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सारांशः फ़ॉर्म 60 वो चुपचाप काम करने वाला रास्ता था जिस पर लाखों लोग निर्भर थे. अब वो चला गया. और इसकी जगह आए फ़ॉर्म 97 का दायरा इतना सीमित है कि ज़्यादातर निवेशकों के लिए जैसे है ही नहीं. तो आपका डीमैट अकाउंट, बॉन्ड निवेश का क्या होगा? नए इनकम टैक्स एक्ट में इसका का जवाब है. इसके बारे में, आपको पता होना चाहिए.
एक ख़ास क़िस्म का वित्तीय टालमटोल करने वाला इंसान होता है, सावधान, सतर्क़, शायद थोड़ा पुराने ढर्रे का, जो बिना PAN कार्ड के अपना पैसा मैनेज करता रहा है. शायद वो कैश पर टिका रहा. शायद उसने सख्त ज़रूरतों से बचने के लिए फ़ॉर्म 60 की चुपचाप मिलने वाली सहूलियत का इस्तेमाल किया. शायद उसे कभी कोई जल्दी नहीं लगी.
वो दौर अब ख़त्म हो गया है…
इनकम टैक्स एक्ट 2026 के तहत, 1 अप्रैल 2026 से, फ़ॉर्म 60 की जगह एक नए फ़ॉर्म 97 ने ले ली है. लेकिन यह कोई सीधा नाम बदलाव नहीं है. फ़ॉर्म 97 कहीं ज़्यादा सीमित है, यह सिर्फ़ उन कामों की एक छोटी सी लिस्ट को कवर करता है जो पहले फ़ॉर्म 60 से हो जाते थे. ज़्यादातर वित्तीय लेन-देन के लिए जो किसी निवेशक के लिए मायने रखते हैं, जैसे म्यूचुअल फ़ंड, बॉन्ड, सिक्योरिटी, डीमैट अकाउंट, अब PAN ही एकमात्र रास्ता है.
फ़ॉर्म 97 बनाम फ़ॉर्म 60: फ़र्क़ क्यों मायने रखता है
"फ़ॉर्म 60 की जगह फ़ॉर्म 97" पढ़कर इसे एक आम काग़ज़ी बदलाव समझना आसान है. वही सोच, नया नंबर, नया फ़ॉर्मेट. यह पढ़ना पूरी बात चूक जाना होगा.
फ़ॉर्म 60 एक व्यापक साधन था. इसने PAN न रखने वाले लोगों को बस यह घोषणा करके कि उनके पास PAN नहीं है, कई तरह के वित्तीय लेन-देन में हिस्सा लेने की इजाज़त दी. यह बड़े तबके के लिए एक बेहतर विकल्प था.
फ़ॉर्म 97 कहीं ज़्यादा चुनिंदा है. नए नियमों के तहत, इसका इस्तेमाल सिर्फ़ वो लोग कर सकते हैं, कंपनियां या फ़र्म नहीं, जिनके पास सच में PAN नहीं है. नाबालिग इसका इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर सकते, उन्हें मां-बाप या अभिभावक का PAN देना होगा. और रूल 159(2) के तहत इसका दायरा सीमित लेन-देन तक ही है: कुछ ख़ास प्रॉपर्टी डील, कुछ बैंक अकाउंट खोलना, समय जमा, बीमा से जुड़े रिश्ते, एक सीमा से ऊपर होटल या कॉन्वेंशन सेंटर में भुगतान और कुछ सामान और सेवाओं की ख़रीद-बिक्री.
इस छोटी सी लिस्ट से बाहर की हर चीज़ के लिए अब PAN चाहिए. कोई घोषणा नहीं, कोई विकल्प नहीं, कोई रास्ता नहीं.
इस बदलाव का पैमाना एक आंकड़े में झलकता है: सरकार का अनुमान है कि फ़ॉर्म 97 और इसके साथ ही फ़ॉर्म 98 की सालाना फ़ाइलिंग 80 से 85% घटकर, क़रीब 12.5 करोड़ सालाना से क़रीब 2 करोड़ पर आ जाएगी. इसका मतलब कम लेन-देन नहीं है, बल्कि ज़्यादा लेन-देन के लिए अब सीधे PAN मांगा जाएगा.
जहां PAN अब ज़रूरी है, फ़ॉर्म 97 नहीं चलेगा
इनकम टैक्स एक्ट 2026 के रूल 159 के तहत, इन लेन-देन के लिए PAN ज़रूरी है. यहां फ़ॉर्म 97 की कोई जगह नहीं है:
| लेन-देन | सीमा |
|---|---|
| मोटर गाड़ी या मोटरसाइकल की ख़रीद-बिक्री (ट्रैक्टर छोड़कर) | ₹5 लाख से ज़्यादा |
| डीमैट अकाउंट खोलना | कोई भी रक़म |
| म्यूचुअल फ़ंड में निवेश | ₹50,000 से ज़्यादा |
| बॉन्ड या डिबेंचर ख़रीदना | ₹50,000 से ज़्यादा |
| RBI बॉन्ड में निवेश | ₹50,000 से ज़्यादा |
| बैंक अकाउंट में नक़द जमा या निकासी | एक वित्त वर्ष में ₹10 लाख |
| शेयरों के अलावा दूसरी सिक्योरिटी की ख़रीद-बिक्री | ₹1 लाख प्रति लेन-देन से ज़्यादा |
| अनलिस्टेड शेयरों में लेन-देन | ₹1 लाख प्रति लेन-देन से ज़्यादा |
| क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन | कोई भी रक़म |
| ज़मीन-जायदाद के लेन-देन | ₹20 लाख से ज़्यादा |
| होटल, रेस्टोरेंट या कॉन्वेंशन सेंटर में नक़द भुगतान | ₹1 लाख से ज़्यादा |
| नोट: इनकम टैक्स एक्ट 2026 और इनकम टैक्स एक्ट 2025 के आधार पर, 1 अप्रैल 2026 से लागू. अपनी ख़ास स्थिति के लिए किसी योग्य टैक्स सलाहकार से सलाह लें. | |
फ़ैक्ट चेक: नए नियमों में मोटर गाड़ी की सीमा बढ़ाकर अब ₹5 लाख से ज़्यादा की मोटरसाइकल को भी शामिल किया गया है, पहले सिर्फ़ कार शामिल थी. ज़मीन-जायदाद की सीमा भी ₹10 लाख से बढ़कर ₹20 लाख हो गई है.
यह किसी अजीब वित्तीय कामों की लिस्ट नहीं है. यह भारतीय वित्तीय व्यवस्था में आम हिस्सेदारी का ब्यौरा है. डीमैट अकाउंट खोलें, बॉन्ड में निवेश करें, नए नियमों के तहत इनमें से कुछ भी बिना PAN कार्ड के नहीं हो सकता.
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि तीन चीज़ें फ़ॉर्म 97 रिपोर्टिंग के दायरे से पूरी तरह हट गई हैं, जिनमें शामिल हैं: विदेशी मुद्रा की ख़रीद, बैंक ड्राफ़्ट या पे ऑर्डर की नक़द ख़रीद और प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट यानी PPI में लेन-देन.
क्या सोना ख़रीदने के लिए PAN ज़रूरी है? हां, ₹2 लाख से ज़्यादा पर
नए नियमों को लेकर सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल यह है कि क्या सोने के गहने ख़रीदने पर असर पड़ेगा. जवाब है हां, हालांकि यह एक पुराने प्रावधान से है जो आगे बढ़ाया गया है.
रूल 159(1), क्रम संख्या 16 के तहत, प्रति लेन-देन ₹2 लाख से ज़्यादा की किसी भी वस्तु या सेवा की ख़रीद-बिक्री के लिए PAN देना ज़रूरी है. सोने के गहने, चाहे जौहरी से ख़रीदें, गोल्ड एक्सचेंज से या किसी स्कीम के ज़रिए, इसी दायरे में आते हैं. ₹2 लाख की सीमा पुराने नियमों से वैसी ही है और सिर्फ़ सोने पर नहीं, सभी बड़े सामान के लेन-देन पर लागू होती है.
ये नियम भारत की वित्तीय दिशा के बारे में क्या बताते हैं
ख़ास बातों से पीछे हटकर देखें तो एक साफ़ दिशा नज़र आती है. सरकार सिर्फ़ काग़ज़ी काम को आधुनिक नहीं बना रही. वो जानबूझकर एक ऐसी वित्तीय व्यवस्था बना रही है जहां बड़े लेन-देन एक पहचाने जाने वाले निशान छोड़ें, और वो निशान PAN से गुज़रे.
नीति की सोच सीधी है. PAN इनकम, ख़र्च, निवेश और बैंकिंग को एक पहचान से जोड़ता है. हर PAN-टैग्ड लेन-देन एक डेटा पॉइंट है जो टैक्स अधिकारियों को यह जांचने में मदद करता है कि किसी की घोषित इनकम उसके असल वित्तीय जीवन से मेल खाती है या नहीं. PAN की ज़रूरी पहुंच बढ़ाना, दरअसल जांच का दायरा बढ़ाना है.
जो निवेशक PAN रखते हैं और इस्तेमाल करते हैं, उसके लिए ये बदलाव व्यवहार में काफ़ी हद तक मामूली हैं. लेकिन जिसने भी सिस्टम के किनारे पर काम किया है, फ़ॉर्म 60 से, कैश से या ख़ामियों से, उसके लिए संदेश साफ़ है: वो ख़ामियां बंद हो रही हैं.
आज PAN बनवाना न मुश्क़िल है न धीमा. प्रक्रिया काफ़ी हद तक ऑनलाइन है. मुश्क़िल बदलाव सोच का है. जिन लोगों ने माना कि PAN वैकल्पिक है, नए नियम साफ़ कह रहे हैं: जो वित्तीय दुनिया भारत बना रहा है उसमें, यह वैकल्पिक नहीं है.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ’s
फ़ॉर्म 97 क्या है और यह फ़ॉर्म 60 से कैसे अलग है? फ़ॉर्म 97, इनकम टैक्स एक्ट 2026 के तहत 1 अप्रैल 2026 से फ़ॉर्म 60 की जगह आया है. जहां फ़ॉर्म 60 का इस्तेमाल PAN न रखने वाले लोग कई तरह के वित्तीय लेन-देन के लिए कर सकते थे, वहीं फ़ॉर्म 97 सिर्फ़ रूल 159(2) के तहत सीमित लेन-देन पर लागू होता है. ज़्यादातर निवेश और वित्तीय बाज़ार के लेन-देन के लिए अब PAN ज़रूरी है और फ़ॉर्म 97 उसकी जगह नहीं ले सकता.
क्या म्यूचुअल फ़ंड में निवेश के लिए PAN ज़रूरी है? हां. इनकम टैक्स एक्ट 2026 के तहत, ₹50,000 से ज़्यादा के किसी भी म्यूचुअल फ़ंड निवेश के लिए PAN चाहिए. फ़ॉर्म 97 इसका विकल्प नहीं बन सकता.
क्या भारत में डीमैट अकाउंट खोलने के लिए PAN चाहिए? हां. डीमैट अकाउंट खोलने के लिए रक़म चाहे जो भी हो, PAN ज़रूरी है. यह ज़रूरत इनकम टैक्स एक्ट 2026 के रूल 159(1) के तहत लागू होती है.
क्या सोने के गहने ख़रीदने के लिए PAN चाहिए? हां, अगर ख़रीद प्रति लेन-देन ₹2 लाख से ज़्यादा हो. यह ज़रूरत रूल 159(1), क्रम संख्या 16 के तहत लागू होती है, जो ₹2 लाख से ज़्यादा की किसी भी वस्तु या सेवा की ख़रीद-बिक्री पर लागू होती है.
फ़ॉर्म 97 कौन इस्तेमाल कर सकता है? फ़ॉर्म 97 कंपनियां या फ़र्म नहीं, बल्कि सिर्फ़ वो लोग इस्तेमाल कर सकते हैं, जिनके पास PAN नहीं है और जो रूल 159(2) के तहत तय लेन-देन कर रहे हों. नाबालिग इसके लिए योग्य नहीं हैं और उन्हें मां-बाप या अभिभावक का PAN देना होगा. कोई विदेशी कंपनी जो IFSC बैंकिंग यूनिट के साथ लेन-देन करती हो और जिसकी भारत में कोई टैक्स देनदारी न हो, वो भी फ़ॉर्म 97 इस्तेमाल कर सकती है.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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