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2 स्मॉल कैप हमारे क्वालिटी टेस्ट में हुए पास, FIIs दोनों में कर रहे ख़रीदारी

और दोनों शेयर एक ही सेक्टर से हैं

और दोनों शेयर एक ही सेक्टर से हैंNitin Yadav/AI-Generated Image

सारांशः स्मॉल-कैप की दुनिया में क्वालिटी मिलना आसान नहीं है. इसलिए जब हमने सख़्त फ़िल्टर लगाए, तो सिर्फ़ दो स्टॉक्स ही पास हो सके. लेकिन असली हैरानी ये है कि दोनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की ख़रीदारी बढ़ रही है. नीचे विस्तार से देखिए.

स्मॉल-कैप दुनिया वही जगह है जहां बड़ी वेल्थ बनती भी है और मिटती भी है. यही वह हिस्सा है जहां निवेशक अगले बड़े कंपाउंडर की तलाश में रहते हैं.

लेकिन सच मानिए. सैकड़ों लिस्टेड छोटी कंपनियों के बीच क्वालिटी, ग्रोथ और वाजिब वैल्यूएशन का सही मेल खोजना भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा लग सकता है.

यही वह समय है जब वैल्यू रिसर्च स्टॉक स्क्रीनर जैसे टूल बेहद काम आते हैं, क्योंकि ये शेयर चुनने या छंटनी करने के लंबे और थकाऊ काम को आसान बना देते हैं.

इसलिए हमने अपने हाई-क्वालिटी स्मॉल-कैप स्क्रीनर का सहारा लिया और स्मॉल-कैप यूनिवर्स पर ये फ़िल्टर लगाए:

  • क्वालिटी स्कोर: 8 से ज़्यादा
  • ग्रोथ स्कोर: 8 से ज़्यादा
  • वैल्यूएशन स्कोर: 5 से ज़्यादा
  • कम से कम 10 साल का ऑपरेटिंग इतिहास

ये फ़िल्टर सुनिश्चित करते हैं कि कंपनियां बैलेंस शीट की मज़बूती, रिटर्न रेशियो, कमाई की कंसिस्टेंसी और कुल मिलाकर फंडामेंटल्स की सख़्त जांच में खरी उतरें. 10 साल का इतिहास बिना परखे कारोबारों को बाहर कर देता है.

नतीजा? सिर्फ़ दो स्मॉल-कैप कंपनियां ही योग्य रहीं और दोनों फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ सेक्टर से निकलीं.

फिर हमने दूसरी परत देखी. शेयरहोल्डिंग रुझान की जांच में पाया गया कि दिसंबर 2025 तक के एक साल में दोनों कंपनियों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ी है.

उच्च स्टॉक स्कोर और बढ़ती बाहरी संस्थागत भागीदारी का यह मेल अनदेखा करना आसान नहीं है.

तो आइए, इन दोनों कारोबारों पर एक नज़र डालते हैं:

1) Can Fin Homes

  • 3 साल की सालाना EPS ग्रोथ: 18.9 प्रतिशत
  • P/B रेशियो: 2.1 गुना
  • एसेट पर रिटर्न: 2.4 प्रतिशत
  • ग्रॉस NPA रेशियो: फ़ाइनेंशियल ईयर 26 की तीसरी तिमाही में 0.9 प्रतिशत
  • FII हिस्सेदारी: दिसंबर 2025 तक 13.2 प्रतिशत

Can Fin Homes एक डिपॉज़िट लेने वाली हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनी है, जिसे Canara Bank का समर्थन हासिल है. बैंक की इसमें 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

इसका लेंडिंग मॉडल मुख्य रूप से वेतनभोगी पेशेवरों पर केंद्रित है, जो दिसंबर 2025 तक लोन बुक का 68 प्रतिशत हिस्सा थे. इस बॉरोअर प्रोफ़ाइल ने कंपनी को एसेट क्वालिटी मज़बूत रखने में मदद की है. Q3 FY26 में ग्रॉस NPA सिर्फ़ 0.9 प्रतिशत रहा.

पिछले एक साल में FII हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत अंक बढ़ी है. यह धीरे-धीरे बढ़त इसके हाउसिंग-केंद्रित और अपेक्षाकृत सतर्क मॉडल में स्थिर संस्थागत रुचि का संकेत देती है.

2) CSB Bank

  • 3 साल की सालाना EPS ग्रोथ: 6 प्रतिशत
  • P/B रेशियो: 1.5 गुना
  • एसेट पर रिटर्न: 1.2 प्रतिशत
  • ग्रॉस NPA रेशियो: फ़ाइनेंशियल ईयर 26 की तीसरी तिमाही में 1.96 प्रतिशत
  • FII हिस्सेदारी: दिसंबर 2025 तक 14.16 प्रतिशत

CSB Bank मुख्य रूप से केरल और तमिलनाडु में काम करता है और इसका लेंडिंग मॉडल बड़े पैमाने पर एसेट-आधारित है.

गोल्ड लोन इसका प्रमुख प्रोडक्ट है, जो फ़ाइनेंशियल ईयर 26 की तीसरी तिमाही में कुल अग्रिम का 51 प्रतिशत था. ये लोन सोने के गहनों के बदले दिए जाते हैं और आम तौर पर व्यक्तियों, किसानों और छोटे कारोबारी मालिकों को दिए जाते हैं. बैंक की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी होलसेल लोन में भी है, साथ ही SME और रिटेल लोन जैसे होम और वाहन फ़ाइनेंस में भी मौजूदगी है.

फ़ाइनेंशियल ईयर 26 की तीसरी तिमाही में इसका ग्रॉस NPA रेशियो 1.96 प्रतिशत रहा. पिछले एक साल में FII हिस्सेदारी 1.36 प्रतिशत अंक बढ़ी है, जो संस्थागत भरोसे में क्रमिक बढ़त दिखाती है.

निष्कर्ष

जब उच्च क्वालिटी, मज़बूत ग्रोथ स्कोर, वाजिब वैल्यूएशन और एक दशक का ट्रैक रिकॉर्ड साथ आते हैं, तो बहुत कम स्मॉल-कैप कंपनियां ही इस कसौटी पर खरी उतरती हैं.

सिर्फ़ दो कंपनियों का इस परीक्षा में पास होना दिखाता है कि यह मेल कितना दुर्लभ है. लेकिन याद रहे, स्क्री़नर का नतीजा कोई रेकमंडेशन नहीं होता. यह केवल शुरुआत का बिंदु है.

जो निवेशक फ़िल्टर से आगे बढ़कर गहरे एनालेसिस की ओर जाना चाहते हैं, उनके लिए चुनी हुई रिसर्च फ़र्क ला सकती है. यही वह जगह है जहां Value Research Stock Advisor विस्तृत फंडामेंटल अध्ययन और लॉन्ग-टर्म ट्रैकिंग के ज़रिए ऊंची संभावनाओं वाले विचार पहचानता है.

असल में, स्मॉल-कैप में असली बढ़त ज़्यादा स्टॉक्स खोजने में नहीं, बल्कि सही स्टॉक्स को समय रहते पहचानने और उन्हें अच्छी तरह समझने में है.

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