वैल्यू रिसर्च से पूछें

2023 से पहले ख़रीदे गए डेट फ़ंड पर टैक्स कैसे लगता है?

डेट फ़ंड टैक्स नियमों में हाल के बदलाव और उन हालात को समझिए जहां इंडेक्सेशन का फ़ायदा अब भी मिलता है.

डेट फ़ंड टैक्स नियमों में हाल के बदलाव और उन हालात को समझिए जहां इंडेक्सेशन का फ़ायदा अब भी मिलता है.AI-generated image

सारांशः एक पाठक ने 2020 में डेट फ़ंड में पैसा लगाया था और जानना चाहते हैं कि आज भुनाने पर मुनाफ़े पर टैक्स कैसे लगेगा. डेट फ़ंड के टैक्स नियम सिर्फ़ एक साल में दो बार बदले हैं, इसलिए जवाब तीन तारीख़ों पर टिका है, और इनमें से एक तय करती है कि पुराना इंडेक्सेशन का फ़ायदा अब भी मिलेगा या नहीं.

मेरे पास डेट फ़ंड हैं जो 2020 में ख़रीदे थे. मैं जानना चाहता हूं कि अभी बेचूं तो इन पर टैक्स कैसे लगेगा. – पीके गुप्ता

डेट म्यूचुअल फ़ंड लंबे समय से स्थिर रिटर्न देते आए हैं, लेकिन टैक्स में दो बार हुए बदलावों ने इनके मुनाफ़े पर ख़ासकर लंबे समय के निवेशकों के लिए टैक्स का तरीक़ा बदल दिया है. अगर आपने 2020 में डेट फ़ंड ख़रीदे और आज भुनाते हैं तो आपके मुनाफ़े पर सीधे 12.5% टैक्स लगेगा, इंडेक्सेशन का कोई फ़ायदा नहीं मिलेगा.

डेट फ़ंड पर टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि कब ख़रीदा, कितने समय रखा और कब भुनाया. यहां अलग-अलग स्थितियों का छोटा ब्यौरा है:

डेट फ़ंड पर टैक्स की स्थितियां 

अप्रैल 2023 के बाद ख़रीदी गई यूनिट पर इंडेक्सेशन का फ़ायदा नहीं मिलता

ख़रीद की तारीख़
भुनाने की तारीख़ कितने समय रखा टैक्स दर इंडेक्सेशन फ़ायदा
1 अप्रैल 2023 से पहले* 23 जुलाई 2024 से पहले 36 महीने से ज़्यादा 20% मिलता है
1 अप्रैल 2023 से पहले* 23 जुलाई 2024 को या बाद 24 महीने से ज़्यादा 12.50% नहीं मिलता
1 अप्रैल 2023 को या बाद कोई भी तारीख़ कोई भी अवधि इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से लागू नहीं

*अगर रखने की अवधि 36 महीने या 24 महीने (जैसी स्थिति हो) से कम है तो मुनाफ़ा आपकी टैक्स योग्य आमदनी में जुड़ता है और स्लैब दर से टैक्स लगता है.

इंडेक्सेशन का फ़ायदा सिर्फ़ उन डेट फ़ंड पर मिलता है जो 1 अप्रैल 2023 से पहले ख़रीदे गए, 36 महीने से ज़्यादा रखे गए और 23 जुलाई 2024 से पहले भुनाए गए. इंडेक्सेशन आपकी ख़रीद क़ीमत को महंगाई के हिसाब से बढ़ा देता है, जिससे मुनाफ़े का टैक्स वाला हिस्सा कम हो जाता है. लेकिन यह फ़ायदा अब इस तारीख़ को या उसके बाद भुनाने पर नहीं मिलता.

डेट फ़ंड पर टैक्स भले पहले से कम आकर्षक हो गया हो, फिर भी ये दो बातों में आगे हैं: टैक्स को टालने की क्षमता, और बैंक FD से ज़्यादा रिटर्न देने की संभावना.

डेट फ़ंड पर टैक्स तभी लगता है जब आप बेचते हैं. FD के उलट, जहां कमाया गया ब्याज हर साल टैक्स के दायरे में आता है, चाहे वो दोबारा निवेश ही क्यों न हो जाए. टैक्स टालने की यह सुविधा और बेहतर रिटर्न की संभावना मिलकर डेट फ़ंड को उन निवेशकों के लिए एक अच्छा विकल्प बनाते हैं जो समझदारी से वेल्थ बनाना चाहते हैं.

यह भी पढ़ें: क्या घाटे में शेयर बेचने से बच सकता है टैक्स?

ये लेख पहली बार नवंबर 21, 2024 को पब्लिश हुआ.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF: ₹213 की यूनिट में ₹96 प्रीमियम, क्या निवेश करना सही?

पढ़ने का समय 6 मिनटआकार रस्तोगी

Rentomojo IPO: मुनाफ़ा असली, लेकिन क्या वैल्यूएशन बहुत महंगी है?

पढ़ने का समय 7 मिनटLekisha Katyal

Fortis vs Aster: दो हॉस्पिटल चेन, लेकिन क्यों एक-दूसरे अलग हैं दांव?

पढ़ने का समय 7 मिनटसत्यजीत सेन

Hero Motors IPO: EV कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन क्या इतनी क़ीमत चुकाना सही है?

पढ़ने का समय 7 मिनटसत्यजीत सेन

प्रीमियम जो मेरे पिता ने बेच दिया

पढ़ने का समय 5 मिनटधीरेंद्र कुमार

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

गिरावट का मतलब नुक़सान नहीं होता

आपकी स्क्रीन पर लाल रंग का नंबर कोई नुक़सान नहीं है, आप उस पर कोई कदम उठाकर ही उसे पक्का करते हैं

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी