही क़रीब ₹3,140 करोड़ के और टैक्स एसेट्स अभी बाक़ी हैं. इसलिए आगे भी नेट प्रॉफ़िट के आंकड़े इस तरह के अकाउंटिंग फ़ायदे की वजह से बेहतर दिखाई दे सकते हैं.

टर्नअराउंड पहले आया, फिर उसे ख़रीदा गया

ये मान लेना आसान होगा कि OYO का टर्नअराउंड सिर्फ़ आंकड़ों का खेल है. लेकिन ऐसा नहीं है. हेडलाइन वाला प्रॉफ़िट अकाउंटिंग से प्रभावित है, मगर उसके नीचे बिज़नेस में आया सुधार असली है और ये सुधार G6 के आने से पहले शुरू हो चुका था. इसे एडजस्टेड ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट से बेहतर समझा जा सकता है. इसमें वन-ऑफ़ आइटम्स और दूसरी इनकम को हटाकर सिर्फ़ ये देखा जाता है कि कंपनी अपने मुख्य होटल बिज़नेस से कितना कमा रही है. FY21 में यहां ₹1,745 करोड़ का घाटा था. FY24 में यही आंकड़ा ₹898 करोड़ के मुनाफ़े में बदल गया. G6 दिसंबर 2024 में OYO के पास आई थी, इसलिए FY24 का आंकड़ा OYO के अपने बिज़नेस का है. यानी अमेरिकी मोटेल्स जुड़ने से पहले ही कंपनी सालाना क़रीब ₹900 करोड़ कमा रही थी.

इस रिकवरी के पीछे तीन बड़ी वजह थीं. पहली, ख़र्च में बड़ी कटौती. FY21 से FY24 के बीच एम्प्लॉयी कॉस्ट 57 प्रतिशत और जनरल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सपेंस 28 प्रतिशत घटे. अलग-अलग देशों की टीम्स को भारत से चलने वाले रीजनल हब्स में समेटा गया. दूसरी, कम कमाई देने वाली हज़ारों प्रॉपर्टीज़ को हटा दिया गया, जिनमें ज़्यादातर छोटे भारतीय शहरों के घाटे वाले इकॉनमी होटल्स थे. बाक़ी काम ऑटोमेशन ने किया. अब क़रीब 10 में से सात रूम नाइट्स OYO के अपने ऐप और वेबसाइट के ज़रिए आती हैं, न कि कमीशन लेने वाली ट्रैवल वेबसाइट्स से.

वैल्यूएशन बिज़नेस की नहीं, कहानी की क़ीमत लगा रही है

प्राइस बैंड अभी सामने नहीं आया है. OYO अब ख़ुद को Prism कहती है और जुलाई 2026 के आख़िरी दिनों से इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के साथ बैठकें कर रही है. बताया जा रहा है कि कंपनी क़रीब ₹70,000 करोड़ की वैल्यूएशन चाहती है. इसमें ₹6,579 करोड़ का नेट डेट जोड़ दें, तो एंटरप्राइज़ वैल्यू क़रीब ₹76,600 करोड़ बैठती है.

असल परीक्षा इस बात की है कि होटल बिज़नेस वास्तव में कितना कमा रहा है. एडजस्टेड ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट को पूरे साल के हिसाब से देखें, तो ये क़रीब ₹2,624 करोड़ बैठता है. लेकिन इसमें एक बड़ा ख़र्च शामिल नहीं है: किराया. OYO अब भारत में 1,573 होटल ख़ुद चलाती है, जबकि मार्च 2023 में ये संख्या सिर्फ़ चार थी. इनमें से ज़्यादातर होटल लीज़ पर हैं. अकाउंटिंग रूल्स इन पेमेंट्स को ऑपरेटिंग लाइन के नीचे रखते हैं, लेकिन रूम भरें या खाली रहें, होटल मालिक को किराया देना ही पड़ता है. ये असली कैश आउटफ़्लो है और नौ महीनों में ₹702 करोड़ रहा. पूरे साल का किराया वापस जोड़ें, तो बिज़नेस की कमाई क़रीब ₹1,690 करोड़ रह जाती है. इस हिसाब से EV/EBITDA मल्टिपल क़रीब 45 गुना बैठता है.

अमेरिका की होटल फ़्रैंचाइज़र Wyndham इसी पैमाने पर क़रीब 16 गुना और Choice Hotels क़रीब 12 गुना पर ट्रेड करती हैं. यहां तक कि भारत की पांच सबसे बड़ी लिस्टेड होटल कंपनियों का औसत मल्टीपल क़रीब 22 गुना है. इस तुलना में OYO की संभावित वैल्यूएशन काफ़ी महंगी नज़र आती है.

आगे क्या है?

OYO ने अपनी रिकवरी कमाई है. लेकिन अभी उसने उस वैल्यूएशन को साबित नहीं किया है जो उसके साथ जोड़ी जा रही है. मुश्किल दौर का बड़ा हिस्सा पीछे छूट चुका है. अब उससे भी मुश्किल काम बाक़ी है: ग्रुप के बाक़ी बिज़नेस को भी अमेरिकी मोटेल्स जैसी कमाई की एफ़िशिएंसी तक पहुंचाना. प्राइस बैंड आख़िर में तय करेगा कि इस उम्मीद की क़ीमत कितनी है और निवेशक उस ग्रोथ के लिए पैसा दे रहे हैं जिसे OYO पहले ही हासिल कर चुकी है, या उस ग्रोथ के लिए जिसे उसे अभी कमाना बाक़ी है.

यह भी पढ़ें: भारत में IPO आख़िर कैसे काम करते हैं?

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