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SEBI के ब्रोकर फ़ीस बढ़ाने से क्या निवेशकों पर पड़ेगी मार?

SEBI का ताज़ा सर्कुलर कैसे ब्रोकरेज को नया रूप दे सकता है?

SEBI का ताज़ा सर्कुलर कैसे ब्रोकरेज को नया रूप दे सकता है?

मार्केट रेगुलेटर SEBI डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर लगाम कस रहा है. 1 जुलाई, 2024 को जारी सर्कुलर में SEBI ने कहा है कि स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉज़िटरी और क्लियरिंग कॉरपोरेशन जैसे मार्केट इंफ़्रास्ट्रक्चर संस्थानों को स्टॉक ब्रोकर्स पर मौजूदा रियायती शुल्क के बजाय उनके ट्रेडिंग वॉल्यूम के मुताबिक़ पैसा चार्ज करना चाहिए.

इस बात का क्या मतलब है?

एक्सचेंज जैसे मार्केट इंफ़्रास्ट्रक्चर फ़िलहाल स्टॉक ब्रोकर्स से उनके टर्नओवर के मुताबिक़ स्लैब के आधार पर फ़ीस लेते हैं. ब्रोकर जितना ज़्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम बनाते हैं, उनकी फ़ीस उतनी ही कम होती है. एक्सचेंज डेरिवेटिव के साथ सभी सेगमेंट में ट्रेडिंग को बढ़ाने के लिए ये छूट दी जाती है. ब्रोकर निवेशकों से इसी तरह से ट्रेडिंग की मात्रा के आधार पर फ़ीस लेते हैं. निवेशकों पर लगाए गए चार्ज और एक्सचेंज को किए गए पेमेंट के बीच का अंतर उनका एक्सट्रा रेवेन्यू या रिबेट (डिस्काउंट) है.

लेकिन अब, मार्केट रेगुलेटर नहीं चाहता है कि निवेशकों के ख़र्च पर ब्रोकर एक्सट्रा पैसा कमाएं. इसके अलावा, इस बदलाव का मक़सद डेरिवेटिव की भीड़ को कम करना और बाज़ार में ख़र्च या फ़ीस के ढांचे में ज़्यादा पारदर्शिता लाना है.

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इसका ख़ामियाज़ा कौन भुगतेगा?

निवेशकों पर इसका असर: ब्रोकर्स द्वारा मिली छूट उनके डेरिवेटिव बिज़नस रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा है. चूंकि रेगुलेटर पैसे के इस स्रोत पर ब्रेक लगा रहा है, तो ब्रोकरेज को स्पॉट मार्केट में भी हर जगह क़ीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. डिस्काउंट ब्रोकर Zerodha के फ़ाउंडर निखिल कामथ का कहना है कि कंपनी को कैश सेगमेंट में फ़्री ब्रोकरेज को बंद करना पड़ सकता है और F&O सेगमेंट में ब्रोकरेज फ़ीस को बढ़ाना पड़ सकता है. इसलिए, अब बाज़ार के तमाम सेगमेंट के निवेशकों को अब से अपने अनुमानित रिटर्न कैलकुलेट करते समय इस बढ़े हुए ख़र्च को भी ध्यान में रखना होगा.

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ब्रोकरेज पर असर: छूट से होने वाली इनकम में कुछ हद तक कमी ब्रोकरेज कंपनियों के शेयरों में गिरावट से पहले से ही स्पष्ट है, ख़ास तौर से उन कंपनियों में जो डेरिवेटिव पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं. उदाहरण के लिए, Angel One, जो F&O सेगमेंट में लगभग 20 फ़ीसदी की बाज़ार में हिस्सेदारी रखता है और अपने ब्रोकरेज फ़ीस का 70 फ़ीसदी डेरिवेटिव से कमाता है, SEBI सर्कुलर जारी होने के एक दिन बाद ही इसकी क़ीमत में 9 फ़ीसदी की गिरावट देखने को मिली है. Geojit Financial और SMC Global जैसे दूसरे स्टॉक्स में उसी दिन, लगभग 7 और 4 फ़ीसदी तक की गिरावट देखने को मिली. निवेशकों के लिए बढ़ती लागत की वजह से F&O में ट्रेड के वॉल्यूम में भी असर पड़ सकता है, जिससे ब्रोकरेज और BSE जैसे एक्सचेंज के डेरिवेटिव रेवेन्यू में भी कमी आ सकती है.

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