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Debt Fund या बैंक FD, किसमें है ज़्यादा फ़ायदा?

फ़िक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में डेट फ़ंड ज़्यादा बेहतर नज़र आते हैं, जानिए इनके फ़ायदे और नुकसान.

फ़िक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में डेट फ़ंड ज़्यादा बेहतर नज़र आते हैं, जानिए इनके फ़ायदे और नुकसान.

फ़िक्स्ड डिपॉजिट का विकल्प कई जेनरेशन से कम जोखिम वाले निवेशकों की पहली पसंद रहा है. हालांकि, अब डेट फ़ंड के फ़ायदों को नज़रअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है. डेट फ़ंड और‍ फ़िक्स्ड डिपॉजिट काफ़ी हद तक समान हैं और करीबी प्रतिस्‍पर्धी भी हैं. हालांकि, दोनों में रिटर्न, निवेश की सुरक्षा और लिक्विडिटी के लिहाज़ से अंतर है. डेट फ़ंड की तुलना में फ़िक्स्ड डिपॉजिट निवेश की सुरक्षा के लिहाज़ से बेहतर है.

निवेश की सुरक्षा पहले

बैंक फ़िक्स्ड डिपॉजिट करने वालों के लिए निवेश का सबसे सुरक्षित विकल्‍प है. इसमें डिफॉल्‍ट की आशंका न के बराबर है. वहीं डेट फ़ंड में डिफॉल्‍ट नहीं होगा, इस बात की कोई गारंटी नहीं है और इसका रिटर्न बाजार से जुड़ा है. डेट फ़ंड में निवेश करने वाले निवेशकों का डिफ़ॉल्‍ट का सामना करना पड़ सकता है. डेट फ़ंड जिन बॉन्ड में निवेश करता है उसे जारी करने वाली कंपनी को क्रेडिट से जुड़ी समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है. ये तो म्यूचुअल फ़ंड में आपके निवेश की सुरक्षा को लेकर कानूनी बात है. वास्‍तव में फ़ंड इंडस्‍ट्री का नियमन मार्केट रेग्युलेटर SEBI करता है. SEBI फ़ंड इंडस्‍ट्री के काम-काज पर कड़ी नज़र रखता है. SEBI ने निवेश के रिस्‍क प्रोफाइल को कंट्रोल करने के लिए कुछ नियम बना रखे हैं. SEBI के ये उपाय काफी हद तक प्रभावी साबित हुए हैं. लेकिन पिछले सालों में JSPL, एम्टेक ऑटो और हाल में IL&FS और DHFL के साथ समस्‍याएं हुई हैं. डेट फ़ंड के साथ एक और जोखिम जुड़ा हुआ है. डेट फ़ंड्स को इंटरेस्‍ट रेट के जोख़िम का सामना भी करता है. इंटरेस्‍ट रेट बढ़ने पर फ़ंड की वैल्‍यू कम हो जाती है और इंटरेस्‍ट रेट घटने पर फ़ंड की वैल्‍यू बढ़ जाती है.

लिक्विडिटी

लिक्विडिटी की बात करें तो ओपेन एंडेड डेट फ़ंड की रक़म दो से तीन वर्किंड डे में अकाउंट में आ जाती है. वहीं FD का पैसा भी एक से दो दिन में मिल जाता है लेकिन FD से रक़म अगर मेच्‍योरिटी से पहले निकाली जाए तो इस पर जुर्माना देना पड़ता है. कुछ डेट फ़ंड को भुनाने पर एग्जिट लोड और चार्ज लगता है और कुछ डेट फ़ंड पर एग्जिट लोड नहीं लगता है. जैसे सात दिन के बाद बेचने पर लिक्विड फ़ंड पर एग्जिट लोड नहीं लगता है.

रिटर्न

डेट फ़ंड के रिटर्न से साफ़ है कि आप डेट फ़ंड में निवेश करके बैंक FD से ज़्यादा रिटर्न पा सकते हैं. निवेशक क्रेडिट रिस्‍क और इंटरेस्‍ट रिस्‍क को जानते हुए डेट फ़ंड में निवेश करते हैं और बदले में अच्छा रिटर्न हासिल करते हैं. आपको ज़्यादा फ़ायदा उठाने के लिए जोख़िम को लेकर सतर्क रहना चाहिए और सही फ़ंड में निवेश करना चाहिए.

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ये लेख पहली बार फ़रवरी 07, 2020 को पब्लिश हुआ, और मार्च 29, 2024 को अपडेट किया गया.

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