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सारांशः ये फ़ंड निवेशकों की एक मुश्किल समस्या हल करते हैं. ये आपको लार्ज-कैप जैसे रिटर्न के क़रीब रखते हैं, पर ख़राब बाज़ार की पूरी मार नहीं झेलने देते. यह बात जोख़िम से बचने वाले निवेशकों को हैरान कर सकती है.
बहुत से सोच-समझकर चलने वाले निवेशक, जो जोख़िम से बचते हैं पर इक्विटी जैसे रिटर्न भी चाहते हैं, उनके लिए लार्ज-कैप म्यूचुअल फ़ंड अक्सर सहज चुनाव होते हैं. और क्यों न हों? आपको भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में हिस्सा मिलता है, और रिटर्न भी सेविंग्स अकाउंट या FD जैसे पुराने विकल्पों से कहीं बेहतर.
यही इक्विटी की ख़ूबी है. लेकिन इक्विटी अपने साथ जोख़िम भी लाती है. सबसे "सुरक्षित" मानी जाने वाली लार्ज-कैप कंपनियां भी तब तेज़ी से गिर सकती हैं, जब बाज़ार बुरे दौर से गुज़रता है.
लेकिन क्या कोई ऐसा रास्ता हो सकता है जहां लार्ज-कैप जैसे रिटर्न भी मिलें, और गिरावट में बचाव भी ज़्यादा हो, उतार-चढ़ाव भी कम?
एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड ठीक यही करते हैं. इनके लंबे समय के रिटर्न लार्ज-कैप फ़ंड जैसे ही हैं, पर उतार-चढ़ाव कम और गिरावट छोटी रहती है. इसीलिए ये उन निवेशकों के काम के हैं जो इक्विटी में तो रहना चाहते हैं, पर बड़ी गिरावट को झेल पाना उनके लिए मुश्किल होता है.
आइए, आंकड़ों को ख़ुद बोलने दें.
रिटर्न की परीक्षा: दिग्गजों को पछाड़ना
ट्रेलिंग रिटर्न देखें तो लार्ज-कैप कैटेगरी ने पिछले 10 साल में हर साल औसतन 12.3% दिया है. एग्रेसिव हाइब्रिड कैटेगरी इससे थोड़ा पीछे, 11.6% पर है.
लेकिन ट्रेलिंग रिटर्न पूरी कहानी नहीं बताते. एक बेहतर तरीक़ा है रोलिंग रिटर्न, जो दिखाता है कि फ़ंड ने अलग-अलग समय में कैसा प्रदर्शन किया, न कि सिर्फ़ एक शुरू और एक अंत की तारीख़ के बीच.
जून 2016 से मई 2026 तक के, 10-साल के मंथली रोलिंग दौर में, औसत एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड ने औसत लार्ज-कैप फ़ंड को 55% बार पीछे छोड़ा. यानी जितने 10-साल के दौर देखे गए, उनमें से आधे से ज़्यादा में यह आगे रहा.
तो अगर किसी ने 2006 और 2026 के बीच किसी भी 10-साल के दौर में पैसा लगाए रखा होता, तो पलड़ा हल्का सा आम एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड के पक्ष में झुकता, आम लार्ज-कैप फ़ंड के मुक़ाबले.
दूसरी बात तो और भी अहम है. 10 साल का औसत रिटर्न लगभग बराबर रहा: एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड का 11.5% और लार्ज-कैप फ़ंड का 11.4%. यानी औसतन आपको लगभग एक जैसा रिटर्न मिलता.
एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड ने सबसे बड़ा फ़र्क़ जहां डाला, वो था आपके पैसे की बेहतर हिफ़ाज़त.
हर गिरावट में मज़बूती से टिके रहे
2006 के बाद हर बड़ी बाज़ार गिरावट में, औसत एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड औसत लार्ज-कैप फ़ंड से कम गिरा है.
मिसाल के तौर पर, 2020 की गिरावट में हाइब्रिड फ़ंड 29% गिरा, जबकि लार्ज-कैप फ़ंड 37%. नीचे टेबल देखिए.
हर गिरावट में कम नुक़सान
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गिरावट का दौर
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एग्रेसिव हाइब्रिड (%) | लार्ज-कैप (%) | Nifty 500 TRI (%) |
|---|---|---|---|
| मई-जून 2006 | -23.9 | -30.2 | -32.4 |
| फ़रवरी-मार्च 2007 | -11.4 | -15.2 | -15.3 |
| जनवरी-अक्टूबर 2008 | -50.1 | -58.8 | -63.7 |
| मार्च 2015 से फ़रवरी 2016 | -15.1 | -22.6 | -20.1 |
| अगस्त-अक्टूबर 2018 | -11.2 | -14.5 | -15.6 |
| जनवरी-मार्च 2020 | -29.2 | -37.4 | -38.1 |
| अक्टूबर 2021 से जून 2022 | -15.4 | -19.4 | -17.8 |
| सितंबर 2024 से फ़रवरी 2025 | -13.8 | -18.3 | -18.6 |
आंकड़े % में रिटर्न हैं. डेटा 2006 से आगे का. हर गिरावट Nifty 500 TRI के सबसे ऊंचे से सबसे निचले स्तर तक का दौर है.
यह बचाव डेट वाले हिस्से से आता है. SEBI के नियम के मुताबिक़ एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड को इतना पैसा लगाना ज़रूरी है:
- 65 से 80% हिस्सा इक्विटी में (इसका बड़ा हिस्सा लार्ज-कैप में रहता है, और कुछ मिड और स्मॉल-कैप में).
- 20 से 35% हिस्सा डेट में.
इसी बनावट से ये इक्विटी की बढ़त में हिस्सा भी लेते हैं, और डेट वाला हिस्सा तेज़ गिरावट का झटका हल्का कर देता है.
यही बात उतार-चढ़ाव में भी दिखती है. स्टैंडर्ड डेविएशन आसान शब्दों में यह बताता है कि रिटर्न अपने औसत के आसपास कितना ऊपर-नीचे होता है. नंबर जितना बड़ा, उतने झटके वाले रिटर्न. नंबर जितना छोटा, उतना आराम का सफ़र.
जून 2023 से मई 2026 तक के एक-साल के रोलिंग रिटर्न में (छोटे दौर उतार-चढ़ाव को सबसे अच्छे से दिखाते हैं), औसत एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड का स्टैंडर्ड डेविएशन 10.74% रहा, जबकि औसत लार्ज-कैप फ़ंड का 14.85%.
इससे साफ़ है कि एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड न सिर्फ़ कम गिरते हैं, बल्कि बाज़ार के आम उतार-चढ़ाव में भी ज़्यादा आराम का सफ़र देते हैं.
क्या याद रखें
एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड जोख़िम से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं. इनमें इक्विटी का अच्छा-ख़ासा हिस्सा होता है, और बाज़ार गिरने पर ये भी गिरेंगे. इन्हें डेट फ़ंड या तय आमदनी वाला विकल्प समझने की ग़लती मत कीजिए.
इनकी असली ताक़त कहीं और है. ये इक्विटी जैसे लंबे समय के रिटर्न दे सकते हैं, और लार्ज-कैप जैसी पूरी तरह इक्विटी वाली कैटेगरी के मुक़ाबले नुकसान को बेहतर तरीक़े से हल्का करते हैं. सीधे शब्दों में, रिटर्न में ये लार्ज-कैप जितने ही अच्छे रहे हैं, और बचाव में उससे बेहतर.
इसीलिए ये पहली बार निवेश करने वालों, सोच-समझकर चलने वाले निवेशकों, या ऐसे किसी भी व्यक्ति के लिए सही हैं जो इक्विटी में रहना चाहता है, पर पूरी तरह इक्विटी वाले फ़ंड के उतार-चढ़ाव में सहज नहीं है.
वैल्यू रिसर्च की राय
एग्रेसिव हाइब्रिड फ़ंड उन निवेशकों के लिए अच्छी शुरुआत हो सकते हैं जो इक्विटी में आना चाहते हैं पर समझ नहीं पाते कि कहां से शुरू करें. लेकिन इस कैटेगरी का हर फ़ंड एक जैसा सही नहीं होता. सही चुनाव फ़ंड के इक्विटी हिस्से, डेट की क्वालिटी, एक जैसेपन, जोख़िम पर पकड़ और आपके अपने निवेश के समय पर निर्भर करता है.
अगर तय नहीं कर पा रहे कि कौन सा फ़ंड आपके लिए सही है, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र पर जाइए. यह आपको सही फ़ंड छांटने और आपके लक्ष्य, जोख़िम और समय के हिसाब से एक निवेश योजना बनाने में मदद करता है.
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