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तेज़ी से बढ़ती 3 कंपनियां, लेकिन एक छुपी हुई समस्या भी है

बिक्री और मुनाफ़ा, दोनों तेज़ी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इन तीनों कंपनियों द्वारा लगाए गए हर रुपये पर जो कमाई होनी चाहिए, वो चुपचाप घटती जा रही है. असली कहानी यही है

बिक्री और मुनाफ़ा, दोनों तेज़ी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इन तीनों कंपनियों द्वारा लगाए गए हर रुपये पर जो कमाई होनी चाहिए, वो चुपचाप घटती जा रही है. असली कहानी यही हैAnand Kumar/AI-Generated Image

सारांशः मुनाफ़ा तेज़ रफ़्तार से बढ़ रहा है. बिक्री भी ऊपर जा रही है. फिर भी ROCE धीरे-धीरे नीचे खिसकता रहा है. हम तीन ऐसी कंपनियों पर नज़र डालते हैं और देखते हैं कि हमारी स्क्रीन किस तरह ग्रोथ और असली कैपिटल एफ़िशिएंसी के बीच के फ़र्क़ को पकड़ती है.

आपको तीन कंपनियां मिलीं जो हर साल 30 प्रतिशत से ज़्यादा की रफ़्तार से बढ़ रही हैं. बिक्री ऊपर और मुनाफ़ा भी ऊपर. सब कुछ ठीक लगता है.

फिर आप एक और नंबर देखते हैं. लगाए गए कैपिटल पर रिटर्न (Return on Capital Employed) यानी कारोबार हर लगाई गई रक़म पर जो कमाई करता है, वो तीनों में लगातार गिरता रहा है. वो भी थोड़ा नहीं, काफ़ी तेज़ी से.

इस स्क्रीन को यही सवाल पूछने के लिए बनाया गया है: ग्रोथ देते वक़्त कैपिटल एफ़िशिएंसी का क्या हुआ?

ग्रोथ के साथ गिरता रिटर्न

मज़बूत बिक्री और मुनाफ़े की ग्रोथ, लेकिन घटता Return on Capital Employed

कंपनी सालाना बिक्री ग्रोथ (%) सालाना मुनाफ़ा ग्रोथ (%) ताज़ा ROCE (%) FY23 में ROCE (%) 3 साल में ROCE बदलाव (%) स्टॉक रेटिंग
Netweb Technologies India 69.9 63.7 37.5 66.4 −43.5 3
KPI Green Energy 61.2 66.9 13.8 29.7 −53.6 4
Zaggle Prepaid Ocean Services 51.1 80.4 13.5 25.4 −46.8 3
बिक्री और मुनाफ़े की ग्रोथ फ़ाइनेंशियल ईयर 23 से 26 के लिए है. ROCE यानी Return on Capital Employed, वो मुनाफ़ा जो कारोबार अपनी लगाई गई पूंजी के मुक़ाबले कमाता है.

गिरता ROCE अपने आप में कोई फ़ैसला नहीं है. जो कंपनी रेवेन्यू आने से पहले क्षमता बना रही हो, या ग्राहक का पैसा मिलने से पहले बड़े ऑर्डर फ़ंड कर रही हो, वो पूरी तरह वाजिब वजहों से ROCE में गिरावट दिखा सकती है. यह गिरावट वक़्ती हो सकती है. कुछ बड़ा बनाने की क़ीमत हो सकती है.

लेकिन इससे वो सवाल बदल जाता है जो आपको पूछना चाहिए. जो कंपनी तेज़ी से बढ़ रही हो और जिसका ROCE स्थिर हो या बढ़ रहा हो, वो एफ़िशिएंट तरीक़े से कंपाउंड कर रही है. जो कंपनी तेज़ी से बढ़ रही हो लेकिन जिसका ROCE गिर रहा हो, उस पर दोबारा नज़र डालनी चाहिए: क्या आज की पूंजी कल की कमाई बना रही है, या सिर्फ़ कमज़ोर क्वालिटी की ग्रोथ फ़ंड कर रही है?

Netweb Technologies

Netweb कोई सॉफ़्टवेयर कंपनी नहीं है. यह हाई-परफ़ॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम्स, AI इन्फ़्रास्ट्रक्चर, प्राइवेट क्लाउड सॉल्युशंस और एंटरप्राइज़ वर्कस्टेशंस डिज़ाइन, बनाती और ग्राहकों तक पहुंचाती है. यह फ़र्क़ मायने रखता है.

इसका ROCE इसलिए नहीं गिरा कि यह फ़ैक्ट्रियां बना रही है. फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में कुल फ़िक्स्ड एसेट्स सिर्फ़ ₹59 करोड़ थे और कंपनी ने इन एसेट्स से साल भर में 33 गुना रेवेन्यू कमाया. दबाव कहीं और है.

नेट करेंट एसेट्स मार्च 2025 के ₹302 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 में ₹581 करोड़ हो गए. इन्वेंट्री डेज़ 53 से बढ़कर 86 हो गए. कैश कन्वर्जन साइकिल यानी पैसा लगाने से लेकर वसूलने तक का वक़्त 73 से 84 दिन हो गया. उधारियां (Borrowings) बढ़कर ₹272 करोड़ हो गईं, हालांकि Netweb कुल मिलाकर नेट कैश में बनी रही.

इसकी वजह बिज़नेस मिक्स में बदलाव है. फ़ाइनेंशियल ईयर 26 रेवेन्यू में AI सिस्टम्स की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत थी, जिसमें ₹559 करोड़ का एक स्ट्रैटेजिक ऑर्डर शामिल था. बड़े AI और ग्राफिक-प्रोसेसिंग यूनिट ऑर्डर में महंगे कंपोनेंट, लंबी इन्वेंटरी प्लानिंग और अग्रिम पूंजी चाहिए, वो भी ग्राहक की तरफ से भुगतान आने से पहले.

प्रमोटर होल्डिंग भी घटी है, जो लिस्टिंग के वक़्त के 75.5 प्रतिशत से घटकर मार्च 2026 में 67 प्रतिशत तक रह गई. ऐसा कुछ हद तक बताई गई ब्लॉक डील्स की वजह से है. हालांकि, नज़र रखना ज़रूरी है.

37.5 प्रतिशत पर, Netweb का ROCE ज़्यादातर पैमानों पर अभी भी मज़बूत है. असली परीक्षा यह है कि AI आधारित बिज़नेस मार्जिन को बेहतर रखते हुए इन्वेंटरी, रिसीवेबल्स और उधारियों को वापस काबू में ला पाता है या नहीं.

KPI Green Energy

यहां KPI Green का आना लगभग तय ही था. रिन्यूएबल एनर्जी अपने स्वरूप में ही ज़्यादा पूंजी की ज़रूरत वाला कारोबार है. 

कंपनी सोलर, विंड, हाइब्रिड, स्वतंत्र पावर प्रोड्यूसर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में विस्तार कर रही है. फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में कुल आमदनी 56 प्रतिशत बढ़कर ₹2,742 करोड़ हुई. टैक्स के बाद का मुनाफ़ा 57 प्रतिशत बढ़कर ₹509 करोड़ हुआ. EBITDA 73 प्रतिशत उछलकर ₹1,006 करोड़ पहुंचा.

नंबर मज़बूत हैं. दिक्क़त उनके पीछे छुपी है.

फ़िक्स्ड एसेट्स दोगुने से ज़्यादा हो गए, फ़ाइनेंशियल ईयर 25 में ₹2,524 करोड़ से फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में ₹5,427 करोड़. कुल एसेट्स ₹4,792 करोड़ से ₹9,882 करोड़ हो गए. कारोबार फैल रहा है, लेकिन पूंजी का आधार उससे भी तेज़ फैल रहा है. ऑपरेटिंग कैश फ़्लो बेहतर होकर ₹424 करोड़ हुआ. लेकिन इन्वेस्टिंग कैश आउटफ़्लो ₹4,071 करोड़ था, जो काफ़ी हद तक ₹3,642 करोड़ की फ़ाइनेंसिंग से फ़ंड हुआ.

KPI Green का स्वतंत्र पावर प्रोड्यूसर पोर्टफ़ोलियो 2.57 गीगावाट के पीक (GWp) पर था, जो 0.96 GWp बिजली पैदा कर रहा था और 1.61 GWp अभी निर्माणाधीन था. लैंड बैंक और ट्रांजिशन क्षमता भी तेज़ी से बढ़ी है.

प्रमोटर होल्डिंग मार्च 2023 के 54.8 प्रतिशत से मार्च 2026 तक 49.5 प्रतिशत पर आ गई है, जो आंशिक रूप से अगस्त 2024 में ₹1,000 करोड़ के क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट से है, जहां पूंजी जुटाने के लिए नए शेयर जारी हुए. प्रमोटर प्लेज यानी गिरवी शेयर मार्च 2026 में प्रमोटर शेयरों के 44.7 प्रतिशत पर थी. यह आंकड़ा ग़ौर से देखने लायक़ है.

यह कम पूंजी में कंपाउंडिंग की कहानी नहीं है. यह एक निर्माण की कहानी है. परीक्षा यह है कि नए रिन्यूएबल एसेट्स, एक बार चालू होने के बाद, ROCE को सार्थक रूप से ऊपर उठाने के लिए काफ़ी कमाई कर पाते हैं या नहीं.

Zaggle

Zaggle की स्थिति बाक़ी दोनों से अलग है.

न कोई पावर प्लांट बन रहा है, न कोई बड़ी इन्वेंटरी तैयार हो रही है. यहां ROCE की गिरावट कुछ ऐसा दिखाती है जो दिखना मुश्किल है. इसमें बिज़नेस मिक्स, अकाउंटिंग प्रेज़ेंटेशन, प्रोडक्ट में निवेश और अधिग्रहण शामिल हैं.

Zaggle के रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा उसके Propel प्लेटफ़ॉर्म से आता है, जहां भारतीय अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के तहत पॉइंट्स सकल आधार (gross basis) पर दर्ज होते हैं. डेप्रिसिएशन और एमॉर्टाइजेशन तेज़ी से बढ़े, जिसकी वजह कैपिटलाइज्ड टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट डेवलपमेंट कॉस्ट हैं. पूंजी का एक हिस्सा प्लेटफ़ॉर्म बनाने में जा रहा है, फ़िजिकल एसेट्स में नहीं.

कंपनी ने Greenedge Enterprises और Rivpe Technology का भी अधिग्रहण किया है, जिसे Zagg.Money के रूप में रिब्रांड किया गया है. ये प्रोडक्ट इकोसिस्टम को बड़ा करते हैं. साथ ही इंटीग्रेशन की जटिलता और पूंजी की ज़रूरत भी बढ़ाते हैं.

Zaggle की ग्रोथ असली है. लेकिन ROCE की गिरावट का मतलब है कि अहम सवाल बदल गया है: क्या प्रोडक्ट इन्वेस्टमेंट वाक़ई यूज़र्स की भुगतान की इच्छा बढ़ा रहे हैं, या सिर्फ़ स्केल जोड़ रहे हैं? टैक्स के बाद कैश प्रॉफ़िट मज़बूत दिखता है. फ़ाइनेंशियल ईयर 26 की पूरी एनुअल रिपोर्ट आने के बाद यह कितनी साफ़-सुथरी तरह से ऑपरेटिंग कैश फ़्लो में तब्दील होती है, यह ज़्यादा मायने रखेगा.

स्क्रीन आपको असल में क्या बता रही है

तीन कंपनियां. एक ही पैटर्न की तीन अलग-अलग वजहें.

Netweb की गिरावट काफ़ी हद तक वर्किंग कैपिटल की कहानी है: बड़े ऑर्डर, लंबे साइकिल, पैसा आने से पहले पूंजी फंसी हुई. KPI Green की गिरावट रेवेन्यू से पहले भारी इन्फ़्रास्ट्रक्चर ख़र्च के साथ सीधे-सीधे कैपेक्स आधारित है. Zaggle की गिरावट टेक्नोलॉजी कैपिटलाइजेशन, अधिग्रहण और रेवेन्यू काउंट करने के तरीक़े को दर्शाती है.

इनमें से कोई भी अपने आप में बुरी बात नहीं है. किसी असली इन्वेस्टमेंट फ़ेज़ में ROCE का गिरना, बाद में काम आने वाली चीज़ बनाने की क़ीमत हो सकती है. लेकिन अगर ग्रोथ बेहतर कैश कन्वर्ज़न के बिना ज़्यादा से ज़्यादा पूंजी मांगती रहे, तो आख़िरकार प्रमुख आंकड़े जितना दिखते हैं उससे कम बता रहे होते हैं.

ग्रोथ असली है. सवाल यह है कि इसकी असल क़ीमत क्या है.

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