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नेट एसेट में 37% ग्रोथ के साथ बैंकिंग फ़ंड्स की बढ़ी धाक! क्या निवेश का सही मौक़ा है?

आइए जानते हैं...

आइए जानते हैं...Aditya Roy/AI-Generated Image

बैंकिंग स्टॉक जैसे HDFC और ICICI निवेशकों को बहुत पसंद हैं. लेकिन क्या बैंकिंग फ़ंड्स हमेशा बाज़ार से बेहतर रिटर्न देते हैं? चलिए पता करते हैं.

प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, निवेशकों ने सिर्फ़ बैंकिंग और फ़ाइनेंशियल सेक्टर में निवेश करने वाले म्यूचुअल फ़ंड्स में क़रीब ₹48,000 करोड़ लगाए हैं. ये पिछले साल की तुलना में 37% की बढ़ोतरी (मई 2025) है.

इस बढ़त से बैंकिंग शेयरों के प्रति लोगों की पसंद दिखती है, जिन्होंने इस साल अच्छा प्रदर्शन किया है. बाहर से देखने पर ये पसंद सही लगती है. भारतीय बैंक मज़बूत हैं, लोन की मांग अच्छी है, और एसेट की क्वालिटी स्थिर है. लेकिन क्या सिर्फ़ एक सेक्टर पर इतना बड़ा दांव लगाना ठीक है?

वैल्यू रिसर्च में, हमारा जवाब आमतौर पर "नहीं" होता है. क्योंकि एक बेहतर विकल्प मौजूद है.

तो, चलिए जानते हैं कि क्यों.

रिटर्न इतने अच्छे नहीं

अभी 66 बैंकिंग और फ़ाइनेंशियल सेक्टर के म्यूचुअल फ़ंड्स और ETF हैं. लेकिन उनका लंबे समय का ट्रैक रिकॉर्ड बहुत ख़ास नहीं है:

  • पिछले दस सालों में, बैंकिंग फ़ंड्स ने पांच साल के रोलिंग रिटर्न में 82% बार फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स से कम रिटर्न दिया. आसान भाषा में, अगर आपने पिछले दस सालों में किसी भी समय बैंकिंग फ़ंड और फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में पैसा लगाया और उसे पांच साल तक रखा, तो 10 में से 8 से ज़्यादा मामलों में, फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड ने बेहतर प्रदर्शन किया होगा.
  • इनका औसत पांच साल का रिटर्न सिर्फ़ 10.2% रहा, जो निफ़्टी 50 TRI के 13% से कम है.
  • साथ ही, बैंकिंग फ़ंड्स ने सिर्फ़ 53% बार 10% रिटर्न का आंकड़ा पार किया. यानी, लगभग आधे मामलों में, बैंकिंग फ़ंड्स 10% रिटर्न भी नहीं दे पाए. अब फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स से तुलना करें, जिन्होंने 72% बार 10% या उससे ज़्यादा सलाना रिटर्न दिया.

इसका मतलब है कि फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स ने लगातार अच्छा रिटर्न दिया, जबकि बैंकिंग फ़ंड्स का प्रदर्शन ज़्यादा उतार-चढ़ाव भरा रहा.

आइए देखें कि बीते 10 साल में रिटर्न कैसे रहे:

पांच साल का रोलिंग रिटर्न रेंज बैंकिंग फ़ंड्स फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स
0% से कम 2.1% 0.4%
0 से 5% 14.5% 3.9%
5 से 10% 30.4% 23.8%
10 से 15% 35.9% 31.4%
15 से 20% 13.2% 36.0%
20% से ज़्यादा 3.9% 4.4%

निवेशकों के लिए सीख

डायवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स के उलट जो आपके पैसे को कई इंडस्ट्री में बांटते हैं, सेक्टोरल और थीमैटिक फ़ंड अपना सारा पैसा अर्थव्यवस्था के एक हिस्से पर-जैसे बैंकिंग, फ़ार्मा, IT, या इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर लगाते हैं. ये उन्हें जोख़िम भरा दांव बनाता है: जब सेक्टर में तेज़ी हो, तो वो शानदार रिटर्न देते हैं, लेकिन जब स्थिति ख़राब हो, तो वे जल्दी गिर जाते हैं.

हमने पहले भी ऐसा देखा है. 2010 के दशक में, इन्फ़्रास्ट्रक्चर और पॉवर सेक्टर फ़ंड्स की लोकप्रियता बहुत ज़्यादा थी, लेकिन नियमों में देरी, रुके हुए प्रोजेक्ट और कर्ज़ ने उन्हें सालों तक नीचे खींच लिया. कई निवेशक जो देर से निवेश करने लगे, वो एक दशक तक ख़राब रिटर्न के साथ फंस गए.

यही बात बैंकिंग फ़ंड्स पर लागू होती है. क्या आपको वो समय याद है जब कई बैंकिंग फ़ंड्स ने ख़राब प्रदर्शन किया क्योंकि NPA (ख़राब लोन) बढ़ गए थे? उस समय, बैंकिंग फ़ंड्स की हालत ठीक नहीं थी.

आपके लिए बेहतर विकल्प

अच्छी बात ये है कि अगर आपके पास बैंकिंग फ़ंड नहीं है, तब भी आपके पोर्टफ़ोलियो में इस सेक्टर की काफ़ी हिस्सेदारी हो सकती है. 30 मई 2025 तक, फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स ने अपने पोर्टफ़ोलियो का 26% फ़ाइनेंशियल सेक्टर में रखा है - बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां, NBFC और फ़िनटेक. ये ऐलोकेशन आपको सिर्फ़ एक सेक्टर पर दांव लगाने के जोख़िम के बिना सेक्टर एक्सपोज़र देता है. ये सिर्फ़ एक इंडस्ट्री पर भरोसे के बिना, फ़ायदा मिलने जैसा है.

हमारा नज़रिया

हम डायवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स को पसंद करते हैं, जो लंबे समय तक वैल्थ बढ़ाने के लिए बेहतर हैं. फ़्लेक्सी-कैप और मल्टी-कैप फ़ंड्स बैंकिंग स्टॉक में पर्याप्त हिस्सेदारी देते हैं, साथ ही सेक्टर के उतार-चढ़ाव से आपको बचाते भी हैं.

तो हां, बैंकिंग सेक्टर में तेज़ी हो सकती है. लेकिन समझदारी से निवेश का मतलब ये नहीं है कि आप जो चल रहा है उसका पीछा करें बल्कि डायवर्सिफ़िकेशन और अनुशासन के साथ निवेश करना है.

ये भी पढ़िए: 3 साल में 20% रिटर्न: क्या ये मुमक़िन है?

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