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गोल्ड रेट आज 22 मई 2025: फिर तेज़ी राह पर गोल्ड, जानिए नई क़ीमतें

मिडिल ईस्ट में टेंशन सहित कई वजहों फिर मज़बूत हो रहा गोल्ड

मिडिल ईस्ट में टेंशन सहित कई वजहों फिर मज़बूत हो रहा गोल्डAdobe Stock

इंटरनेशनल मार्केट की तर्ज पर गुरुवार, 22 मई 2025 को भारतीय बाज़ार में भी गोल्ड में मज़बूती देखने को मिल रही है. शुरुआती कारोबार में MCX पर गोल्ड ₹718 बढ़कर ₹96,318 प्रति दस ग्राम के स्तर पर पहुंच गया. हालांकि, 10.40 बजे ₹96,220 के स्तर पर बना हुआ है. वहीं,सिल्वर में भी मज़बूती बनी हुई है, जो फ़िलहाल ₹1070 मज़बूत होकर ₹99,315 प्रति किग्रा के स्तर पर है. कुल मिलाकर, MCX गोल्ड का आउटलुक पॉजिटिव लग रहा है.

मिडिल ईस्ट में टेंशन

असल में एक दिन पहले सीएनएन की एक रिपोर्ट के बाद गोल्ड में तेज़ी देखने को मिल रही है, जिसमें बताया गया था कि इजरायल ईरानी परमाणु स्थलों पर हमला करने की तैयारी कर रहा है. रिपोर्ट में इंटरसेप्ट किए गए कम्युनिकेशन, इजरायली सैन्य मूवमेंट और आंतरिक सरकारी संदेशों का हवाला दिया गया है, लेकिन यह भी कहा गया है कि इजरायल ने अभी तक अंतिम फैसला नहीं किया है.

ऐसी ख़बरें हैं कि अगर इजरायल इस तरह के हमले की पुष्टि करता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर गोल्ड पर दांव लगा सकते हैं, जिससे क़ीमतें और बढ़ सकती हैं.

ट्रम्प के लिए बढ़ीं चुनौतियां

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को न केवल विदेश में बल्कि घर में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. टैक्स में प्रस्तावित बदलावों सहित उनकी सरकार के फिस्कल बिल को समर्थन हासिल करने के लिए जूझना पड़ रहा है. ख़ासकर स्टेट और लोकल टैक्स (SALT) कटौती सीमा को लेकर असहमति के कारण सांसदों के साथ बैठकों के दौरान निराशा बढ़ी, जहां कुछ रिपब्लिकन ने बहुत अधिक सीमा की मांग की. इस गतिरोध के चलते निवेशकों की नज़र में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिरता के बारे में संदेह पैदा हुआ है.

कुल मिलाकर, जब राजनीतिक भरोसा कमज़ोर होता है, तो डॉलर गिरता है और स्थिर एसेट्स के तौर पर देखा जाने वाला गोल्ड ज़्यादा आकर्षक हो जाता है.

सोने की क़ीमतों में तेज़ी के 4 प्रमुख कारण

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: अमेरिका-चीन ट्रेड टेंशन और जिओपॉलिटिकल अस्थिरता के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं, जिससे मांग बढ़ी है.

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: 2025 में केंद्रीय बैंकों ने 244 टन सोना ख़रीदा है, जिससे आपूर्ति पर दबाव बढ़ा और क़ीमतों में उछाल आया.

मुद्रास्फीति और कमजोर डॉलर: ऊंची मुद्रास्फीति और अमेरिकी डॉलर की कमज़ोरी ने सोने की मांग को बढ़ावा दिया, क्योंकि ये महंगाई के खिलाफ बचाव का साधन है.

त्योहारी मांग: भारत में शादी-विवाह और त्योहारों का मौसम होने के कारण सोने की स्थानीय मांग में बढ़ोतरी हुई, जिससे क़ीमतों को समर्थन मिला है.

डिस्क्लेमर: यहां केवल सामान्य जानकारी दी गई है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें. यह समाचार विभिन्न वित्तीय स्रोतों और बाज़ार डेटा पर आधारित है.

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