The Index Investor

Gold ETFs के NAV अलग-अलग क्यों होते हैं?

किसी ETF की अंडरलाइंग एसेट्स की वैल्यूएशन से ही उसका NAV तय होता है

किसी ETF की अंडरलाइंग एसेट्स की वैल्यूएशन से ही उसका NAV तय होता हैKhyati Simran Nandrajog/AI-generated image

सारांशः क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही धातु को ट्रैक करने वाले दो Gold ETFs के NAV अलग क्यों होते हैं? यह लेख उस फ़र्क़ की चंद वजहों को सामने रखता है और यह भी बताता है कि कम NAV का मतलब ज़रूरी नहीं कि फ़ंड सस्ता या बेहतर हो.

अलग-अलग Gold ETFs के NAV अलग क्यों होते हैं? – पीआर दिलीप

अगर सभी Gold ETFs आख़िरकार एक ही धातु को ट्रैक करते हैं, तो फिर किसी का NAV (नेट एसेट वैल्यू) कुछ हज़ार रुपये और किसी का बहुत कम क्यों होता है? यह फ़र्क़ आमतौर पर फ़ंड की क्वालिटी से नहीं, बल्कि हर फ़ंड के स्ट्रक्चर से तय होता है.

Gold ETFs के NAV में फ़र्क़ की तीन मुख्य वजहें हैं.

#1 गोल्ड की मात्रा

अलग-अलग ETFs में एक यूनिट जितने गोल्ड को दर्शाती है, वो अलग-अलग होता है. ज़्यादातर Gold ETFs में एक यूनिट एक ग्राम गोल्ड के बराबर होती है, लेकिन कुछ फ़ंड्स एक यूनिट को इससे कम मात्रा से जोड़ते हैं. जिस फ़ंड में एक यूनिट आधे ग्राम के बराबर हो, उसका NAV स्वाभाविक रूप से एक ग्राम वाले फ़ंड से लगभग आधा होगा, चाहे अंडरलाइंग गोल्ड बिल्कुल एक जैसा हो.

#2 डेट और कैश में हिस्सेदारी

Gold ETF मुख्य रूप से गोल्ड में निवेश करता है, लेकिन लिक्विडिटी के लिए एक छोटा हिस्सा डेट, कैश या कैश इक्विवेलेंट्स में भी रख सकता है. NAV की गणना सभी अंडरलाइंग एसेट्स (गोल्ड, कैश और डेट) की कुल वैल्यू को यूनिट्स की संख्या से भाग देकर होती है. इस मिश्रण में जो भी फ़र्क़ होता है, वो NAV में भी दिखता है.

#3 एक्सपेंस रेशियो

ETFs हर रोज़ फ़ंड से ख़र्चे काटते हैं, इसलिए ख़र्चों में फ़र्क़ सीधे NAV पर असर डालता है. एक्सपेंस रेशियो जितना ज़्यादा होगा, NAV उतना कम होगा और इसका उलटा भी सच है.

यह भी पढ़ेंः ETF और FoF में क्या अंतर है

ये लेख पहली बार जून 18, 2026 को पब्लिश हुआ.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


दूसरी कैटेगरी