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सारांशः HDFC फ़्लेक्सी कैप सिर्फ़ बैंकों पर ही दोगुना दांव नहीं लगा रही है. इसके जुलाई के पोर्टफ़ोलियो में कुछ और लार्ज-कैप शेयरों में भी बढ़ोतरी हुई है, और एक नई कंपनी में भी हिम्मत भरा दांव लगाया गया है. पूरी लिस्ट जानना चाहते हैं? मुफ़्त में रजिस्टर करें और पढ़ें.
भारत के सबसे बड़े फ़्लेक्सी-कैप फ़ंडों में से एक, HDFC फ़्लेक्सी कैप ने जुलाई में एक बड़ा क़दम उठाते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज़ से पूरी तरह बाहर निकलने का फै़सला किया. फ़ंड ने भारत की सबसे क़ीमती कंपनी के अपने 10 लाख शेयर बेच दिए, जैसा कि इसके ताज़ा पोर्टफ़ोलियो ख़ुलासे में सामने आया है.
यह कोई छोटा-मोटा बदलाव करने वाला फ़ंड नहीं है. HDFC फ़्लेक्सी कैप, पराग पारिख फ़्लेक्सी कैप के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड है, और देश में सबसे ज़्यादा ट्रैक किए जाने वाले एक्टिव इक्विटी फ़ंड्स में से एक है.
HDFC फ़्लेक्सी कैप फ़ंड के बारे में
यह फ़ंड अपने शानदार लंबे समय के रिकॉर्ड की वजह से देश के सबसे बड़े एक्टिव इक्विटी फ़ंड्स में से एक बन गया है. पिछले पांच साल में, इसका औसत रोज़ाना पांच साल का रोलिंग रिटर्न 17.7 फ़ीसदी रहा है, जो इसके बेंचमार्क, निफ़्टी 500 TRI के 16 फ़ीसदी से काफ़ी बेहतर है.
इसका आसान मतलब क्या है? रोलिंग रिटर्न बताता है कि फ़ंड हर संभावित निवेश की अवधि में कैसा प्रदर्शन करता है, न कि सिर्फ़ तीन या पांच साल जैसे तय समय पर. मिसाल के तौर पर, अगर आपने 1 अगस्त, 2018 को HDFC फ़्लेक्सी कैप में पैसा लगाया और इसे 1 अगस्त, 2023 तक रखा, तो यह एक पांच साल का रिटर्न है. इसी तरह, 2 अगस्त, 2018 से 2 अगस्त, 2023 तक, और पिछले पांच साल के हर दिन के लिए. कुल मिलाकर, आपको ऐसे 1,827 पांच साल के रिटर्न पॉइंट मिलते हैं.
ख़ास बात यह है कि इस दौरान HDFC फ़्लेक्सी कैप ने एक बार भी नकारात्मक पांच साल का रिटर्न नहीं दिया. हर बार निवेशकों को मुनाफ़ा हुआ. बहुत कम फ़ंड ऐसी स्थिरता दिखा सकते हैं.
इसी प्रदर्शन की वजह से जो 1995 में शुरू हुआ यह फ़ंड, जिसे अब रोशी जैन और ध्रुव मुच्छल संभालते हैं, वैल्यू रिसर्च पर पांच 5 स्टार रेटिंग वाला फ़ंड है.
जुलाई में बड़े दांव: बैंकिंग सेक्टर और उससे आगे
जुलाई में पोर्टफ़ोलियो में हुए बदलाव बताते हैं कि फ़ंड मैनेजर अब कहां भरोसा दिखा रहे हैं. फ़ंड ने बैंकों में निवेश दुगना किया, ख़ासकर HDFC बैंक में, जहां इसकी शेयर की संख्या एक महीने में 3.6 करोड़ से बढ़कर 7.2 करोड़ हो गई. फ़ंड ने अब अपने निवेशकों के पैसे का लगभग 9 फ़ीसदी इस बैंक में लगाया है.
बैंकिंग सेक्टर में कोटक महिंद्रा बैंक और SBI में भी बड़ा निवेश किया गया, वहीं ICICI बैंक और बैंक ऑफ़ बड़ौदा में थोड़ी कम बढ़ोतरी हुई.
बैंकिंग से बाहर,सबसे ज़्यादा ध्यान आकर्षित करने वाला शेयर स्विगी रहा, जिसके शेयर की संख्या जुलाई लगभग 60 फ़ीसदी बढ़ गई. अन्य ख़ास ख़रीद में सिप्ला, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़, इन्फ़ोसिस, ONGC, सायंट और वैरोक इंजीनियरिंग शामिल हैं.
बिक़वाली और निकास
बिक़वाली की बात करें तो फ़ंड ने अपोलो हॉस्पिटल और रैमको सीमेंट्स में अपनी हिस्सेदारी थोड़ी कम की. लेकिन सबसे बड़ा क़दम रिलायंस इंडस्ट्रीज़ से पूरी तरह निकलना था, जो लंबे समय से कई बड़े पोर्टफ़ोलियो का हिस्सा रहा है.
निष्कर्ष
रिलायंस से बाहर निकलने पर निश्चित तौर पर लोगों की भौहें तन जाएंगी, लेकिन बैंकिंग की ओर बढ़ते झुकाव और स्विगी जैसी नई टेक्नोलॉजी कंपनियों में दांव यह दिखाता है कि फ़ंड मैनेजर बाज़ार के अगले दौर में नए नेतृत्व की तैयारी कर रहे हैं.
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