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बैलेंस शीट तो बढ़ी, क्या बिज़नेस भी बढ़ा है?

6 stocks tripled their assets. Did their businesses grow?

6 stocks tripled their assets. Did their businesses grow?Anand Kumar/AI-Generated Image

सारांशः एक स्टॉक स्क्रीन ऐसी छह बड़ी कंपनियों की पहचान करती है जिनकी संपत्ति का आधार तीन साल में तीन गुना से ज़्यादा बढ़ा है. लेकिन भारी बैलेंस शीट का मतलब हमेशा ज़्यादा क्षमता या ज़्यादा मुनाफ़ा नहीं होता. हम इनमें से तीन पर ग़ौर करते हैं कि असल में इस बढ़त के पीछे क्या था, और क्या वो अपनी क़ीमत वसूल कर रही है.

कुछ कंपनियां पहले मुनाफ़ा बढ़ाती हैं. कुछ पह1ले बैलेंस शीट बनाती हैं.

यह स्क्रीन ऐसी कंपनियां खोजती है जिनका मार्केट कैप ₹5,000 करोड़ से ज़्यादा है और जिनका नेट ब्लॉक (फ़िक्स्ड एसेट्स) तीन साल में तीन गुना से ज़्यादा हो गया है. पहली नज़र में यह एक कैपेक्स स्क्रीन लगती है. लेकिन यह आधी कहानी है.

यहां हर कंपनी ने नई फ़ैक्ट्री के लिए कंक्रीट नहीं डाला. कुछ ने दूसरे बिज़नेस ख़रीदे. कुछ ने अपने पुराने जॉइंट वेंचर या सहयोगी कंपनियों को अपने खातों में मिला लिया. कुछ ने बस राइट-ऑफ़-यूज़ एसेट जोड़े, यानी लंबी लीज़ की वो वैल्यू जो अब नए अकाउंटिंग नियमों के तहत बैलेंस शीट में दर्ज होती है. कुल मिलाकर रास्ता मायने रखता है.

बड़ा एसेट बेस ऑपरेटिंग लेवरेज बना सकता है, यानी तय ख़र्च निकलने के बाद रेवेन्यू से तेज़ मुनाफ़ा बढ़ाने की ताक़त. लेकिन यही स्क्रीन धोखा भी दे सकती है. नेट ब्लॉक इसलिए भी बढ़ सकता है क्योंकि कोई अकाउंटिंग तरीक़ा बदल गया, कोई लीज़ का ढांचा बदल गया या कोई सहयोगी कंपनी सब्सिडियरी बन गई. इनमें से कोई भी एक यूनिट नई ऑपरेटिंग क्षमता नहीं जोड़ता.

असली सवाल आसान हैं. संपत्ति का आधार किस वजह से बढ़ा? क्या वो सस्ते में ख़रीदी गई? और क्या वो काफ़ी कमा रही है? नीचे दी गई छह कंपनियां हर सवाल का अलग जवाब देती हैं. हम तीन के बारे में चर्चा कर रहे हैं. 

जब बैलेंस शीट मुनाफ़े से पहले बढ़ती है

एसेट की बढ़त साफ़ है; उसके पीछे की वजह जांचनी होगी.

कंपनी
FY23 नेट ब्लॉक (करोड़ ₹) FY26 नेट ब्लॉक (करोड़ ₹) नेट ब्लॉक में बढ़त स्टॉक रेटिंग
InterGlobe Aviation 1,143 11,124 9.7 गुना 2
Bajaj Auto 2,792 13,313 4.8 गुना 4
Torrent Pharma 7,716 28,711 3.7 गुना 3
PCBL Chemical 1,890 6,332 3.4 गुना 2
KIMS 1,288 4,243 3.3 गुना 2
GMR Power 2,351 7,135 3 गुना 2

InterGlobe Aviation

InterGlobe Aviation भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन 'IndiGo' चलाती है और इस लिस्ट में इसका होना एक चेतावनी के साथ आता है. काग़ज़ पर इसकी प्रॉपर्टी, प्लांट और उपकरण (PPE) फ़ाइनेंशियल ईयर 23 के क़रीब ₹1,111 करोड़ से बढ़कर फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में ₹11,087 करोड़ हो गई, यानी 10 गुना उछाल. लेकिन एयरलाइन के लिए अकेले PPE एक भ्रामक नज़रिया है.

IndiGo लंबे समय से ऑपरेटिंग लीज़ और सेल-एंड-लीज़बैक सौदों के ज़रिए अपनी ज़्यादातर ऑपरेटिंग एसेट्स राइट-ऑफ़-यूज़ एसेट के तहत रखती आई है, जिनमें एक विमान किसी फ़ाइनेंसर को बेचकर तुरंत वापस लीज़ पर ले लिया जाता है. फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में ये अब भी PPE से कहीं ज़्यादा थे, क़रीब ₹52,054 करोड़. PPE, राइट-ऑफ़-यूज़ एसेट और कैपिटल वर्क इन प्रोग्रेस (CWIP) को जोड़ें, तो कुल एसेट बेस फ़ाइनेंशियल ईयर 23 से क़रीब 2.3 गुना बढ़ा, 10 गुना के आसपास कुछ भी नहीं. 

स्क्रीन असल में जो पकड़ रही है वो यह है कि बेड़े को फ़ाइनेंस करने का तरीक़ा बदल गया है. IndiGo अब ज़्यादा अपने मालिकाना और फ़ाइनेंस-लीज़ वाले विमानों की तरफ़ झुक रही है, जो बिना उतनी नई क्षमता जोड़े एसेट को PPE में डालता है. ऑपरेटिंग स्तर पर बेड़ा 304 से बढ़कर 441 विमान हो गया और फ़ाइनेंशियल ईयर 26 क्षमता 9.5% बढ़ी: असली बढ़त तो थी, लेकिन उतनी नहीं जितनी नेट ब्लॉक का आंकड़ा बताता है.

यह बदलाव लंबे समय में लागत घटा सकता है और बेड़े पर पकड़ मज़बूत कर सकता है, लेकिन यह पूंजी की ज़रूरत भी बढ़ाता है. IndiGo इस स्क्रीन पर चेतावनी का लेबल है: नेट ब्लॉक इसलिए चढ़ सकता है क्योंकि फ़ाइनेंस की रणनीति बदली, न कि इसलिए कि ऑपरेटिंग क्षमता कई गुना हुई.

Bajaj Auto

Bajaj Auto मोटरसाइकिल, तिपहिया और इलेक्ट्रिक वाहन बनाती है. लेकिन इसकी कंसोलिडेटेड संपत्ति की बढ़त मुख्य रूप से EV कैपेक्स या Triumph साझेदारी की वजह से नहीं है. बड़ी घटना KTM है.

फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में Bajaj ने Pierer/KTM ढांचे पर नियंत्रण ले लिया. KTM पहले एक सहयोगी कंपनी थी, इक्विटी मेथड के तहत दर्ज; सिर्फ़ KTM के मुनाफ़े में Bajaj का हिस्सा दर्ज होता था, उसकी पूरी बैलेंस शीट नहीं. नियंत्रण लेते ही KTM सीधे Bajaj के खातों में जुड़ गई, जिससे ₹4,207 करोड़ की PPE, CWIP और राइट-ऑफ़-यूज़ एसेट आई, साथ में ₹9,338 करोड़ का क़र्ज़.

ऑपरेटिंग सवाल यह है कि क्या Bajaj, KTM को एक दबाव में चल रहे वैश्विक प्रीमियम मोटरसाइकल बिज़नेस से एक मुनाफ़े वाले प्लेटफ़ॉर्म में बदल सकती है.

मुख्य बिज़नेस मज़बूत दिखता है. स्टैंडअलोन फ़ाइनेंशियल ईयर 26 रेवेन्यू 17% बढ़कर ₹58,732 करोड़ हुआ, EBITDA 19% चढ़कर ₹12,019 करोड़, और टैक्स के बाद मुनाफ़ा 21% बढ़कर ₹9,825 करोड़. इलेक्ट्रिक वाहन रेवेन्यू ₹8,000 करोड़ पार कर गया, घरेलू बिक्री का 20% से ज़्यादा, जबकि KTM-Triumph वैश्विक रेवेन्यू क़रीब ₹5,000 करोड़ रहा, 40% ज़्यादा.

Bajaj अब एक साथ दो कहानियां चला रही है: एक स्वस्थ घरेलू कारोबार और एक बड़ा विदेशी अधिग्रहण. फ़ायदा प्रीमियम बाज़ार और KTM के पटरी पर लौटने में है. जोख़िम यह है कि KTM ऐसा क़र्ज़ और काम चलाने के पैसे का दबाव सौंप दे जिसे स्टैंडअलोन बिज़नेस को झेलना पड़े.

PCBL Chemical

PCBL Chemical कार्बन ब्लैक और स्पेशलिटी केमिकल बनाती है, और इसकी संपत्ति की बढ़त अधिग्रहण और कैपेक्स दोनों से हुई है.

अधिग्रहण वाला हिस्सा है Aquapharm, जिसे PCBL को पानी की सफ़ाई वाले केमिकल, तेल-गैस केमिकल और दूसरे ख़ास इस्तेमाल वाले क्षेत्रों में ले जाने के लिए ख़रीदा गया. कैपेक्स वाला हिस्सा है कार्बन ब्लैक और स्पेशलिटी ब्लैक की बढ़ी हुई क्षमता. इससे PCBL एक मिश्रण बन जाती है: कुछ विविधता, कुछ क्षमता निर्माण.

फ़ाइनेंशियल ईयर 26 के नंबर बताते हैं कि स्क्रीन में सावधानी क्यों ज़रूरी है. कंसोलिडेटेड रेवेन्यू क़रीब ₹8,190 करोड़ रहा, चो क़रीब 3% कम था. EBITDA क़रीब ₹1,081 करोड़ रहा, और टैक्स के बाद मुनाफ़ा तेज़ी से गिरकर क़रीब ₹198 करोड़ रह गया. कार्बन ब्लैक का प्रोडक्शन रिकॉर्ड क़रीब 6.2 लाख टन पहुंचा, फिर भी मार्जिन कमज़ोर रहे. Aquapharm भी संघर्ष करती रही, जिसका रेवेन्यू क़रीब ₹1,443 करोड़ और चौथी तिमाही का EBITDA सिर्फ़ ₹29 करोड़ रहा.

संपत्ति अपनी जगह है; ऑपरेटिंग लेवरेज नहीं दिखा. अगर कार्बन ब्लैक के मार्जिन, यानी बिक्री क़ीमत और कच्चे माल की लागत के बीच का फ़ासला, सुधरें और Aquapharm बेहतर हो, तो इस दबे हुए आधार से मुनाफ़े की बढ़त रेवेन्यू की बढ़त से कहीं आगे निकल सकती है. लेकिन कार्बन ब्लैक साइक्लिकल है, इंपोर्ट का दबाव क़ीमत पर सीमा लगाता है और Aquapharm को अभी अपनी ₹3,800 करोड़ की क़ीमत साबित करनी है. PCBL ने क्षमता बनाई और ख़रीदी है. अब उसे उस पर कमाना है.

वैल्यू रिसर्च की राय

एक स्क्रीन बढ़ती बैलेंस शीट दिखा सकती है, लेकिन यह नहीं बता सकती कि वो बढ़त असली है या नहीं, और क्या वो अपनी क़ीमत के लायक़ है. वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र यह काम आपके लिए करता है, रिसर्च-आधारित रेकमंडेशन, साफ़ ख़रीदने-रखने की सलाह और हर रेटिंग के पीछे का तर्क देकर.

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