न्यूज़वायर

AMFI की मांग, बजट 2026 में इंडेक्सेशन और LTCG राहत मिले

म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री बॉडी ने लंबे समय के निवेशकों को नुक़सान पहुंचाने वाली टैक्स विसंगतियों की ओर इशारा किया

म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री बॉडी ने लंबे समय के निवेशकों को नुक़सान पहुंचाने वाली टैक्स विसंगतियों की ओर इशारा कियाAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः AMFI ने बजट 2026 से पहले सरकार के सामने एक बार फिर अपनी मांगें रखी हैं और उन टैक्स नियमों को चिह्नित किया है, जो निवेशकों को लंबे समय के म्यूचुअल फ़ंड निवेश से दूर कर सकते हैं. इन प्रस्तावों में डेट फ़ंड टैक्सेशन से लेकर रोज़मर्रा के निवेश से जुड़ी छोटी लेकिन परेशान करने वाली दिक्कतें तक शामिल हैं.

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फ़ंड्स इन इंडिया (AMFI) ने आगामी केंद्रीय बजट 2026 के लिए अपनी रेकमंडेशन सरकार को सौंप दी हैं. संगठन का कहना है कि मौजूदा टैक्स ढांचा ऐसी विसंगतियां पैदा कर रहा है, जो म्यूचुअल फ़ंड्स में लंबी अवधि की भागीदारी को हतोत्साहित कर रही हैं.

डेट फ़ंड्स के टैक्स ट्रीटमेंट को दुरुस्त करने की मांग

AMFI की प्रमुख मांगों में सबसे ऊपर है डेट म्यूचुअल फ़ंड्स पर इंडेक्सेशन बेनेफ़िट की बहाली, जिसे 2024 के बजट में हटा दिया गया था. इंडस्ट्री बॉडी का तर्क है कि डेट फ़ंड्स से होने वाले फ़ायदे पर स्लैब रेट से टैक्स लगाने से इन स्कीम्स की आकर्षण क्षमता काफ़ी कम हो गई है, ख़ासकर उन कंज़र्वेटिव निवेशकों और सीनियर सिटिज़न्स के लिए, जो तुलनात्मक रूप से स्थिर आय के लिए इन पर निर्भर रहते हैं.

AMFI का यह भी मानना है कि डेट फ़ंड्स के लिए एक अधिक तर्कसंगत टैक्स व्यवस्था घरेलू बचत को कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट की ओर मोड़ने में मदद कर सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था में लंबी अवधि की डेट फ़ाइनेंसिंग को समर्थन मिलेगा.

लंबी अवधि के इक्विटी निवेश के लिए प्रोत्साहन

एसोसिएशन ने इक्विटी पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) की छूट सीमा को मौजूदा ₹1.25 लाख से आगे बढ़ाने की अपनी मांग को दोहराया है. इसके अलावा, उसने ELSS और रिटायरमेंट-केंद्रित म्यूचुअल फ़ंड प्रोडक्ट्स के लिए एक सार्थक टैक्स इंसेंटिव को फिर से लागू करने मांग की है.

AMFI के मुताबिक़, मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर अनजाने में निवेशकों को लंबे समय तक निवेशित रहने के बजाय कम होल्डिंग पीरियड और बार-बार रिडेम्शन के लिए प्रेरित करता है, जबकि म्यूचुअल फ़ंड्स का उद्देश्य धैर्यपूर्ण और दीर्घकालिक निवेश संस्कृति को बढ़ावा देना है.

रोज़मर्रा की परेशानियों को दूर करने पर ज़ोर

इन लंबे समय से चली आ रही मांगों के साथ-साथ, AMFI ने कुछ ऐसी व्यावहारिक टैक्स संबंधी दिक्कतों की ओर भी ध्यान दिलाया है, जिनका सामना निवेशकों को रोज़मर्रा के फ़ंड लेन-देन में करना पड़ता है. एक अहम प्रस्ताव यह है कि इंट्रा-स्कीम स्विच, जैसे रेगुलर प्लान से डायरेक्ट प्लान में जाना या ग्रोथ और IDCW विकल्पों के बीच बदलाव, को टैक्सेबल ट्रांसफर न माना जाए.

चूंकि, ऐसे मामलों में संबंधित पोर्टफ़ोलियो में कोई बदलाव नहीं होता, AMFI ने म्यूचुअल फ़ंड्स और ULIPs के बीच टैक्स ट्रीटमेंट में समानता की मांग की है, ताकि निवेशकों को ऐसे ऑपरेशनल फ़ैसलों के लिए दंडित न किया जाए, जिनसे निवेश का जोखिम नहीं बदलता.

एसोसिएशन ने TDS से जुड़ी समस्याओं पर भी राहत की मांग की है. उसने प्रस्ताव रखा है कि म्यूचुअल फ़ंड इनकम डिस्ट्रीब्यूशन पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स की सीमा को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 किया जाए. AMFI ने कहा कि इससे छोटे निवेशकों के लिए रिफ़ंड से जुड़ी परेशानियां कम होंगी.

फ़ंड कैटेगरीज़ में टैक्स विसंगतियों को दूर करने की अपील

AMFI ने उन फ़ंड-ऑफ-फ़ंड्स के टैक्सेशन को लेकर भी चिंता जताई है, जो मुख्य रूप से इक्विटी स्कीम्स में निवेश करते हैं. संगठन ने मांग की है कि ऐसे फ़ंड्स को इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फ़ंड्स के समान टैक्स ट्रीटमेंट दिया जाए, क्योंकि फ़िलहाल समान जोखिम प्रोफ़ाइल के बावजूद इन्हें नॉन-इक्विटी टैक्सेशन का सामना करना पड़ता है.

इसके अलावा, AMFI ने यह भी आग्रह किया है कि SEBI के MF Lite फ़्रेमवर्क के तहत पैसिव स्कीम्स के किसी भी रिक्लासिफिकेशन को टैक्स-न्यूट्रल रखा जाए, ताकि नियामकीय बदलावों के कारण निवेशकों को जबरन कैपिटल गेंस टैक्स न चुकाना पड़े. साथ ही, संगठन ने ReITs और InvITs में बड़े पैमाने पर निवेश करने वाले म्यूचुअल फ़ंड्स के लिए भी इक्विटी-जैसे टैक्स ट्रीटमेंट की मांग की है.

AMFI ने कहा कि ये सभी प्रस्ताव म्यूचुअल फ़ंड निवेश को आम निवेशकों के लिए ज़्यादा सरल और न्यायसंगत बनाने के उद्देश्य से दिए गए हैं. इनमें से कई सिफ़ारिशें उन छोटी लेकिन लगातार बनी रहने वाली परेशानियों से जुड़ी हैं, जिनका सामना SIP चलाने या रोज़मर्रा के निवेश फैसले लेने वाले निवेशकों को करना पड़ता है. एसोसिएशन ने कहा कि इन रुकावटों को हटाने से ज़्यादा निवेशक लंबे समय तक निवेशित रहेंगे और अनुशासित तरीके से संपत्ति बना पाएंगे.

यह भी पढ़ेंः Groww AMC में 23% हिस्सेदारी लेगी स्टेट स्ट्रीट, जानिए कितना निवेश करेगी?

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

31 जुलाई की ITR डेडलाइन मिस करने से क्या-क्या नुक़सान हो सकते हैं?

पढ़ने का समय 6 मिनटआकार रस्तोगी

Manipal Hospitals IPO: साइज़ में सबसे बड़ी, पर रिटर्न में पीछे

पढ़ने का समय 9 मिनटLekisha Katyal

अपने गोल्स को ख़ुद से बचाइए

पढ़ने का समय 4 मिनटधीरेंद्र कुमार

HUL एक बेहतरीन बिज़नेस तो है, लेकिन क्या यह एक बेहतरीन स्टॉक भी है?

पढ़ने का समय 5 मिनटसत्यजीत सेन

HDFC Bank vs ICICI Bank: 10 साल में कैसे बदली लीडरशिप?

पढ़ने का समय 4 मिनटअभिनव गोयल

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

रोज़ नहीं, साल में एक बार देखें

अपने पोर्टफ़ोलियो को रोज़ लाल-हरे रंग में देखने के बजाय, साल में सिर्फ़ एक बार ध्यान से देखना काफ़ी है

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी