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ChatGPT 35% मामलों में ग़लत होता है. क्या उस पर भरोसा करना चाहिए?

AI निवेश की बातें समझा सकता है, लेकिन असली पैसों के फ़ैसलों में आत्मविश्वास भरे जवाब अक्सर महंगे नुक़सान छुपा लेते हैं

AI निवेश की बातें समझा सकता है, लेकिन असली पैसों के फ़ैसलों में आत्मविश्वास भरे जवाब अक्सर महंगे नुक़सान छुपा लेते हैंAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः AI कुछ ही सेकंड में निवेश से जुड़े कॉन्सेप्ट समझा सकता है, लेकिन क्या असली फ़ाइनेंशियल फ़ैसलों के लिए उस पर भरोसा किया जाना चाहिए? यह लेख बताता है कि ChatGPT कहां सच में मदद करता है, कहां चूक जाता है और क्यों पैसों के मामले में भरोसेमंद लगने वाले जवाब ख़तरनाक हो सकते हैं.

“अभी ChatGPT से पूछा कि निवेश का पोर्टफ़ोलियो कैसे बनाया जाए. सेकंडों में बहुत डिटेल्ड जवाब मिल गया.”

अगर हाल में किसी दोस्त से ऐसी बात सुनी है, तो यह अकेला मामला नहीं है. AI चैटबॉट अब सबके निजी सलाहकार बन चुके हैं. रेसिपी से लेकर रिश्तों तक और अब धीरे-धीरे पैसों से जुड़े सवालों के मामले में भी ऐसा ही है.

फ़ाइनेंशियल हेल्थ नेटवर्क की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक़, 2024 से 2025 के बीच फ़ाइनेंशियल सलाह के लिए AI चैटबॉट का इस्तेमाल 3 प्रतिशत से बढ़कर 7 प्रतिशत हो गया. वहीं इंट्यूट क्रेडिट कर्मा की एक स्टडी बताती है कि AI का नियमित इस्तेमाल करने वाले क़रीब दो-तिहाई लोग (यहां बात अमेरिकी यूज़र्स की है) पैसों से जुड़ी सलाह इन्हीं टूल्स से लेते हैं.

आकर्षण साफ़ है. अपॉइंटमेंट की ज़रूरत नहीं. कोई जजमेंट नहीं. तुरंत जवाब. लेकिन असली सवाल यह है: क्या निवेश के मामले में ChatGPT और दूसरे AI चैटबॉट्स पर सच में भरोसा किया जाना चाहिए?

ChatGPT कहां सच में मदद करता है

जहां तारीफ़ बनती है, वहां तारीफ़ होनी चाहिए. पैसों के मामलों में ChatGPT पूरी तरह बेकार नहीं है.

SIP क्या होती है, यह समझना हो, तो ChatGPT ठीक से समझा देता है. लार्ज-कैप और स्मॉल-कैप फ़ंड में फ़र्क़ जानना हो, तो एक सामान्य तस्वीर मिल जाती है. टैक्स बचाने वाले निवेश के बेसिक नियम जानने हों, तो जवाब अक्सर समझ में आने लायक़ होता है.

इसे एक ऐसी इंसाइक्लोपीडिया की तरह देखा जा सकता है, जो 24x7 उपलब्ध है. कॉन्सेप्ट समझने, शब्दों से परिचित होने और फ़ैसला लेने से पहले सोच को सहेजने में यह मददगार है.

मसलन, अगर यह तय करना हो कि पहले क़र्ज़ चुकाया जाए या निवेश शुरू किया जाए, तो ChatGPT एक सामान्य स्ट्रक्चर समझा सकता है. फ़ायदे-नुक़सान गिनवा सकता है. यह उपयोगी है.

लेकिन यहां तक इसकी उपयोगिता ख़त्म हो जाती है.

सबसे बड़ी कमी

सीधी बात यह है कि ChatGPT किसी व्यक्ति को नहीं जानता. यह नहीं जानता कि उम्र 20 है या 50, घर में बुज़ुर्गों की ज़िम्मेदारी है या नहीं, तीन साल में घर ख़रीदने का प्लान है या जोखिम सहने की क्षमता कितनी है.

यह मौजूदा निवेश, नौकरी की स्थिरता या निजी फ़ाइनेंशियल गोल्स को ध्यान में नहीं रख सकता.

यह सामान्य सलाह देता है, जो सुनने में समझदार लगती है, लेकिन किसी ख़ास स्थिति में पूरी तरह ग़लत भी हो सकती है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ इलिनॉय के रिसर्चर्स ने जब ChatGPT को असल ज़िंदगी के फ़ाइनेंशियल हालात पर परखा, तो एक परेशान करने वाली बात सामने आई. AI ने ऐसे समाधान दिए, जो देखने में व्यावहारिक लगे, लेकिन असल में “ऐसे बेतरतीब सुझावों की सूची थे, जो किसी व्यक्ति की स्थिति पर लागू भी हो सकते थे या नहीं भी.”

और इससे भी बुरा एक मामला. एक यूज़र ने कैंसर की बीमारी और पैसों की परेशानी के बारे में ChatGPT को बताया. जवाब में AI ने कहा कि पहले ज़्यादा बचत करनी चाहिए थी. भावनात्मक पहलू पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया. कोई इंसानी सलाहकार ऐसा नहीं करता.

जब टी-शर्ट में भी “वन साइज़ फ़िट्स ऑल” नहीं चलता, तो निवेश की योजना में तो बिल्कुल नहीं चलेगा.

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ChatGPT आत्मविश्वास के साथ ग़लत भी हो सकता है

अब आंकड़ों की बात करें, क्योंकि वे उत्साह बढ़ाने वाले नहीं हैं.

इन्वेस्टिंग इन द वेब की एक विस्तृत स्टडी में ChatGPT से फ़ाइनेंस से जुड़े 100 सवाल पूछे गए. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने जवाबों की समीक्षा की. नतीजा? 65 प्रतिशत जवाब सही पाए गए, लेकिन बाकी 35 प्रतिशत जवाब अधूरे, भ्रामक या सीधे तौर पर ग़लत थे.

इसका मतलब साफ़ है. निवेश से जुड़े तीन सवाल पूछे जाएं, तो औसतन एक जवाब ग़लत होगा.

ये छोटी-मोटी चूक नहीं हैं. ऐसे जवाब हैं, जो असली पैसों का नुक़सान करा सकते हैं.

लेकिन असली ख़तरा कुछ और है. ChatGPT तब भी पूरा भरोसा दिलाता है, जब वह ग़लत होता है.

जवाब साफ़ पैराग्राफ़ में आते हैं, बुलेट पॉइंट्स के साथ, पूरे आत्मविश्वास में. कोई हिचक नहीं. यही चमकदार अंदाज़ भरोसा पैदा करता है, भले ही जानकारी बेकार क्यों न हो.

स्टडीज़ में पाया गया कि ChatGPT “इतने भरोसे के साथ सुझाव देता है कि जिन लोगों को फ़ाइनेंस की ज़्यादा समझ नहीं होती, वे मान लेते हैं कि उनके सवाल का यही एकमात्र हल है.”

ग़लत सलाह, अगर पूरे भरोसे के साथ दी जाए, तो बिना सलाह के भी ज़्यादा ख़तरनाक होती है.

एक और समस्या: पुरानी जानकारी

फ़ाइनेंशियल नियम बदलते रहते हैं. टैक्स क़ानून अपडेट होते हैं. ब्याज़ दरें ऊपर-नीचे होती हैं. नए निवेश विकल्प आते रहते हैं. लेकिन ChatGPT की जानकारी एक तय तारीख़ पर रुक जाती है.

भले ही नए वर्ज़न इंटरनेट से जानकारी खोज सकते हों, लेकिन स्टडीज़ बताती हैं कि मौजूदा जानकारी के मामले में AI अब भी लड़खड़ाता है. 2025 के मध्य में किए गए एक टेस्ट में ChatGPT ने एक ऐसा स्टूडेंट लोन प्रोग्राम सुझाया, जो कई महीने पहले ही बंद हो चुका था.

निवेश के मामले में पुरानी जानकारी सिर्फ़ असुविधा नहीं होती, बल्कि सीधा नुक़सान भी करा सकती है. यहां सलाह वही काम आती है, जो आज की सच्चाई पर आधारित हो.

हयूमन एडवाइज़र ChatGPT से हर बार बेहतर क्यों होता है

इन दो हालात की तुलना कीजिए:

ChatGPT के साथ: टैक्स बचाने वाले निवेश के बारे में पूछा. जवाब में ELSS, PPF और NSC की एक सामान्य सूची मिल गई. सुनने में ठीक, लेकिन टैक्स स्लैब, मौजूदा निवेश या पैसों की ज़रूरत कब पड़ेगी, इसका कोई हिसाब नहीं.

फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र के साथ: आमदनी देखी जाती है, गोल्स पूछे जाते हैं, मौजूदा पोर्टफ़ोलियो समझा जाता है और फिर उसी हिसाब से निवेश सुझाए जाते हैं. साथ ही, सलाहकार पर क़ानूनी ज़िम्मेदारी होती है कि वह निवेशक के हित में काम करे. इसे भरोसे के साथ जिम्मेदारी कहा जाता है.

अंदाज़ा लगाइए कि इनमें से कौन असल में आपको वेल्थ बनाने में ज़्यादा मदद करेगा?

स्टर्लिंग रास्की, एक सर्टिफ़ाइड फ़ाइनेंशियल प्लानर, जिन्होंने AI की फ़ाइनेंशियल सलाह पर काम किया है, कहते हैं: “अगर किसी को सच में प्रोफ़ेशनल और क़ानूनी तौर पर ज़िम्मेदार राय चाहिए, तो वह ChatGPT के बजाय इंसान के पास ही जाएगा.”

इंसानी सलाहकार बारीक़ियों को समझता है. उसे पता होता है कि कब नियम तोड़ना किसी ख़ास स्थिति में सही है. वह यह भी समझ सकता है कि बाज़ार की गिरावट से घबराहट हो रही है या नहीं.

ChatGPT यह सब नहीं कर सकता.

तो फिर किया क्या जाए

क्या इसका मतलब यह है कि पैसों से जुड़े सवालों के लिए ChatGPT का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए?

ऐसा भी नहीं है. सही तरीक़ा यह है कि इसे सीखने के औज़ार की तरह इस्तेमाल किया जाए, फ़ैसला लेने के औज़ार की तरह नहीं.

कॉन्सेप्ट समझने के लिए सवाल पूछिए. निवेश की भाषा से परिचित होने के लिए इसका इस्तेमाल कीजिए. शुरुआती सोच को व्यवस्थित करने में मदद लीजिए.

लेकिन एक बात बेहद ज़रूरी है. ChatGPT जो कहे, उसके आधार पर सीधे निवेश का फ़ैसला कभी न किया जाए.

निवेश से जुड़े ठोस विकल्पों के लिए हर जानकारी को भरोसेमंद स्रोतों से जांचिए. और बेहतर यह है कि ऐसे प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल किया जाए, जो खास तौर पर निवेश रिसर्च और एनालेसिस के लिए बने हों.

वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र में फ़ंड्स का गहराई से एनालेसिस, परफ़ॉर्मेंस ट्रैकिंग और ऐसी रिसर्च मिलती है, जो सच में निवेश फ़ैसलों में मदद करने के लिए होती है. फ़र्क़ साफ़ है. यहां रिसर्च इंसानों ने तैयार की है, जिनकी भारतीय बाज़ारों में गहरी समझ है, जो नियमित रूप से नए डेटा से अपडेट होती है और निजी ज़रूरतों को ध्यान में रखती है.

यह कोई चैटबॉट नहीं है, जो पैटर्न का अंदाज़ा लगा रहा हो. यह असली एनालिस्ट्स का काम है, जिन्होंने सालों तक फ़ंड्स, बाज़ार और निवेशकों के व्यवहार को समझा है.

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ये लेख पहली बार जनवरी 27, 2026 को पब्लिश हुआ.

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