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स्टॉक मार्केट में नुक़सान क्यों होता है? कारण सिर्फ बाज़ार नहीं, आपकी समझ भी है

वित्तीय साक्षरता की कमी और गिरते बाज़ार में डर से भरे फ़ैसले--कैसे छीन लेते हैं इक्विटी निवेश का असली फायदा?

equity-loss-due-to-lack-of-financial-literacyAdobe Stock

"बाज़ार नीचे जा रहा है, सब बेच दो!"
"SIP रोक दो, बाद में देखेंगे."
"अब तो सब डूब गया, कुछ तो निकाल लें."

जब भी बाज़ार में गिरावट आती है, तो बहुत से निवेशकों का मन कुछ ऐसा ही होता है—डरा हुआ, बेचैन, और सबसे बड़ी बात, तैयार नहीं.

भारत में आज करोड़ों लोग SIP और म्यूचुअल फ़ंड में निवेश कर रहे हैं. लेकिन कितने लोग सचमुच समझते हैं कि ये कैसे काम करता है? लोग पैसा लगाते हैं, लेकिन उस पैसे को बढ़ाने की प्रक्रिया को नहीं समझते. और जब बाज़ार गिरता है—जैसा कि अप्रैल 2025 में हो रहा है—तो घबराहट हावी हो जाती है. पिछले एक हफ़्ते में सेंसेक्स और निफ़्टी में 3-4% की गिरावट, मिडकैप और स्मॉलकैप फ़ंड्स में 6-7% तक का नुक़सान—ये आंकड़े डराते ज़रूर हैं, लेकिन क्या ये सचमुच नुक़सान का संकेत हैं? या फिर ये एक मौक़ा है जिसे हम समझ नहीं पा रहे?

बाज़ार का सच: सीमित नज़रिया, बड़ा नुक़सान

भारतीय शेयर बाज़ार का इतिहास बताता है कि शॉर्ट-टर्म के उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं. सेंसेक्स, जो आज 73,000 के आसपास है, ने पिछले 20 सालों में कई बार ऐसी गिरावट देखी है. मिसाल के तौर पर:

  • 2008-09 (ग्लोबल फ़ाइनेंशियल क्राइसिस): सेंसेक्स 21,000 से गिरकर 8,000 के नीचे चला गया—लगभग 60% की गिरावट. लेकिन 2010 तक ये वापस 20,000 पर था.
  • 2020 (कोविड-19): मार्च 2020 में सेंसेक्स क़रीब 41,000 से 25,000 तक लुढ़का, लेकिन साल के अंत तक 47,000 पर पहुंच गया.
  • लंबी अवधि का रिटर्न: 20 साल में सेंसेक्स ने 4,000 से 80,000 की छलांग लगाई है — यानी औसतन करीब 16% सालाना रिटर्न, वो भी उतार-चढ़ाव के बावजूद.

अब अप्रैल 2025 की गिरावट को देखें: 3-4% की गिरावट भले ही डरावनी लगे, लेकिन ये लंबी अवधि के ग्राफ़ में बहुत बड़ा डिप नहीं है. फिर भी, यही वो वक़्त है जब ज़्यादातर निवेशक घबराकर ग़लत फ़ैसले लेते हैं—SIP रोक देते हैं, फ़ंड बेच देते हैं, और नुक़सान को पक्का कर लेते हैं. ये एक "मायोपिक व्यू" यानी संकरे नज़रिए का नतीजा है, जो बाज़ार को ग़लत पढ़ने की वजह बनता है.

लोग क्यों नहीं कमाते इक्विटी से?

  • डर और लालच का खेल: लोग बाज़ार ऊपर होने पर ख़रीदते हैं और नीचे आने पर बेचते हैं—बिल्कुल उल्टा जो करना चाहिए.
  • लंबी अवधि की समझ का अभाव: इक्विटी को लोग शॉर्ट-टर्म रिज़ल्ट का खेल समझ लेते हैं, जबकि इसका असली फ़ायदा 5-10 साल में दिखता है.
  • SIP को ग़लत समझना: गिरावट में SIP में ज़्यादा यूनिट्स मिलते हैं, जो भविष्य में मुनाफ़ा देता है. लेकिन यही वो वक़्त है जब लोग उसे बंद कर देते हैं.
  • बुनियादी बातों की अनदेखी: फ़ॉरवर्ड PE, डिविडेंड यील्ड, क्वालिटी, मैनेजमेंट जैसे अहम फ़ैक्टर्स का मतलब नहीं समझते, जो बाज़ार के वैल्यूएशन को समझने में मदद करते हैं.

हाल की गिरावट का असर: डेटा बोलता है

पिछले एक हफ़्ते में इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड्स में तेज़ गिरावट देखी गई. यहां कुछ प्रमुख कैटेगरी के शॉर्ट-टर्म और मिड- लॉन्ग-टर्म के रिटर्न हैं (अप्रैल 08, 2025 तक) जिन्हें हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं:

इक्विटी फ़ंड की मुख्य कैटेगरी के रिटर्न

फंड कैटेगरी 1-महीने के रिटर्न (%) 3-महीने के रिटर्न (%) 3-साल के रिटर्न (%) 5-साल के रिटर्न (%)
लार्ज कैप फ़ंड 0.33 -5.93 10.41 21.99
मिड कैप फ़ंड 0.03 -12.86 0.43 15.42
स्मॉल कैप फ़ंड -1.08 -16.38 -2.63 13.91
फ़्लेक्सी कैप फ़ंड -0.07 -9.77 -0.38 11.00
ELSS (टैक्स सेवर) -0.08 -9.33 -0.08 12.02
लार्ज एंड मिड कैप फ़ंड -0.02 -11.26 12.55 24.98
नोट: डेटा 8 अप्रैल, 2025 का है, जो वैल्यू रिसर्च फ़ंड मॉनिटर से लिया गया है

वैश्विक कारणों जैसे अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव, तेल की बढ़ती क़ीमतें और भू-राजनीतिक तनाव ने इस गिरावट को हवा दी है. अब ये दावा तो कोई नहीं कर सकता कि ये स्थिति कितने समय तक चलेगी. मगर अगर आप निवेश से बाहर होने का अभी कोई बड़ा फ़ैसला ले लेते हैं तो ये नोशनल (सांकेतिक) लॉस परमानेंट हो जाएगा. वहीं अगर आप बड़ी गिरावटों के ऊपर दिए कुछ दौर देखें तो पता लगेगा कि मार्केट आखिरकार वापस आता ही है.

वित्तीय साक्षरता: ऐप से आगे की बात

आज हर हाथ में तमाम ऐप्स हैं. लेकिन ऐप डाउनलोड करना फ़ाइेंशियल लिट्रेसी या वित्तीय साक्षरता नहीं है.

  • इंफ्लुएंसर की रील देखकर स्टॉक ख़रीदना और अगली गिरावट में बेच देना—ये निवेश नहीं, जुआ है.
  • फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र को "महंगा" समझना सही हो सकता है, लेकिन बिना समझ के किया गया नुक़सान उससे कहीं ज़्यादा महंगा पड़ता है.

समाधान: ज्ञान और संयम ही असली SIP है

  • गिरावट को मौक़ा समझें: बाज़ार नीचे है तो ज़्यादा यूनिट्स ख़रीदें. SIP का यही तो फ़ायदा है.
  • सीखना न छोड़ें: हर महीने थोड़ा निवेश करें, और थोड़ा पढ़ें—बाज़ार को, फ़ंड्स को, जोखिम को.
  • धैर्य रखें: निवेश अगर "उबाऊ" लग रहा है, तो आप सही रास्ते पर हैं. इक्विटी का जादू वक़्त के साथ ही दिखता है.

ये भी पढ़ेंः क्या आपको NFO में निवेश करना चाहिए?

आखिरी बात

इक्विटी में निवेश की एक बात गांठ बांधने वाली है, वो ये कि शॉर्ट-टर्म की ज़रूरत का पैसा इसमें नहीं लगाना चाहिए. अगर मौजूदा गिरावट के दौर में ये पैसा आपकी अभी की ज़रूरत का है, तो आपने पहले ही देर कर दी है. अब ज़रूरत ये तय करने की है कि आप इस पैसे के बिना रह सकते हैं या नहीं. और फिर अगर आपने हाल ही में निवेश शुरू किया है तभी आपका पोर्टफ़ोलियो मुश्किल में लग रहा होगा. अगर ये निवेश पुराना है तो कुछ मुनाफ़ा कम हुआ होगा मगर ये अब भी फ़ायदे में ही होगा.

तो, क्या आपने भी हाल की गिरावट में कोई फ़ंड बेचा? SIP रोक दी? तो अब रुकें, सोचें, और फिर से शुरू करें. सेंसेक्स का इतिहास बताता है कि हर बड़ी गिरावट के बाद उछाल आया है. ये वक़्त अपने पोर्टफ़ोलियो को रिबैलेंस करने का हो सकता है—डरने का नहीं. क्योंकि इक्विटी का असली फ़ायदा वही उठाता है जो धैर्य रखता है, न कि जो डरकर भागता है.

एक बड़ा सवालः क्वालिटी इन्वेस्टमेंट कैसे तलाशें

इसके लिए काफ़ी रिसर्च की ज़रूरत होती है. कई अहम पैमानों पर कंपनियों को परखना चाहिए. यहां तक कि फ़ंड में निवेश करना चाहते हैं तो उन्हें भी निवेश शुरू करने से पहले सही तरीक़े से तौलना ज़रूरी है.

यहीं वैल्यू रिसर्च आपकी मदद कर सकता है.

कैसे चुनें Best Mutual Fund

अच्छे रिटर्न के लिहाज़ से म्यूचुअल फ़ंड एक बेहतर विकल्प है. हक़ीक़त में, हर कोई अपने लिए बेस्ट म्यूचुअल फ़ंड ही चुनना चाहता है. इस मामले में वैल्यू रिसर्च धनक आपकी मुश्किल आसान कर सकता है. इसमें निवेश के लिए सबसे अच्छे लगने वाले फ़ंड को फ़ाइव स्टार रेटिंग दी जाती है. इस तरह से हम 1 स्टार से 5 स्टार तक की रेटिंग देते हैं. और, जिन फ़ंड्स को निवेश के लायक़ नहीं मानते है, उन्हें कोई रेटिंग नहीं दी जाती. हमारे इस फ़ीचर को इस्तेमाल करिए और निवेश के ज़रिए खुद को आर्थिक तौर पर सफ़ल बनाएं.

अगर, आप आंखें मूंदकर दमदार रिटर्न देने वाला कोई फ़ंड चुनना चाहते हैं तो आप हमारी म्यूचुअल फ़ंड एडवाइज़र सर्विस भी ले सकते हैं. इस सर्विस में पोर्टफ़ोलियो प्लानर, एनेलिस्ट की पसंद और अलर्ट जैसी बेहतरीन सर्विस शामिल हैं. इसके अलावा, यहां पर आपको फ़ंड्स के बारे में 'धनक की राय' भी नज़र आएगी.

ये भी पढ़ेंः 10 साल में सबसे ज़्यादा रिटर्न देने वाले म्यूचुअल फ़ंड कौन रहे?

कैसे चुनें सही स्टॉक

बाज़ार की आज की गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए निराशा का कारण नहीं बननी चाहिए. बल्कि, इसे एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए. वैल्यू रिसर्च में हम यही कहते हैं कि बाज़ार की अल्पकालिक अस्थिरता से ऊपर उठकर अपने दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. समझदारी से निवेश करके और धैर्य का परिचय देकर, लंबी अवधि के निवेशक बाज़ार की इस गिरावट का सफलतापूर्वक लाभ उठा सकते हैं और अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं.

अब सवाल उठता है कि सही स्टॉक को कैसे चुना जाए? क्या एक आम स्टॉक निवेशक के लिए किसी ख़ास स्टॉक का एनालिसिस करना संभव है? असल में ये एक ख़ासा मुश्किल काम है. इसके लिए लंबा अनुभव और पैनी नज़र की ज़रूरत होती है. इस मामले में हमारी वैल्यू रिसर्च स्टॉक रेटिंग और हमारी सर्विस वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र आपके काफ़ी काम आ सकती है, जिनके बारे में हम आपको आगे बता रहे हैं.

वैल्यू रिसर्च स्टॉक रेटिंग

वैल्यू रिसर्च स्टॉक रेटिंग हमारा अपना डेटा पर आधारित स्टॉक रेटिंग सिस्टम है, जिसका आधार है मार्केट में हमारा 30 साल का अनुभव है. इसका मक़सद आपके स्टॉक निवेश को आसान बनाना और अच्छे शेयरों को लेकर आपको गाइड करना है. वैल्यू रिसर्च स्टॉक रेटिंग से किसी भी कंपनी की कमाई, क्वालिटी, ग्रोथ और वैल्यूएशन का एक साथ पता चल जाता है . अलग से बारीक़ी से जांच के लिए स्टॉक रेटिंग के अलग-अलग पैमाने भी मौजूद हैं.

  • क्वालिटी: अच्छे रिटर्न रेशियो, कुशल कैपिटल मैनेजमेंट, अच्छी बैलेंस शीट आदि.
  • ग्रोथ: हाल के और पिछले पांच साल के टॉप-लाइन और बॉटम-लाइन नंबरों की मज़बूत ग्रोथ. इसके साथ-साथ हम बुक वैल्यू में ग्रोथ का भी ध्यान रखते हैं.
  • वैल्यूएशन: P/E , P/B डिविडेंड यील्ड, PEG जैसे वैल्यूएशन मेट्रिक्स को ध्यान में रखा जाता है.

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जानिए, ये आपके निवेश करने के तरीक़े को बदल सकता है

भारत में ज़्यादा डिविडेंड देने वाले शेयर एक जाल के समान हैं. स्थिर क़ीमतें, अविश्वसनीय आय, समय के साथ भुगतान में कमी. लेकिन, ऐसा क्यों है? असल में, ज़्यादातर हाई यील्ड वाली कंपनियां अतीत ठहरे हुए व्यवसायों में फंसी हुई हैं, जिनकी कोई वास्तविक ग्रोथ नहीं है.

डिविडेंड ग्रोथ पोर्टफ़ोलियो बनाए, जो एक गेम-चेंजर है. हमने ऐसी 10 असाधारण कंपनियों को चुना है जो सिर्फ़ डिविडेंड का भुगतान नहीं करतीं, बल्कि वे उन्हें बढ़ाती भी हैं. वास्तविक प्रॉफ़िट और मज़बूत कैश फ़्लो वाले ये बिज़नस साल दर साल बढ़ती आमदनी और पूंजी में दमदार ग्रोथ सुनिश्चित करती हैं.

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ये भी पढ़ें: आपको वैल्यू रिसर्च स्टॉक रेटिंग क्यों चुननी चाहिए

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डिस्क्लेमर: ये लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. शेयर बाज़ार में निवेश जोखिम भरा होता है और निवेशकों को कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना चाहिए.

ये भी पढ़ें: मिट्टी के ढेर में हीरे

ये लेख पहली बार अप्रैल 09, 2025 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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