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सारांशः PM नरेन्द्र मोदी की अपील के बाद भारत के कई बड़े म्यूचुअल फ़ंड हाउस ने गोल्ड ETF और गोल्ड FoF में बड़े निवेश पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी है. HDFC, ICICI Prudential, Nippon, Axis, Tata, Kotak और ABSL सब शामिल हैं. लेकिन यह रोक मुख्य रूप से ₹25 करोड़ से ज़्यादा के सीधे निवेश पर है. रीटेल निवेशक, SIP और एक्सचेंज ट्रेडिंग अभी भी जारी है.
भारतीयों का सोने से रिश्ता उतना ही पुराना है जितना शादियों में "थोड़ी और मिठाई लो" वाली ज़िद.
शादी हो, तीज हो, दिवाली हो या बस मन हो, गोल्ड चाहिए. और जब फ़िज़िकल गोल्ड महंगा लगने लगा तो गोल्ड ETF की ओर रुख़ करने लगे. घर बैठे, फ़ोन से, बिना लॉकर की चिंता किए.
जनवरी 2026 में तो कमाल ही हो गया. गोल्ड ETF में उस एक महीने ₹24,039 करोड़ आए. पूरी इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड कैटेगरी से ज़्यादा. PM मोदी द्वारा मई में की गई अपील: भाइयो और बहनो, एक साल सोना मत ख़रीदिए. विदेशी मुद्रा बचाइए.
सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी. और म्यूचुअल फ़ंड हाउस? उन्होंने एक हफ़्ते में गोल्ड ETF की खिड़की बंद कर दी. HDFC. ICICI. Nippon. Axis. Tata. Kotak. UTI. ABSL. सब.
लेकिन यह पूरी कहानी नहीं है. असली सवाल और भी गहरे हैं.
गोल्ड की डिमांड इतनी क्यों बढ़ी थी?
इससे पहले यह समझना ज़रूरी है कि यह क़दम उठाना क्यों पड़ा.
FY26 में भारत ने $72 अरब का सोना ख़रीदा. पिछले साल के मुक़ाबले 24% ज़्यादा. यह भारत के सबसे बड़े इंपोर्ट में से एक है.
म्यूचुअल फ़ंड के ज़रिए भी सोने में पैसा बड़ी तेज़ी से आ रहा था.
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महीना
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गोल्ड ETF में आया पैसा | महीने के अंत में कुल रक़म |
|---|---|---|
| जनवरी 2026 | ₹24,039 करोड़ | ₹1,84,277 करोड़ |
| फ़रवरी 2026 | ₹5,255 करोड़ | ₹1,83,000 करोड़ |
| मार्च 2026 | ₹2,266 करोड़ | ₹1,71,468 करोड़ |
| अप्रैल 2026 | ₹3,040 करोड़ | ₹1,78,110 करोड़ |
| सोर्स: AMFI | ||
जनवरी 2026 में गोल्ड ETF में आया पैसा उस पूरे महीने की इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड कैटेगरी से ज़्यादा था.
World Gold Council के मुताबिक़ भारत की Q1 2026 में सोने की कुल डिमांड 151 टन रही. निवेश की डिमांड 54% बढ़कर 82 टन पहुंची. गोल्ड ETF की डिमांड रिकॉर्ड हाई पर रही. भारत ने Q1 2026 में दुनिया की कुल गोल्ड ETF डिमांड का 32% अकेले लिया. सिर्फ़ चीन आगे था.
इतने बड़े इंपोर्ट से विदेशी मुद्रा पर दबाव आ रहा था. मार्च 2026 के अंत में RBI का विदेशी मुद्रा भंडार $691 अरब था जो सितंबर 2025 के $700 अरब से कम था.
किन फ़ंड हाउस ने क्या रोक लगाई?
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फ़ंड हाउस
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स्कीम | रोक | कब से |
|---|---|---|---|
| HDFC | HDFC Gold ETF | ₹25 करोड़ से ज़्यादा सीधा निवेश बंद | 8 जून 2026 |
| HDFC | HDFC Gold ETF FoF | एकमुश्त निवेश ₹10 लाख प्रति PAN प्रति माह तक | 5 जून 2026 |
| ICICI Prudential | ICICI Prudential Gold ETF | ₹25 करोड़ से ज़्यादा सीधा निवेश बंद | 5 जून 2026 |
| Nippon India | Nippon India ETF Gold BeES | ₹25 करोड़ से ज़्यादा सीधा निवेश बंद | 8 जून 2026 |
| Nippon India | Nippon India Gold Savings Fund | एकमुश्त निवेश ₹10 लाख प्रति PAN प्रति माह तक | 8 जून 2026 |
| Kotak | Kotak Gold ETF | ₹25 करोड़ से ज़्यादा सीधा निवेश बंद | 8 जून 2026 |
| Axis | Axis Gold ETF | ₹25 करोड़ से ज़्यादा सीधा निवेश बंद | 8 जून 2026 |
| Axis | Axis Gold Fund | एकमुश्त निवेश ₹10 लाख प्रति PAN प्रति माह तक | 8 जून 2026 |
| Tata | Tata Gold ETF | ₹25 करोड़ से ज़्यादा सीधा निवेश बंद | 8 जून 2026 |
| Tata | Tata Gold ETF FoF | एकमुश्त निवेश ₹10 लाख प्रति PAN प्रति माह तक | 8 जून 2026 |
| UTI | UTI Gold ETF | ₹25 करोड़ से ज़्यादा सीधा निवेश बंद | 8 जून 2026 |
| UTI | UTI Gold ETF FoF | एकमुश्त निवेश ₹10 लाख प्रति PAN प्रति माह तक | 9 जून 2026 |
| ABSL | ABSL Gold ETF | ₹25 करोड़ से ज़्यादा सीधा निवेश बंद | 9 जून 2026 |
| ABSL | ABSL Gold Fund | एकमुश्त निवेश ₹10 लाख प्रति PAN प्रति माह तक | 8 जून 2026 |
यह रोक है क्या?
फ़ंड हाउस अपने नोटिस में "मौजूदा आर्थिक और बाज़ार के हालात" की बात करते हैं. लेकिन समय और सरकारी नीति का तालमेल साफ़ दिखता है.
सभी फ़ंड हाउस ने एक जैसा तरीक़ा अपनाया है.
पहली बात: गोल्ड ETF में ₹25 करोड़ से ज़्यादा का सीधा निवेश बंद. यह उन बड़े निवेशकों पर लागू होता है जो फ़ंड हाउस से सीधे ETF यूनिट ले सकते थे.
दूसरी बात: गोल्ड FoF और गोल्ड सेविंग्स फ़ंड में एकमुश्त निवेश ₹10 लाख प्रति PAN प्रति महीने तक सीमित. इससे वो निवेशक ज़्यादा परेशान होंगे जिनके पास डीमैट खाता नहीं है और जो म्यूचुअल फ़ंड के ज़रिए सोने में पैसा लगाते हैं.
तीसरी बात: यह पूरी तरह बंद नहीं है. Moneycontrol के मुताबिक़, फ़ंड हाउसेज ने SEBI के अधिकारियों से बात की थी ताकि रिटेल निवेशकों को परेशान किए बिना बड़े इंपोर्ट का दबाव कम किया जा सके.
आप पर क्या असर?
- रीटेल निवेशक: असर बहुत कम है. डीमैट खाते से एक्सचेंज पर गोल्ड ETF ख़रीदना-बेचना पहले की तरह जारी है.
- SIP निवेशक: मौजूदा SIP जारी रहेंगी. Nippon ने साफ़ कहा कि SIP ₹50,000 प्रति PAN प्रति दिन की सीमा के साथ चलती रहेंगी. ज़्यादातर फ़ंड हाउस में SIP पर कोई रोक नहीं है.
- बड़े निवेशक और कंपनियां: सबसे ज़्यादा असर उन पर है जो ₹25 करोड़ से ज़्यादा सीधा निवेश करना चाहते थे या गोल्ड FoF में बड़ी एकमुश्त रक़म लगाते थे. अब उन्हें एक्सचेंज से ख़रीदना होगा या निवेश को कई महीनों में बांटना होगा.
- निकासी: सभी फ़ंड हाउस ने साफ़ किया है कि पैसा निकालने पर कोई रोक नहीं है.
असल मायने क्या हैं?
यह पूरी तरह बंद नहीं है. यह बड़े पैसे के फ़्लो को धीमा करने की कोशिश है. रिटेल निवेशक, SIP और एक्सचेंज पर ट्रेडिंग सब जारी है. लेकिन संकेत साफ़ है. सरकार नहीं चाहती कि सोने पर विदेशी मुद्रा ख़र्च हो. इंपोर्ट ड्यूटी 6% से 15% हुई. फ़ंड हाउस ने बड़े निवेश रोक दिए. और PM की सीधी अपील भी है.
यह रोक कब हटेगी यह फ़ंड हाउस के अगले नोटिस पर निर्भर है. अभी "अगली सूचना तक" यही स्थिति रहेगी.
आगे क्या हो सकता है?
यह रोक अगले कुछ महीनों में भारतीय सोने के बाज़ार को कैसे बदल सकती है, यह समझना ज़रूरी है.
- सोने की मांग पूरी तरह नहीं रुकेगी. भारतीयों का सोने से रिश्ता नीति से नहीं टूटता. मांग का रास्ता बदलेगा. जो पैसा गोल्ड FoF में जाता था वो फ़िज़िकल सोने या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की तरफ़ जा सकता है. इंपोर्ट कम होगा लेकिन ख़त्म नहीं.
- गोल्ड ETF पर प्रीमियम बढ़ सकता है. जब बड़े निवेशक फ़ंड हाउस से सीधे ETF यूनिट नहीं बना पाते तो वो एक्सचेंज पर ख़रीदते हैं. इससे ETF की मांग बढ़ती है और यह अपनी असल NAV से ऊपर ट्रेड कर सकता है. अगले कुछ हफ़्तों में यह नज़र आ सकता है.
- इंटरनेशनल फ़ंड वाला सबक़ याद रखें. 2022 में इंटरनेशनल फ़ंड पर रोक लगी थी. वो आज तक पूरी तरह नहीं हटी. अगर सरकार का विदेशी मुद्रा बचाने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो गोल्ड ETF पर रोक भी उसी राह पर जा सकती है.
- RBI और सरकार की नज़र इन तीन आंकड़ों पर होगी: मासिक सोना इंपोर्ट, विदेशी मुद्रा भंडार और देश का इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का घाटा. जैसे ही ये तीनों ठीक होंगे, रोक हटने की उम्मीद बनेगी.
- लंबे समय में सोने की जगह पोर्टफ़ोलियो में बनी रहेगी. यह रोक कुछ समय के लिए है. सोना पोर्टफ़ोलियो का हिस्सा बना रहेगा. SIP के ज़रिए धीरे-धीरे लगाते रहना सबसे समझदारी भरा तरीक़ा है.
लॉन्ग-टर्म नज़रिए से तीन अहम सवाल
1. क्या यह रोक काम करेगी?
शायद आंशिक रूप से. बड़े निवेशक जो सीधे फ़ंड हाउस से ETF यूनिट लेते थे, वो अब एक्सचेंज से ख़रीदेंगे. लेकिन गोल्ड FoF पर ₹10 लाख की मंथली लिमिट उन लोगों को ज़रूर रोकेगी जिनके पास डीमैट खाता नहीं है.
2. क्या गोल्ड ETF की क़ीमत पर असर पड़ेगा?
सीधा असर सीमित होगा. एक्सचेंज पर ट्रेडिंग जारी है. लेकिन बड़े निवेशकों की तरफ से मांग कम होने से ETF और असल सोने की क़ीमत के बीच का फ़ासला थोड़ा बढ़ सकता है. यानी ETF थोड़े प्रीमियम पर मिल सकता है.
3. क्या यह रोक लंबे समय तक रह सकती है?
इंटरनेशनल फ़ंड पर भी ऐसी ही रोक लगी थी जो अभी तक पूरी तरह नहीं हटी. गोल्ड पर रोक कितनी देर रहेगी यह इंपोर्ट के आंकड़ों, विदेशी मुद्रा भंडार और सरकार की नीति पर निर्भर करेगा.
इन बातों का ध्यान रखें
- ETF का प्रीमियम देखें: जब बड़े निवेशक एक्सचेंज से ख़रीदने पर मजबूर होते हैं तो ETF अपनी असल NAV से ऊपर ट्रेड कर सकता है. ख़रीदने से पहले NAV और बाज़ार क़ीमत का फ़ासला ज़रूर देखें.
- मार्केट मेकर पर असर नहीं: सभी फ़ंड हाउस ने ऑथराइज़्ड पार्टिसिपेंट और मार्केट मेकर को छूट दी है. इससे ETF की बाज़ार में मौजूदगी बनी रहेगी.
- डीमैट खाता नहीं है तो: गोल्ड FoF अब ₹10 लाख प्रति माह तक सीमित है. डीमैट खाते वाले एक्सचेंज से ख़रीद सकते हैं.
- SGB एक विकल्प: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड अभी इस रोक से बाहर हैं. लेकिन नए SGB जारी होने की संभावना कम है क्योंकि सरकार सोने की मांग कम करना चाहती है.
- SIP जारी रखें: लंबे समय के लिए सोने में निवेश करना हो तो SIP पर कोई रोक नहीं है. Nippon में ₹50,000 प्रति PAN प्रति दिन की सीमा है जो ज़्यादातर SIP निवेशकों के लिए काफ़ी है.
वैल्यू रिसर्च की राय
सोने में SIP के लिए सही फ़ंड और सही स्ट्रैटेजी जानना हो तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र देखें. जोख़िम, लागत और लक्ष्य के हिसाब से सही फ़ंड चुनने में मदद मिलेगी.
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