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EV इंडस्ट्री में कैसे नया इतिहास लिखने की तैयारी कर रहा टाटा ग्रुप?

टाटा ग्रुप की कई कंपनियां मिल कर देश के EV सेक्टर में क्रांति लाने का काम कर रही हैं

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इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) अब सुदूर भविष्य की बात नहीं रह गए हैं. ऑटोमोटिव इंडस्ट्री तेज़ी से बदल रही है. हालांकि, इस समय कुल गाड़ियों की बिक्री के मुक़ाबले इलेक्ट्रिक व्हीकल 10 फ़ीसदी से भी कम बिक रहे हैं, मगर 2030 तक ये आंकड़ा 30 फ़ीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है. 2029 तक इस इंडस्ट्री के हर साल 66 फ़ीसदी की दर से बढ़ सकती है, ऐसी ग्रोथ बड़ी संभावनाएं पैदा करती है.

टाटा ग्रुप ने इस बड़ी संभावना को पहचाना है. इस ग्रुप ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहनों की दिशा में तेज़ी से क़दम बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को कई बार दोहराया है.

इस लेख में, समझते हैं कि टाटा ग्रुप की अलग-अलग कंपनियां किस तरह पूरी EV वैल्यू चेन में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं, ताकि इस तेज़ी से विकसित होते सेक्टर में मौक़ों का फ़ायदा उठाया जा सके और एक इंटीग्रेटेड EV ईकोसिस्टम तैयार किया जा सके.

टाटा मोटर्स: EV प्रोडक्शन

टाटा मोटर्स भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट का नेतृत्व कर रहा है, और इलेक्ट्रिक चार-पहिया वाहनों के सेक्टर में इसका 67 फ़ीसदी (FY25 के पहले छह महीने में) का मार्केट शेयर है उनके मौजूदा लाइनअप में कई मशहूर मॉडल हैं, जैसे - नेक्सॉन EV, टिगोर EV, और टियागो EV. टाटा मोटर्स 2025 तक 10 नए EV मॉडल लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जो पैसिंजर और कॉमर्स कमर्शियल, दोनों सेगमेंट कवर करेगा. इसके अलावा, कंपनी बैटरी को बेहतर बनाने के लिए, बेहतर कनेक्टिविटी फ़ीचर्स को जोड़ने, और अलग-अलग चार्जिंग के तरीक़े तैयार करने पर भी ध्यान लगा रही है.

उनकी लग्ज़री ब्रांच, जगुआर लैंड रोवर (JLR), भी एक पूरी तरह से इलेक्ट्रिक भविष्य की ओर बढ़ रही है, जिसके लिए अगले पांच साल में £15 बिलियन ($19 बिलियन) का निवेश योजना बनाई गई है. इसमें मौजूदा प्लांट्स को इलेक्ट्रिक ड्राइव यूनिट्स और बैटरियों का प्रोडक्शन करने के लिए बदला जाएगा, ताकि लग्ज़री इलेक्ट्रिक कारों के प्रोडक्शन के लायक़ बनाया जा सके.

अग्राटास एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशन्स: बैटरी निर्माता

टाटा की EV रणनीति के केंद्र में अग्राटास (Agratas) है, जो गुजरात के सानंद में एक लिथियम-आयन बैटरी गिगा-फ़ैक्ट्री स्थापित कर रहा है. 20 GWh की शुरुआती क्षमता के साथ, ये सुविधा भारत की चीन और कोरिया से बैटरियों के आयात पर निर्भरता को कम करने का लक्ष्य रखती है.

टाटा कैमिकल्स: बैटरी के हिस्सों के निर्माता

अग्राटास का साथ देने के लिए टाटा कैमिकल्स है, जो लिथियम-आयन बैटरी का सामान और रिसाइकलिंग पर ध्यान दे रहा है. कंपनी ने कैथोड एक्टिव मटीरियल्स (cathode active materials) का प्रोडक्शन करने और इस्तेमाल की गई बैटरियों से हाई-प्योरिटी मटीरियल को दोबारा हासिल करने की सुविधाओं में निवेश किया है. ये आयात पर निर्भरता को कम करता है, स्थानीय बैटरी के उत्पादन को बढ़ावा देता है और स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) देता है. इसके अलावा, टाटा कैमिकल्स लिथियम के विकल्प के तौर पर सोडियम-आयन बैटरियों का भी पता लगा रहा है.

टाटा पावर: EV चार्जिंग इंफ़्रास्ट्रक्चर

EV के क़ामयाब होने के लिए चार्जिंग इंफ़्रास्ट्रक्चर ख़ास है. टाटा पावर इस सेक्टर में नेतृत्व कर रहा है, और इसने पहले ही 5,600 से ज़्यादा पब्लिक चार्जर और 25,000 घरेलू चार्जर स्थापित दिए हैं. कंपनी अगले पांच साल में 25,000 और चार्जिंग प्वाइंट जोड़ने की योजना बना रही है. इसके अलावा टाटा पावर, इलेक्ट्रिक बसों और कमर्शियल गाड़ियों के लिए फ़ास्ट-चार्जिंग स्टेशनों के ज़रिए चार्जिंग इंफ़्रास्ट्रक्चर को भी सपोर्ट कर रहा है.

टाटा एलेक्सी: टेक्निकल इंजीनियरिंग और सॉफ़्टवेयर डिज़ाइन

टाटा एलेक्सि बेहतरीन तकनीकी समाधान देता है, जैसे कि ऑटोनॉमस व्हीकल सिस्टम, इलेक्ट्रिफ़िकेशन, और कनेक्टेड कार टेक्नीक. उनके योगदानों में सॉफ़्टवेयर डवलपमेंट, सिम्युलेशन और डिजिटल सिस्टम शामिल हैं, जो गाड़ियों की सुरक्षा और यूज़र अनुभव को बेहतर बनाते हैं.

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS): डिजिटल और कनेक्टेड वाहनों के समाधान

TCS टाटा एलेक्सी के कामों का पूरक है, और कनेक्टेड, ऑटोनॉमस, और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए IT सर्विस और डिजिटल सॉल्यूशन देता है, जिनमें टाटा मोटर्स के EV लाइनअप के लिए फ़्लीट मैनेजमेंट सिस्टम और ग्राहक-केंद्रित एप्लिकेशन शामिल हैं.

टाटा ऑटोकॉम्प सिस्टम्स: EV कम्पोनेंट के निर्माता

टाटा ऑटोकॉम्प सिस्टम्स, जो टाटा मोटर्स की सहायक कंपनी है (23% स्वामित्व), EV कम्पोनेंट जैसे बैटरी पैक, मोटर्स और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स का विकास करती है. टाटा ग्रीन बैटरीज़ और GS युआसा इंटरनेशनल जैसी कंपनियों के साथ ज्वाइंट वेंचर के ज़रिए, टाटा ऑटोकॉम्प बेहतरीन बैटरी सॉल्यूशन और दूसरे अहम EV कम्पोनेंट का प्रोडक्शन करता है. इन साझेदारियों के ज़रिए, कंपनी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए हाई क्वालिटी वाले बैटरियों और पावर सिस्टम्स की आपूर्ति कर रही है, जो EV इंडस्ट्री की ज़रूरतों को पूरा करती है.

टाटा स्टील: EV मटीरियल के निर्माता

टाटा स्टील हल्के और ज़्यादा-ताक़त वाले मटीरियल का विकास कर रही है, जो न केवल EV का कुल वज़न घटाने में मदद करता है, बल्कि उसकी दक्षता भी बढ़ाता है. कंपनी EV में इस्तेमाल के हिसाब से बनाए नए स्टील ग्रेड की स्टडी भी कर रही है, ताकि स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) को बढ़ावा दिया जा सके और EV बनाने में पर्यावरणीय पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके.

निवेशकों के लिए सलाह

जहां टाटा ग्रुप का EV सेक्टर में नज़रिया उम्मीद भरा नज़र आता है, वहीं निवेशकों को कुछ चुनौतियों पर भी विचार करना चाहिए.

टाटा मोटर्स की EV मार्केट में हिस्सेदारी अक्टूबर में घटकर 58 फ़ीसदी पर आ गयी, क्योंकि उसे MG मोटर्स जैसे प्रतिस्पर्धियों का सामना करना पड़ा है. इस सेक्टर को भी कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, ख़ासकर चीन के लिथियम रिफ़ाइनिंग और बैटरी निर्माण में प्रभुत्व की वजह से, जहां वो लागत के मामले में नेतृत्व क़ायम रखे हुए हैं. इसके अलावा, उपभोक्ताओं में रेंज को लेकर चिंता (range anxiety) और चार्जिंग इंफ़्रास्ट्रक्चर पर भी चिंता लगातार बनी हुई हैं.

हालांकि, टाटा की इंटीग्रेटेड अप्रोच और चार्जिंग नेटवर्क जैसे इंफ़्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश, जैसे कि टाटा पावर का चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार, समूह के लंबे समय में विकास के लिए अच्छी स्थिति में ला देता है. निवेशकों के लिए, ये बड़े अवसरों के साथ-साथ कुछ रिस्क भी पेश करता है, जिससे ये साफ़ हो जाता है कि तेज़ी से विकसित हो रहे इस सेक्टर में टाटा ग्रुप की रणनीति के विकास पर ध्यान रखें.

ये भी पढ़िए - टाटा ग्रुप की शानदार क़ामयाबी के हक़दार हैं रतन टाटा

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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