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सारांशः NPS संचय को आसान बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था, और यह है भी. इसकी डिफ़ॉल्ट सेटिंग वही देती है जो वादा करती है. लेकिन यह नहीं बताती कि इसके आगे एक दूसरा विकल्प भी है. और उसी ₹2,000 की मासिक जमा पर - रिटायरमेंट तक का फ़र्क है ₹29 लाख और ज़िंदगीभर ₹6,300 कम पेंशन.
NPS संचय सरल ज़रूर है, लेकिन सादगी और बेहतरी एक बात नहीं होती.
इसकी डिफ़ॉल्ट इन्वेस्टमेंट स्कीम एक दूसरे विकल्प से कहीं पीछे रह जाती है - जो सिर्फ़ एक टैप दूर है. ₹2,000 के मासिक जमा पर यह फ़र्क रिटायरमेंट तक ₹29 लाख का है और पेंशन में हर महीने ₹6,300 कम - वो भी उम्रभर के लिए.
NPS संचय: डिफ़ॉल्ट में पैसा कहां जाता है
NPS संचय नेशनल पेंशन सिस्टम का एक सरल रूप है, जिसे 6 मई 2026 को 18 से 85 साल के नागरिकों के लिए लॉन्च किया गया. इसे ख़ासकर पेंटर, ऑटोरिक्शा चालक, छोटे दुकानदार जैसे असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए बनाया गया है, यानी वे लोग जिनके पास अब तक पेंशन का कोई ज़रिया नहीं था. सरलीकरण असली है. एनरोलमेंट के समय निवेश का कोई फ़ैसला नहीं करना पड़ता. पैसा अपने आप सरकारी सेक्टर के पैटर्न में लगता है, जो वही एलोकेशन है जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए है.
असल में यह कैसा दिखता है, इसे SBI Pension Fund की CG Scheme के उदाहरण से समझें:
| एसेट क्लास | पोर्टफ़ोलियो में हिस्सा |
|---|---|
| सरकारी सिक्योरिटीज़ | 50.20% |
| कॉर्पोरेट बॉन्ड और डेट इंस्ट्रूमेंट | 23.30% |
| इक्विटी और संबंधित निवेश | 23.00% |
| शॉर्ट-टर्म डेट और कैश | 3.50% |
| स्रोत: SBI पेंशनल फ़ंड, पोर्टफ़ोलियो स्टेटमेंट, 30 अप्रैल 2026 | |
हर रुपये का तीन चौथाई हिस्सा फ़िक्स्ड इनकम में है. इक्विटी को मुश्किल से एक चौथाई मिलता है. इससे स्थिर और कम उतार-चढ़ाव वाला रिटर्न मिलता है, लेकिन इसमें वह लंबी अवधि की बढ़त नहीं मिल पाती जो इक्विटी 35 साल की समय-सीमा में देती है.
एनरोलमेंट के बाद सब्सक्राइबर NPS ऐप या किसी पॉइंट ऑफ़ प्रिसेंस (Point of Presence( के ज़रिए इसे बदल सकते हैं. डिफ़ॉल्ट सिर्फ़ उनके लिए है जो कभी बदलते ही नहीं.
17 साल का वास्तविक NPS डेटा क्या कहता है?
डिफ़ॉल्ट के मुक़ाबले तीन विकल्पों को परखा गया.
75% इक्विटी के साथ एक्टिव चॉइस विकल्प NPS सब्सक्राइबर के लिए क़ानूनी तौर पर सबसे ज़्यादा इक्विटी वाला विकल्प. PFRDA के 2022 के सर्कुलर के तहत सब्सक्राइबर रिटायरमेंट तक यह 75% इक्विटी बनाए रख सकते हैं - उम्र बढ़ने के साथ इसे घटाने की ज़रूरत नहीं होती.
ऑटो चॉइस LC75 एक बिना झंझट का विकल्प है जो 35 साल की उम्र तक 75% इक्विटी रखता है, फिर हर साल धीरे-धीरे इक्विटी घटाता है और 55 की उम्र तक 15% पर आ जाता है. इसे ऐसे समझें जैसे एक SIP जो रिटायरमेंट के क़रीब आते-आते अपने आप कंज़र्वेटिव होती जाती है.
₹100 अगर मई 2009 में लगाए होते और इसे बनाए रखा होता:
| विकल्प | आज क़ीमत | गुना | सालाना रिटर्न (मई 2009 – अप्रैल 2026) |
|---|---|---|---|
| NPS संचय डिफ़ॉल्ट | ₹ 443 | 4.4x | 9.20% |
| ऑटो चॉइस LC75 | ₹ 522 | 5.2x | 10.30% |
| एक्टिव चॉइस, 75% इक्विटी | ₹ 548 | 5.5x | 10.60% |
| स्रोत: SBI पेंशन फ़ंड के महीने के अंत के NAV. एक्टिव चॉइस और LC75 सिंथेटिक पोर्टफ़ोलियो हैं जो स्कीम E, C और G के NAV को बताए गए रेशियो में मिलाकर मासिक रीबैलेंसिंग के साथ बनाए गए हैं. | |||
डिफ़ॉल्ट और एक्टिव चॉइस के बीच क़रीब 1.4 प्रतिशत अंक के अंतर के साथ, सालाना रिटर्न का फ़र्क़ बहुत छोटा लगता है. लेकिन 17 सालों में ₹100 के निवेशक को यह फ़र्क पहले ही ₹105 की चपत लगा चुका है. 35 साल में यह और ज़्यादा कंपाउंड होता.
एक असली निवेशक ने क्या कमाया
जो सब्सक्राइबर मई 2009 से अप्रैल 2026 तक हर महीने ₹2,000 जमा करता, तो उसका कॉर्पस कुल ₹4.08 लाख का होता:
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विकल्प
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अप्रैल 2026 में कॉर्पस |
| कुल जमा | ₹4.08 लाख |
| NPS संचय डिफ़ॉल्ट | ₹8.89 लाख |
| ऑटो चॉइस LC75 | ₹10.85 लाख |
| एक्टिव चॉइस, 75% इक्विटी | ₹11.30 लाख |
डिफ़ॉल्ट ने इक्विटी-आधारित विकल्प से ₹2.4 लाख कम दिए और यह असली पेंशन फ़ंड मैनेजरों के इतिहास पर आधारित है. कोई अनुमान नहीं, कोई काल्पनिक दर नहीं. यह हो चुका है.
35 साल का अनुमान
आज 25 साल की उम्र में एनरोल करने वाले के लिए, हर विकल्प में ₹2,000 मासिक जमा करने पर पिछले 15 साल के रिटर्न:
NPS के नियमों के तहत रिटायरमेंट पर सब्सक्राइबर कॉर्पस का 60% तक टैक्स-फ़्री एकमुश्त ले सकता है. बाकी 40% से एन्युटी ख़रीदनी होती है - यानी एक ऐसा फ़ाइनेंशियल प्रोडक्ट जो एकमुश्त रक़म को उम्रभर की गारंटीड मासिक आय में बदल देता है. उस 40% पर मौजूदा दरों के मुताबिक़ क़रीब 6.5% एन्युटी यील्ड लगाने पर मासिक पेंशन बनती है:
| विकल्प | 60 पर कॉर्पस | टैक्स-फ़्री एकमुश्त (60%) | मासिक पेंशन |
|---|---|---|---|
| NPS संचय डिफ़ॉल्ट | ₹52.3 लाख | ₹31.4 लाख | ₹ 11,327 |
| ऑटो चॉइस LC75 | ₹75 लाख | ₹45 लाख | ₹ 16,251 |
| एक्टिव चॉइस, 75% इक्विटी | ₹81.4 लाख | ₹48.8 लाख | ₹ 17,639 |
| मासिक पेंशन: कॉर्पस का 40% हिस्सा 6.5% सालाना यील्ड पर एन्युटाइज़ किया गया. पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं हैं और रिटायरमेंट के समय एन्युटी दरें अलग हो सकती हैं. | |||
यही है डिफ़ॉल्ट की असली क़ीमत: उसी ₹2,000 के मासिक जमा पर टैक्स-फ़्री एकमुश्त में ₹17 लाख कम और पेंशन में हर महीने ₹6,300 कम. वो भी, उम्रभर के लिए.
PFRDA के नए नियमों के तहत अब 80% तक एकमुश्त लिया जा सकता है. इससे सभी विकल्पों में पेंशन और घटती है, लेकिन डिफ़ॉल्ट और इक्विटी-आधारित विकल्पों के बीच का फ़र्क जस-का-तस रहता है.
अब क्या करें
NPS संचय उन कामगारों के लिए बना है जो कहीं एनरोल ही नहीं करते. डिफ़ॉल्ट में 9.2% रिटर्न पाने वाला सब्सक्राइबर उससे कहीं बेहतर है जिसने कभी जॉइन ही नहीं किया. एनरोलमेंट के वक़्त की चॉइस की अड़चन हटाने का PFRDA का फ़ैसला सही है.
बात संचय के ख़िलाफ़ नहीं है. बात यह है कि एनरोलमेंट के बाद डिफ़ॉल्ट पर बने रहना सही नहीं.
- एनरोल करने के बाद NPS ऐप में लॉग इन करें या किसी पॉइंट ऑफ प्रिजेंस (Point of Presence) पर जाएं. अगर अपना एसेट मिक्स ख़ुद चुनने में झिझक हो तो ऑटो चॉइस LC75 पर जाएं. अगर लंबी-अवधि की बढ़त के लिए बाज़ार के उतार-चढ़ाव झेलने की तैयारी है तो 75% के साथ एक्टिव चॉइस (Active Choice with 75% Equity) चुनें - इसे रिटायरमेंट तक बनाए रखा जा सकता है.
- अगर किसी और के लिए - मां-बाप, पति-पत्नी, घर में काम करने वाले - एनरोलमेंट करा रहे हैं, तो यह बदलाव एनरोलमेंट के समय ही करें, बाद में नहीं.
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ये लेख पहली बार मई 12, 2026 को पब्लिश हुआ.
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