फंड वायर

वो घरेलू म्यूचुअल फ़ंड जो विदेशी शेयरों में निवेश करते हैं

किसी ग्लोबल फ़ंड में नई SIP शुरू करना अब भरोसे लायक़ नहीं रहा. पर अगर आपके पास Parag Parikh Flexi Cap जैसा कोई फ़ंड है, तो आपका पहले से ही Alphabet, Amazon और Microsoft में निवेश है. यहां ऐसे घरेलू फ़ंड के बारे में जानिए जो अपना एक हिस्सा विदेश में लगाते हैं.

किसी ग्लोबल फ़ंड में नई SIP शुरू करना अब भरोसे लायक़ नहीं रहा. पर अगर आपके पास Parag Parikh Flexi Cap जैसा कोई फ़ंड है, तो आपका पहले से ही Alphabet, Amazon और Microsoft में निवेश है. यहां ऐसे घरेलू फ़ंड के बारे में जानिए जो अपना एक हिस्सा विदेश में लगाते हैं.Ujjal Das/AI-Generated Image

सारांशः इंटरनेशनल म्यूचुअल फ़ंड में नई SIP काफ़ी हद तक रुक चुकी है. फिर भी, कई घरेलू म्यूचुअल फ़ंड अब भी अपने पोर्टफ़ोलियो का एक हिस्सा विदेश में लगाते हैं. यहां हम उन फ़ंड की बात कर रहे हैं, मौजूद विकल्पों को समझाते हैं और यह भी बताते हैं कि ग्लोबल ETF अभी दिखने से ज़्यादा महंगे क्यों पड़ सकते हैं.

भारत के सबसे लोकप्रिय फ़ंड में से एक, Parag Parikh Flexi Cap का ढक्कन खोलिए, तो आपको उसके अंदर Alphabet, Meta, Amazon और Microsoft मिलेंगे, यानी फ़ंड का क़रीब 10वां हिस्सा अमेरिकी शेयरों में. Edelweiss Technology का Nvidia और Apple में निवेश है. DSP Healthcare के पास Illumina है, जो एक अमेरिकी जीन-सीक्वेंसिंग कंपनी है. इनमें से कोई भी इंटरनेशनल फ़ंड नहीं है. ये तो आम भारतीय फ़ंड हैं जो अपना एक हिस्सा विदेश में लगाते हैं, और वो हिस्सा अभी और काम का हो गया है, क्योंकि विदेशी शेयर ख़रीदने का आम रास्ता काफ़ी हद तक बंद हो चुका है.

23 जुलाई को, Baroda BNP Paribas Aqua ने नई SIP रजिस्ट्रेशन लेना बंद कर दिया. यह आख़िरी इंटरनेशनल फ़ंड था जो अभी तक खुला था; बाक़ी पहले ही बंद हो चुके थे. भारत इस बात की सीमा तय करता है कि उसके फ़ंड विदेश में कितना पैसा लगा सकते हैं, और एक के बाद एक फ़ंड हाउस अपनी हद तक पहुंच चुका है. पुरानी SIP चलती रहती हैं, पर नई शुरू करना नामुमकिन हो गया था, अब तक.

3 अगस्त से, Baroda Aqua फिर से नए निवेश के लिए खुल रहा है, क्योंकि उसके पास थोड़ी जगह बन गई है, हालांकि वो चेतावनी देता है कि सीमा के क़रीब पहुंचते ही वो इसे दोबारा रोक भी सकता है. यानी दरवाज़ा थोड़ा खुला है, पूरा नहीं, और वो भी सिर्फ़ एक फ़ंड में.

तो अब विदेश में निवेश कैसे करें?

तीन रास्ते बचे हैं. एक्सचेंज पर मौजूद कोई (ग्लोबल एक्सचेंज-ट्रेडेड फ़ंड) ETF, तेज़ है पर, जैसा हम आगे देखेंगे, आज महंगा है. लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम आपको पैसा विदेश भेजकर वहां के शेयर ख़ुद ख़रीदने देती है, पर इसके साथ टैक्स की अतिरिक्त झंझट और काग़ज़ी काम जुड़ा है. या फिर आप कोई ऐसा फैला हुआ भारतीय फ़ंड रख सकते हैं जो पहले से अपना एक हिस्सा विदेश में लगाता है, यानी वो रास्ता जो नीचे की टेबल में है.

हमने हर इक्विटी और हाइब्रिड फ़ंड की जून 2026 की होल्डिंग देखी, और उनमें से वो फैले हुए फ़ंड चुने जो कम से कम 10% हिस्सा विदेशी शेयरों में रखते हैं.

फैले हुए फ़ंड जो 10% या उससे ज़्यादा विदेशी शेयर रखते हैं

फ़ंड
किसमें निवेश करता है विदेशी शेयर (%) 1 साल (%) 3 साल (%) 5 साल (%)
Edelweiss Technology टेक्नोलॉजी 26.8 8.2 NA NA
ICICI Prudential Passive Multi-Asset FoF मल्टी-एसेट 26.6 11.3 13.2 NA
Franklin India Technology टेक्नोलॉजी 20.5 −5.0 12.7 9.8
Kotak Pioneer इनोवेशन थीम 18.6 10.6 20.1 16.8
DSP Healthcare फ़ार्मा और हेल्थकेयर 17.2 9.8 21.2 16.6
Axis Innovation इनोवेशन थीम 14.9 9.2 16 12.4
DSP Value वैल्यू शेयर 13.1 11.6 17.5 14
DSP Natural Resources & New Energy एनर्जी और रिसोर्स 12.8 19.2 20.4 16.1
SBI Children's (Investment Plan) फ़्लेक्सी-कैप 12.8 18.4 22 21.4
Invesco India Multi Asset Allocation मल्टी-एसेट 11.7 15.6 NA NA
SBI Technology Opportunities टेक्नोलॉजी 11.3 −3.6 11.8 9.4
DSP Multi Asset Allocation मल्टी-एसेट 11.2 17.9 NA NA
Parag Parikh Flexi Cap फ़्लेक्सी-कैप 10.6 −1.0 14 13.4
SBI Focused फ़्लेक्सी-कैप (फ़ोकस्ड) 10.4 13.6 15.9 13.9
Motilal Oswal Asset Allocation Passive FoF (Conservative) मल्टी-एसेट 10.3 10 13.2 11
रिटर्न पूरे फ़ंड के हैं, अकेले विदेशी हिस्से के नहीं, 29 जुलाई 2026 तक. होल्डिंग 30 जून 2026 तक.

इसे ध्यान से पढ़िए. वो विदेशी हिस्सा बस एक हिस्सा ही है: ज़्यादा से ज़्यादा फ़ंड का एक-चौथाई, और ज़्यादातर में 10 से 15%, जबकि बाक़ी पैसा भारत में लगा है. ये कोई भेष बदले हुए ग्लोबल फ़ंड नहीं हैं और जो रिटर्न दिखाए गए हैं, वो पूरे फ़ंड के हैं, अकेले विदेशी हिस्से के नहीं. इनमें से कोई एक तभी चुनिए, जब फ़ंड ख़ुद आपकी योजना में सही बैठता हो. विदेशी हिस्सा एक बोनस है, ख़रीदने की अकेली वजह नहीं.

ETF वाला रास्ता, और यह महंगा क्यों है

अगर आप जान-बूझकर विदेशी शेयर जोड़ना चाहते हैं, तो एक ग्लोबल ETF तैयार रास्ता है, पर क़ीमत का ध्यान रखिए. एक ETF की बाज़ार क़ीमत उसकी अपनी होल्डिंग की क़ीमत यानी NAV से ऊपर हो सकती है; वही फ़ासला प्रीमियम है. इन ETF ने 2024 में नई यूनिट बनाना बंद कर दिया था, जब ये अपनी अलग $1 अरब की सीमा तक पहुंच गए, इसलिए सप्लाई तय है जबकि मांग नहीं. अब जब वो ख़ास फ़ंड बंद हो चुके हैं, तो उस मांग के पास जाने को कम जगहें बची हैं, जो प्रीमियम को और ऊपर धकेल देती हैं.

ग्लोबल ETF: प्रीमियम अभी कहां है

ग्लोबल ETF
NAV (₹) क़ीमत (₹) अभी प्रीमियम (%) 52-हफ़्ते का औसत प्रीमियम (%) 52-हफ़्ते का प्रीमियम दायरा (%) 52-हफ़्ते का औसत रोज़ाना कारोबार (₹ करोड़)
Motilal Oswal NASDAQ 100 254.32 315.36 24 9 −3.0 से 27.7 23.63
Mirae Asset NYSE FANG+ 154.79 191.34 23.6 19.8 11.8 से 30.1 5.43
Mirae Asset S&P 500 Top 50 62.9 77.37 23 19.4 14.5 से 23.7 1.65
Motilal Oswal Nasdaq Q50 114.64 140.71 22.7 12.7 −1.7 से 26.4 1.44
Mirae Asset Hang Seng TECH 19.92 23.16 16.3 19.4 12.4 से 36.4 2.58
Nippon India Hang Seng BeES 466.36 491.18 5.3 15 3.4 से 25.6 8.88
NAV, क़ीमत और प्रीमियम 29 जुलाई 2026 तक. प्रीमियम का दायरा और औसत डेली ट्रेडिंग सिर्फ़ NSE के उस तारीख़ तक के एक साल के हैं. प्रीमियम यानी बाज़ार क़ीमत, NAV से कितनी ज़्यादा है; माइनस का निशान छूट दिखाता है.

और दोनों Nasdaq फ़ंड तेज़ी से चढ़े हैं. Motilal Oswal NASDAQ 100 ETF मार्च में अपने NAV से बमुश्किल 1% ऊपर ट्रेड कर रहा था; तब से यह हर महीने चढ़ता गया, अब 24% तक और Nasdaq Q50 ने भी लगभग यही किया. बाक़ी दो अमेरिकी फ़ंड, FANG+ और S&P 500, इस तरह नहीं उछले. वो तो पहले से ही महंगे थे, मार्च में क़रीब 18 से 20% पर.

चारों अमेरिकी ETF अब 22 से 24% के बीच सिमटे हुए हैं, और हर एक अपने ही एक साल के औसत प्रीमियम से ऊपर ट्रेड कर रहा है. प्रीमियम वो अतिरिक्त रक़म है जो आप फ़ंड की होल्डिंग के ऊपर चुकाते हैं, और यह एक जगह टिकी नहीं रहती.

आप इसका असर इसी हफ़्ते देख सकते थे. 22 जुलाई और 29 जुलाई के बीच, NASDAQ 100 ETF का NAV, यानी उसकी होल्डिंग की क़ीमत, रुपये में 7.0% गिरी, पर एक्सचेंज पर उसकी क़ीमत सिर्फ़ 2.5% गिरी. प्रीमियम 18.3% से उछलकर 24% हो गया और उसने ज़्यादातर गिरावट छिपा ली. ख़रीदार गिरावट से बच नहीं निकले. उन्होंने बस उसके लिए ज़्यादा चुकाया. यह उल्टी तरफ़ भी झूल सकता है.

इसलिए, क्लोजर से उतना बदलाव नहीं आएगा जितना लग रहा है. विदेशी इक्विटी अभी भी उन फंड्स के ज़रिए आपकी पहुंच में है, जो शायद आपके पास पहले से हों और ETF के ज़रिए उन लोगों के लिए जो और निवेश करना चाहते हैं. असली सवाल यह है कि कौन सा रास्ता आप पर बैठता है, और जिस फ़ंड पर आपकी नज़र है, वो ख़रीदने लायक़ है भी या नहीं. वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र इसी के लिए है.

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यह भी पढ़ें: अब कोई ग्लोबल फ़ंड नई SIP नहीं लेगा, और ETF महंगे पड़ रहे हैं

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