Anand Kumar/AI-Generated Image
सारांशः इसकी शुरुआत पैसे की वसूली न होने के बारे में एक ही शिकायत से हुई थी. लेकिन अंत? कम से कम अभी के लिए - एक फ़ोरेंसिक ऑडिट, एक बर्ख़ास्त चेयरमैन, और यह सवाल कि भारत के सबसे बड़े कॉरपोरेट रेवेन्यू में से कुछ कभी असल में थे भी या नहीं.
SEBI ने बुधवार (3 जून 2026) को बेंगलुरु की गोल्ड रिफ़ाइनिंग और ज्वेलरी कंपनी Rajesh Exports पर 109 पन्नों का अंतरिम आदेश जारी किया. आरोप यह है कि कंपनी ने फ़ाइनेंशियल ईयर 21 से फ़ाइनेंशियल ईयर 25 के बीच क़रीब ₹15.15 लाख करोड़ के रेवेन्यू में हेरफेर किया.
शुरुआत कैसे हुई?
11 मार्च 2024 को SEBI को एक शेयरधारक की शिकायत मिली. शिकायत में कहा गया कि Rajesh Exports के ट्रेड रिसीवेबल्स दो साल से ज़्यादा समय से बकाया हैं. इसके बाद SEBI ने अक्तूबर में औपचारिक जांच शुरू की और BDO इंडिया सर्विसेज़ को फ़ोरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया.
मामला मुख्य रूप से कंपनी के विदेशी रेवेन्यू से जुड़ा है. फ़ाइनेंशियल ईयर 21 से फ़ाइनेंशियल ईयर 25 के बीच Rajesh Exports ने कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू क़रीब ₹15.45 लाख करोड़ बताया. SEBI के मुताबिक़, इसमें से 97-99% विदेशी सब्सिडियरीज़ का था - और कुल ₹15.45 लाख करोड़ में से ₹15.15 लाख करोड़ को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका.
SEBI ने जब कंपनी से कस्टमर-वाइज़ सेल्स डेटा, वेंडर-वाइज़ ख़रीद रिकॉर्ड और विदेशी सब्सिडियरीज़ के फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट मांगे, तो ज़्यादातर सवालों के जवाब या तो मिले ही नहीं या आधे-अधूरे मिले. BDO इंडिया ने भी बताया कि उसे कंपनी के ERP सिस्टम और अकाउंट बुक्स तक पहुंच देने से इनकार कर दिया गया.
नंबरों में हेरफेर
आरोपों को समझने से पहले कंपनी के कॉरपोरेट स्ट्रक्चर को जानना ज़रूरी है.
Rajesh Exports की REL Singapore में पूरी मालिकाना हिस्सेदारी है. REL Singapore की मालिकाना हिस्सेदारी स्विट्जरलैंड स्थित Global Gold Refineries AG (GGR) में है. वहीं GGR के पास Valcambi SA का स्वामित्व है, जो स्विट्जरलैंड की एक गोल्ड रिफाइनरी है. राजेश एक्सपोर्ट्स ने Valcambi SA को अपनी मुख्य ऑपरेटिंग इकाई बताया है.
जांच के दौरान SEBI ने कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू की तुलना Valcambi SA के ऑडिटेड स्टैंडअलोन फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट से की. कैलेंडर ईयर 2023 में Valcambi SA का स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹542.68 करोड़ था. उसी दौरान GGR का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹2.93 लाख करोड़ और Rajesh Exports का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹2.81 लाख करोड़ था.
Rajesh Exports ने SEBI को बताया कि Valcambi SA के अकाउंट में सिर्फ़ प्रोसेसिंग चार्जेज़ और वैल्यू-एडिशन इनकम दिखती है, जबकि GGR गोल्ड ट्रांज़ेक्शन की पूरी वैल्यू दर्ज करती है. SEBI ने कहा कि इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज़ नहीं दिए गए. कंपनी ने स्विस डेटा प्रोटेक्शन क़ानूनों का हवाला देकर कुछ सब्सिडियरी जानकारी देने से इनकार किया, लेकिन SEBI ने इस दलील को ख़ारिज करते हुए कहा कि यह भारतीय नियामक से जानकारी छुपाने का आधार नहीं हो सकता.
SEBI ने कंपनी की स्टैंडअलोन बुक्स भी खंगालीं. फ़ाइनेंशियल ईयर 22 से फ़ाइनेंशियल ईयर 24 के बीच Rajesh Exports ने 'Affluence Shares and Stocks' नाम की एक इकाई के साथ ₹11,487 करोड़ की बिक्री और ₹11,488 करोड़ की ख़रीद दर्ज की. ये ट्रांज़ेक्शन इस दौरान कंपनी की कुल स्टैंडअलोन बिक्री और ख़रीद का लगभग दो-तिहाई हिस्सा थे. जब SEBI ने Affluence Shares and Stocks से जानकारी मांगी, तो उसने कहा कि उसका Rajesh Exports से कोई कारोबारी रिश्ता नहीं था - वह सिर्फ़ Mehta के निजी खाते से डील करती थी. Rajesh Exports ने सफ़ाई दी कि MCX से चल रहे मुक़दमे की वजह से ट्रेड Mehta के निजी खाते से कराने पड़े. SEBI ने यह दलील भी नहीं मानी, क्योंकि इसके समर्थन में न कोई समकालीन दस्तावेज़ था, न बोर्ड की मंज़ूरी.
SEBI ने कंपनी के फ़ंड की आवाजाही पर भी सवाल उठाए. आरोप है कि Rajesh Exports से Mehta से जुड़े खातों में ₹339 करोड़ ट्रांसफ़र हुए, जिनमें से ₹232 करोड़ वापस आए. कुल मिलाकर ₹926 करोड़ के ट्रांज़ेक्शन Mehta से जुड़े थे, जो बिना बोर्ड या ऑडिट कमेटी की मंज़ूरी के और बिना ज़रूरी रिलेटेड-पार्टी डिस्क्लोज़र के किए गए थे. आदेश में Elest का भी ज़िक्र है - अक्तूबर 2020 में Mehta और उनके भाई Prashant Mehta ने यह कंपनी बनाई, जो लिथियम-आयन सेल, बैटरी पैक और इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाती है. SEBI को Rajesh Exports से Elest में ₹215.85 करोड़ का शुद्ध आउटफ़्लो मिला, जिसे रिलेटेड-पार्टी ट्रांज़ेक्शन के रूप में ठीक से दर्ज नहीं किया गया. अलग से, अफ़्रीका में गोल्ड माइनिंग एसेट्स में ₹1,035 करोड़ के दावे किए गए निवेश पर भी सवाल उठे, जिनके लिए कंपनी कोई दस्तावेज़ नहीं दे सकी.
कंपनी ने क्या कहा?
Rajesh Exports ने हर आरोप को नकारा है. एक्सचेंज फ़ाइलिंग में कंपनी ने कहा कि उसका घोषित रेवेन्यू सही है, कोई ओवरस्टेटमेंट नहीं है और पूरे मामले को SEBI के साथ 'कम्युनिकेशन गैप और भ्रम' बताया.
SEBI का अनुमान है कि इस कथित हेरफेर और फ़ंड मूवमेंट से शेयरधारकों की ₹12,726 करोड़ की वेल्थ का नुक़सान हुआ. कंपनी के सबसे बड़े संस्थागत शेयरधारकों में LIC शामिल है, जिसके पास ताज़ा उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक़ Rajesh Exports का क़रीब 10.8% हिस्सा है. आदेश के बाद शेयर तेज़ी से गिरे. 4 जून 2026 को शेयर 5% लोअर सर्किट पर बंद हुआ और BSE पर क़ीमत ₹104.65 रही, जो 22 दिसंबर 2025 को बने 52-हफ़्ते के उच्च स्तर ₹239 से 54% नीचे है.
फ़िलहाल Mehta पर पाबंदी है - वे आगे के निर्देश आने तक Rajesh Exports के सिक्योरिटीज़ में कोई लेनदेन नहीं कर सकते. कंपनी और Mehta, दोनों को कार्यवाही जारी रहने के दौरान पूरा जवाब देने का अधिकार है.
यह भी पढ़ेंः एक इस्तीफ़ा. ₹70,000 करोड़ स्वाहा. अब क्या?