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Nasdaq ETF अब महंगे नहीं हैं. क्या ये निवेश का सही समय है?

जानिए, क्या प्रीमियम कम होने के साथ, अब आपको इनमें निवेश पर विचार करना चाहिए

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  • वैश्विक डाइवर्सिफ़िकेशन- साधारण शब्दों में अमेरिका जैसे ग्लोबल मार्केट्स में निवेश- से आपको उन तेज़ी से बढ़ती कंपनियों और क्षेत्रों में अवसर मिल सकता है, जो भारत में मौजूद नहीं हैं. इनमें एनवीडिया, गूगल, फेसबुक जैसी दिग्गज कंपनियां आती हैं.
  • ये करने का सबसे आसान तरीक़ा क्या है? विदेशी सिक्योरिटीज़ और अमेरिका के नैस्डैक जैसे इंडेक्सों में निवेश करने वाले म्यूचुअल फ़ंड्स और ETF (एक्सचेंज-ट्रेडेड फ़ंड्स) के ज़रिए ऐसा किया जा सकता है.
  • लेकिन इसमें एक पेंच है. ये फ़ंड्स और ETF विदेश में सीमित राशि ही निवेश कर सकते हैं. ये सीमा पूरी होने पर, वे नए या मौजूदा निवेश स्वीकार करना बंद कर देते हैं. (हम इस पर अगले सेक्शन में विस्तार से बात करेंगे.)
  • इसीलिए कई भारतीय निवेशक भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टेड इन ETF को ख़रीद रहे हैं.
  • हालांकि, भारी मांग के कारण, अमेरिका-केंद्रित ETF (जैसे नैस्डैक ETF) प्रीमियम पर यानी अपनी वास्तविक क़ीमत से ज़्यादा पर कारोबार कर रहे थे. कुछ समय पहले, कुछ नैस्डैक-आधारित ETF अपने वास्तविक NAV (नेट एसेट वैल्यू) से 24 फ़ीसदी तक ज़्यादा पर कारोबार कर रहे थे.
  • लेकिन समझदार निवेशकों के लिए अच्छी ख़बर है. हाल के दिनों में ये प्रीमियम कम हुआ है. इसका मतलब, अब नैस्डैक-केंद्रित ETF में निवेश का अच्छा समय हो सकता है.

लेकिन पहले, आइए समझते हैं कि नैस्डैक ETF का प्रीमियम इतना ज़्यादा क्यों था और अगर कुछ महीने पहले आपने इन्हें ख़रीदा होता तो आप नुक़सान में रह सकते थे.

नैस्डैक ETF इतने महंगे क्यों थे?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने म्यूचुअल फ़ंड्स के लिए विदेशी सिक्योरिटीज़ में निवेश की कुल सीमा 7 अरब डॉलर तय की है. 2022 की शुरुआत में ये सीमा अपनी अधिकतम राशि के करीब पहुंच गई थी, जिसके बाद SEBI ने फ़ंड हाउसों को ऐसी स्कीम्स में नया निवेश स्वीकार करने से रोक दिया. इन बंदिशों के कारण, ETF नए यूनिट्स जारी नहीं कर पाए, जिससे यूनिट्स की कमी हो गई और निवेशकों के लिए सप्लाई सीमित हो गई.

इसके अलावा, विदेशी ETF में निवेश के लिए 1 अरब डॉलर की अलग सब-लिमिट भी है. ये सीमा (थ्रेसहोल्ड) भी 2024 की शुरुआत में लगभग पूरी होने वाली थी, जिसके चलते SEBI ने 1 अप्रैल, 2024 से इसी तरह का प्रतिबंध लागू किया था. नतीजतन, पहले विदेशी ETF में निवेश करते रहे फंड ऑफ फंड्स (FoFs), आगे ऐसा नहीं कर पाए. उनका एकमात्र विकल्प था कि वे सेकेंडरी मार्केट में उपलब्ध मौजूदा ETF यूनिट्स में निवेश करें, जिससे मांग और बढ़ गई. इसके चलते ETF की प्रीमियम क़ीमतों में और बढ़ोतरी हो गई.

कुल मिलाकर, सप्लाई में कमी और भारी मांग के चलते निवेशकों को इसमें शामिल होने के लिए प्रीमियम चुकाना पड़ा. आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं. ये नैस्डैक-आधारित ETF न सिर्फ़ प्रीमियम पर कारोबार कर रहे थे, बल्कि सीमा लागू होने के बाद तो वे प्रीमियम पर ही बने हुए थे.

मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक 100 ETF का उदाहरण लीजिए. 1 अप्रैल, 2024 (जब इंडस्ट्री ने ओवरसीज ETF में निवेश की रेगुलेटरी कैप को छुआ) से ये 33.7 फ़ीसदी समय के दौरान 5 फ़ीसदी से ज़्यादा प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है.

मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक Q50 ETF के साथ ये और भी चौंकाने वाला है. ये 1 अप्रैल, 2024 से 50 फ़ीसदी दिनों में 5 फ़ीसदी प्रीमियम के निशान से ऊपर कारोबार कर रहा है.

ये भी पढ़ेंः आज ₹10 लाख करने हैं निवेश तो कैसे और कहां करें?

प्रीमियम पर ETF ख़रीदना क्यों ग़लत है?

ETF के साथ पेंच ये है कि हमारा रिटर्न इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे किस क़ीमत पर ख़रीदते और बेचते हैं, न कि ETF के NAV पर.

आइए, इस असल उदाहरण पर ग़ौर करते हैं. 31 दिसंबर, 2024 को मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक 100 ETF ₹214.2 पर कारोबार कर रहा था, जबकि इसका NAV केवल ₹175.7 था-ये 22 फ़ीसदी प्रीमियम था. अब 13 मई, 2025 के आंकड़ों पर ग़ौर करें तो ये प्रीमियम गायब हो चुका है. इसका नतीजा क्या रहा? अगर आपने उस बढ़ी हुई क़ीमत पर ₹1 लाख निवेश किए होते, तो आपकी होल्डिंग इस समय केवल ₹82,391 की होती, यानी आपको 17.6 फ़ीसदी नुक़सान हो चुका होता. इस दौरान, वास्तविक नैस्डैक 100 इंडेक्स (जैसा कि NAV में दिखता है) ने 0.5 फ़ीसदी की बढ़त हासिल की.

मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक 100 ETF: एक प्रीमियम चुकाने का दर्द

प्रीमियम कम होने से रिटर्न घट सकता है

तारीख़ NAV (₹) प्राइस (₹) प्रीमियम
31 दिसंबर 2024 175.7 214.2 22.0%
13 मई 2025 176.5 176.5 0.0%
NAV में बदलाव और प्राइस 0.5% -17.6% -

मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक Q50 ETF के साथ भी यही कहानी है. 19 जुलाई, 2024 को ये ETF ₹78 पर कारोबार कर रहा था, जबकि इसका NAV केवल ₹62 था. यानी ये 25 फ़ीसदी प्रीमियम पर था. 13 मई, 2025 तक आते-आते ये प्रीमियम घटकर केवल 1.8 फ़ीसदी रह गया.

इसका मतलब, NAV के आधार पर, आपका ₹1 लाख का निवेश ₹1.13 लाख तक बढ़ना चाहिए था यानी इस पर आपको 13.5 फ़ीसदी का शानदार फ़ायदा होता. लेकिन, आपने इसे 25 फ़ीसदी प्रीमियम पर ख़रीदा था, इसलिए आपका निवेश वास्तव में केवल ₹92,412 का होता यानी ये 7.6 फ़ीसदी का नुक़सान था. जी हां, भले ही फ़ंड की वास्तविक वैल्यू (NAV) बढ़ी हो, लेकिन आपने पैसा गंवाया. यही प्रीमियम चुकाने का दर्द है.

मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक Q50 ETF: NAV में बढ़त, पोर्टफ़ोलियो में नुक़सान

प्रीमियम कम होने से रिटर्न घट सकता है

तारीख़ NAV (₹) प्राइस (₹) प्रीमियम
19 जुलाई 2024 62.4 78 25.0%
13 मई 2025 70.8 72.1 1.8%
NAV में बदलाव और प्राइस 13.5% -7.6% -

ये भी पढ़ेंः क्या आपको इनकम प्लस आर्बिट्राज़ फ़ंड में निवेश करना चाहिए?

भारतीय निवेशकों के लिए अच्छी ख़बर

याद है, हमने कहा था कि हाल के दिनों में ये प्रीमियम कम हुए हैं? जी हां, नैस्डैक ETF का मार्केट प्राइस और NAV लगभग एक जैसे हो गए हैं.

प्रीमियम खत्म होने के साथ, अब नैस्डैक-आधारित ETF पर विचार करने का कहीं ज़्यादा समझदारी भरा समय है.

हालांकि, मिराए एसेट NYSE FANG+ ETF और मिराए एसेट S&P 500 टॉप 50 ETF जैसे कुछ अन्य अमेरिका-केंद्रित ETF अभी भी भारी प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं, जो क्रमशः 13.3 फ़ीसदी और 15.4 फ़ीसदी (13 मई, 2025 तक) है.

इसलिए, निवेश करने से पहले कुछ बातें ध्यान में रखें:

  • हमेशा ख़रीदने से पहले NAV ज़रूर देखें . इससे भी बेहतर, iNAV (इंट्राडे NAV) देखें, जो ज़्यादा रीयल-टाइम अनुमान देता है. बस ध्यान रखें कि अंतरराष्ट्रीय ETF के लिए, iNAV अक्सर संबंधित स्टॉक्स की पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस पर आधारित होता है.
  • ज़्यादा प्रीमियम से बचें. अगर ETF अपने NAV से 5 फ़ीसदी से ज़्यादा ऊपर कारोबार कर रहा है, तो रुकें. आप उसकी वास्तविक क़ीमत से ज़्यादा चुका रहे हैं-और जब क़ीमतें और NAV फिर से संरेखित होंगे, तो आपके रिटर्न को नुक़सान हो सकता है.

निष्कर्ष

इंटरनेशनल ETF आपको दुनिया की शीर्ष टेक कंपनियों तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं-लेकिन टाइमिंग मायने रखती है.

महज मार्केट को ट्रैक न करें. प्रीमियम पर नज़र रखें. असल में, ETF की दुनिया में, आप जो चुकाते हैं, वह उतना ही मायने रखता है, जितना आप ख़रीदते हैं.

ये भी पढ़ेंः Nasdaq बढ़ा 9%, मेरा ETF सिर्फ़ 1.7%! क्या ये धोखा है?

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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